वाराणसी: एआई, तकनीक और वैश्विक चुनौतियों के बीच पाठ्यक्रम बदलने की जरूरत; प्रणेता 2026 कार्यक्रम का समापन
जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ के ‘प्रणेता 2026’ कार्यक्रम का समापन हुआ। इसमें एआई, आधुनिक तकनीक और वैश्विक चुनौतियों के बीच शिक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि बदलते दौर में प्रबंधन शिक्षा को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना जरूरी है, ताकि विद्यार्थी भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।
विस्तार
काशी में जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ के ‘प्रणेता 2026’ कार्यक्रम का समापन हो गया। कैंटोनमेंट के रेडिसन होटल में मंगलवार को तकनीकी और एआई के साथ पाठ्यक्रम बदलने की जरूरत को स्वीकार किया गया।
इसमें बीएचयू के कुलपति सहित काशी और आसपास के 22 संस्थानों के 20 प्राचार्यों और प्रधानाचार्यों को एक साथ जोड़कर शैक्षणिक सहयोग को बेजोड़ बनाने पर एक सहमति बनी। ‘जयपुरिया हायर एजुकेशन लीडरशिप समिट - प्रणेता 2026’ में कई एकेडमिक लीडर्स ने अपने विचार साझा किए।
बीएचयू सहित कई प्रोफेसरों की दो पैनल चर्चा में यह बात उठी कि तकनीकी प्रगति और वैश्विक चुनौतियों के अनुसार संस्थान अपने कोर्स में बदलाव ला सकते हैं। लर्निंग को उद्योग की बदलती जरूरतों और छात्रों की रोजगार क्षमता के अनुसार ढाला जा सकता है।
विचार-विमर्श
मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। व्यवस्थित सहयोग से ज्ञान-अनुभव को एक-दूसरे से साझा करना होगा। बदलती शैक्षणिक और सामाजिक जरूरतों के बीच जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ ऐसे कनेक्टेड इको सिस्टम के निर्माण में बड़ी भूमिका निभा रहा है, जहां सामूहिक सोच संस्थानों को मजबूत बनाने और छात्रों को लर्निंग के बेहतर अवसर देने में मदद करती है।
जयपुरिया लखनऊ कॉलेज डीन (एकेडमिक्स) डॉ. हेमेंद्र गुप्ता ने कहा, उच्च शिक्षा का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि संस्थान कैसे साझा सीख को समुदायों के लिए अनुकूल परिणामों में बदल सकते हैं।
शिक्षण और शैक्षणिक नेतृत्व पर बातचीत
इस यात्रा में शिक्षकों को सम्मानित करना भी है, क्योंकि उनका विकास ही शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता को तय करता है। पहली पैनल चर्चा, 'अगले दशक के लिए उच्च शिक्षा की नई परिकल्पना' का संचालन जयपुरिया की प्रोफेसर डॉ. गुप्ता ने किया।
दूसरी चर्चा, 'सहयोग के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार संस्थानों का निर्माण' का संचालन चेयरपर्सन डॉ. शालिनी सिंह ने किया। इसके बाद फैकल्टी सदस्यों को शिक्षण और शैक्षणिक नेतृत्व में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस दाैरान कार्यक्रम में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट अवध किशोर त्रिपाठी भी माैजूद रहे।