Varanasi News: विद्यानिवास कहते थे...रामकथा एक जादू की तरह, विद्वानों ने रखे विचार; दी श्रद्धांजलि
Varanasi News: साहित्यकार पंडित विद्या निवास मिश्र के साहित्य पर विद्वानों ने गंभीर विमर्श किया। इसे युवाओं को भी पढ़ने की अपील की। कहा कि विद्या के लेखनी का दायरा बहुत बड़ा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पं. विद्या निवास मिश्र की जन्मशती पर तीन दिवसीय संगोष्ठी के दूसरे दिन दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ शिक्षा मंडल सभागार में विद्वानों ने उनके साहित्यिक योगदान पर विचार रखे। संगोष्ठी का आयोजन उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, साहित्यिक संघ, रजा फाउंडेशन, मां भवानी महाविद्यालय चंदौली और लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
प्रभाकर सिंह ने कहा कि पं. विद्या निवास का कहना था कि रामकथा एक जादू की तरह है। इसका प्रभाव सिर्फ हिंदुओं पर नहीं है बल्कि रामकथा ने सभी जाति धर्म के लोगो को प्रभावित किया। शशिकला पांडेय ने पं. मिश्र की भाषा को लोक-संस्कृति से जुड़ी, सहज और लालित्यपूर्ण बताया।
प्रो. श्रद्धानंद ने उनके ललित निबंधों, लोक-संस्कृति और संस्कृत साहित्य के संपादन कार्यों को रेखांकित किया। अध्यक्षता करते हुए डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि पं. मिश्र का साहित्य भारत की अखंड सांस्कृतिक दृष्टि से जुड़ा है। पंडित जी हिंदी साहित्य को अपने ललित निबंधों और लोक जीवन की सुगंध से सुवासित करने वाले ऐसे साहित्यकार थे, जिन्होंने आधुनिक विचारों को पारंपरिक सोच में खपाया था।
लेखनी पर हुई चर्चा
उन्होंने हिंदी में सदैव आंचलिक बोलियों को महत्व दिया। बीएचयू के गोपबंधु मिश्र ने पंडित जी को एक युग बताते हुए कहा कि ललित निबंध विधा को उन्होंने नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। भारतीय संस्कृति और लोक-जीवन को अपनी लेखनी से समृद्ध किया। भाषा-साहित्य के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया और समकालीन साहित्य पर अपनी गहरी छाप छोड़ी।
अध्यक्षता करते हुए अनंत मिश्रा ने कहा कि पं. विद्या निवास मिश्र का साहित्य एक तीर्थ की तरह है, जो परंपरा और आधुनिकता, लोक और शास्त्र के बीच सेतु बनाता है। रांची से आए मयंक मुरारी, प्रयागराज के श्रीप्रकाश मिश्रा, सुशील कुमार पांडेय, बलराज पांडेय, केके सिंह, प्रो. दिलीप सिंह आदि ने विचार रखे।
पारिजात : पंडित विद्यानिवास मिश्र का हुआ लोकार्पण
संगोष्ठी में पं. विद्या निवास मिश्र पर केंद्रित नीरजा माधव की पुस्तक शब्द पारिजात : पंडित विद्यानिवास मिश्र का लोकार्पण किया गया है। उन्होंने पुस्तक में मिश्रजी के निबंधों के बहुआयामी संसार के बारे में और प्रकृति, लोकतत्व, बौद्धिकता, सर्जनात्मकता, कल्पनाशीलता, काव्यात्मकता, रम्य रचनात्मकता, भाषा की उर्वर सृजनात्मकता, सम्प्रेषणीयता पर बात की। हिंदी की शब्द संपदा, हिंदी और हम, हिंदीमय जीवन और प्रौढ़ों का शब्द संसार जैसी उनकी पुस्तकों ने हिंदी के दायरे के बारे में बताया।