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इमाम अली की शहादत की पूर्व संध्या पर हुई मजलिसें
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इमाम अली की शहादत की पूर्वसंध्या पर जगह-जगह मजलिसों का आयोजन किया गया। हर साल निकलने वाला जुलूस नहीं निकला, लेकिन घरों में ही ताबूत सजाए गए। अलम उठाए गए और ताबूत की जियारत भी हुई।
रविवार को शहर भर में हजरत अली की शहादत की पूर्व संध्या पर मजलिसों का सिलसिला जारी रहा। कोरोना संक्रमण के कारण जुलूस तो नहीं उठाया गया लेकिन लोगों ने घरों में ताबूत सजाकर उसकी जियारत की। काली महल स्थित शिया मस्जिद में मजलिस को खिताब करते हुए हाजी फरमान हैदर ने कहा कि मौला अली की शहादत दुनिया के लिए एक ऐसा वक्त था जिससे सारी दुनिया हिल गई थी। मौला अली को जिस समय जरबत लगी तो उन्होंने आवाज दी कि काबे के रब की कसम मैं आज कामयाब हो गया। मौला अली ने हसन और हुसैन जैसे बच्चे दुनिया को दिए। जैनब और उम्मे कुलसुम जैसी बेटियां दीं। मौला अली ने पूरी दुनिया को बताया कि इंसाफ के आगे अगर तुम्हारी गरदन भी कट जाए तो उससे पीछे मत हटना। यही वजह थी कि मौका को इंसाफ के लिए कत्ल कर दिया गया था।
पठानी टोला में अजीज हैदर के निवास पर शाम को कुछ ही लोगों के दरमियां मजलिस हुई, उसके बाद इफ्तार हुआ। कोरोना के खातमे के लिए दुआ ख्वानी हुई। इमानिया कॉलेज में अंजुमने नसीरुल मोमीनीन द्वारा होने वाली शब्बेदारी भी मात्र एक मजलिस के बाद समाप्त हो गई। ताबूत सजाकर लोगों ने उसकी जियारत की। शहर के विभिन्न इलाकों में मजलिसों का सिलसिला मंगलवार की शाम तक जारी रहेगा।
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रविवार को शहर भर में हजरत अली की शहादत की पूर्व संध्या पर मजलिसों का सिलसिला जारी रहा। कोरोना संक्रमण के कारण जुलूस तो नहीं उठाया गया लेकिन लोगों ने घरों में ताबूत सजाकर उसकी जियारत की। काली महल स्थित शिया मस्जिद में मजलिस को खिताब करते हुए हाजी फरमान हैदर ने कहा कि मौला अली की शहादत दुनिया के लिए एक ऐसा वक्त था जिससे सारी दुनिया हिल गई थी। मौला अली को जिस समय जरबत लगी तो उन्होंने आवाज दी कि काबे के रब की कसम मैं आज कामयाब हो गया। मौला अली ने हसन और हुसैन जैसे बच्चे दुनिया को दिए। जैनब और उम्मे कुलसुम जैसी बेटियां दीं। मौला अली ने पूरी दुनिया को बताया कि इंसाफ के आगे अगर तुम्हारी गरदन भी कट जाए तो उससे पीछे मत हटना। यही वजह थी कि मौका को इंसाफ के लिए कत्ल कर दिया गया था।
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पठानी टोला में अजीज हैदर के निवास पर शाम को कुछ ही लोगों के दरमियां मजलिस हुई, उसके बाद इफ्तार हुआ। कोरोना के खातमे के लिए दुआ ख्वानी हुई। इमानिया कॉलेज में अंजुमने नसीरुल मोमीनीन द्वारा होने वाली शब्बेदारी भी मात्र एक मजलिस के बाद समाप्त हो गई। ताबूत सजाकर लोगों ने उसकी जियारत की। शहर के विभिन्न इलाकों में मजलिसों का सिलसिला मंगलवार की शाम तक जारी रहेगा।
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