उप्र संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार: काशी को मिला सम्मान, कलाजगत में उत्साह की लहर
उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पुरस्कारों की घोषणा के बाद काशी के कलाजगत में खुशी की लहर है। कला उन्नयन के साथ ही कला के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वालों को पुरस्कृत किया जाएगा। संगीत कला उन्नयन के लिए संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र तथा काशीराज परिवार के प्रतिनिधि अनंत नारायण सिंह को संयुक्त रूप से अकादमी पुरस्कार दिया जाएगा।
मेरा नहीं बनारस का है यह पुरस्कार
संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने कहा कि पुरस्कार मेरा नहीं बनारस का है। काशी के हर एक व्यक्ति का है। पुरस्कार मिलने से बनारस को पहचान मिली है यह मेरे लिए बड़ी बात है। पुरस्कार मिलने के बाद जिम्मेदारियां और भी बढ़ जाती हैं। हमारा प्रयास होगा कि हम कला के क्षेत्र में अपने शहर, प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। वर्तमान में प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र आईआईटी बीएचयू में इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के विभागाध्यक्ष और संकटमोचन मंदिर के महंत हैं।
नौटंकी को समर्पित है पूरा जीवन
नौटंकी के लिए डॉ. अष्टभुजा मिश्रा के नाम की घोषणा होने पर नाटककारों में उत्साह है। डॉ. अष्टभुजा मिश्रा ने कहा कि शिव की नगरी में सब कुछ शिव का ही है। उनकी ही कृपा से यह सुअवसर मिला है। उन्होंने बताया कि संगीत नाटक अकादमी के पुरस्कार से जिम्मेदारियां बढ़ जाएंगी। कला और अभिनय के क्षेत्र में बेहतर करने का प्रयास होगा। बता दें कि डॉ. अष्टभुजा मिश्रा अनेक धारावाहिकों सहित हिंदी व भोजपुरी फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। उनका पूरा जीवन नौटंकी को समर्पित है।
हर पल मेरे साथ है बनारस
संगीत नाटक अकादमी का प्रतिष्ठित सफदर हाशमी पुरस्कार की घोषणा के बाद विपुल कृष्ण नागर ने भी अपनी खुशियां साझा कीं। विपुल ने कहा कि रंगमंच की दुनिया से शुरूआत करके छोटे पर्दे की यात्रा यादगार रही। यह सम्मान मुझे नहीं मेरी काशी को मिला है। अभिनय यात्रा में बनारस हर पल मेरे साथ रहा। बनारस की ही देन है जो आज मैं हूं। इसलिए यह सम्मान मेरे बनारस को समर्पित है। बता दें कि विपुल कृष्ण नागर की नाट्य यात्रा तीन साल की आयु से आरंभ हुई थी। वर्तमान में वह मुंबई में रह रहे हैं।
संगीत का साधना का परिणाम है सम्मान
शहनाई की तान से हर दिल को सुकून पहुंचाने वाले शहनाई वादक फतेह अली खां को पुरस्कार की घोषणा से संगीतकारों में खुशी की लहर है। बनारस शहनाई घराने से ताल्लुकात रखने वाले फतेह अली खां ने कहा कि यह खुदा का शुक्र और संगीत की साधना का परिणाम है जो मुझे यह सम्मान मिल रहा है। शहनाई ने मुझे सब कुछ दिया है। फतेह अली ने शहनाई का प्रशिक्षण अपने दादा उस्ताद अलाउद्दीन खां, भारत रत्न बिस्मिल्लाह खां और पिता प्यारे हुसैन खां से से लिया है।
गुरुओं का आशीर्वाद का है परिणाम
कथक नर्तक विशाल कृष्णा ने संगीत अकादमी की घोषणा पर प्रसन्नता जताई। विशाल कृष्णा ने कहा कि यह मेरे गुरुओं के आशीर्वाद और संगीत साधना का फल है। विशाल ने कहा कि संगीत नाटक अकादमी ने उनकी कला को सम्मान दिया है। बता दें कि इससे पहले विशाल को पं. बिरजू महाराज संगीत समृद्धि सम्मान, बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार, शृंगार मणि और कला विभूति सम्मान मिल चुके हैं। विशाल ने अपने कथक प्रशिक्षण की शुरूआत अपनी दादी कथक क्वीन सितारा देवी से की थी।