बैकफुट पर प्रशासन: गंगा घाट पर कर्मकांड कराने वाले पंडा समाज से नहीं लिया जाएगा शुल्क- नीलकंठ तिवारी
गंगा घाट पर धार्मिक अनुष्ठान पर टैक्स का विरोध शुरू होते ही प्रशासन भी बैकफुट पर आ गया है। वाराणसी नगर निगम द्वारा गंगा घाट पर परंपरागत तरीके से पूजा पाठ, धार्मिक कार्य एवं कर्मकांड कराने वाले पंडा समाज को शुल्क देने के मामले में राहत मिल गई है।
धर्मार्थ कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉक्टर नीलकंठ तिवारी ने कहा है कि उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। उनसे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। मंत्री ने नगर निगम की घोषणा के बाद मामले का संज्ञान लेते हुए कमिश्नर एवं नगर आयुक्त से बात की।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि गंगा के घाटों पर परंपरागत तरीके से पूजा-पाठ, धार्मिक कार्य एवं कर्मकांड कराने वाले पंडा समाज के लोग अपनी इच्छानुसार रजिस्ट्रेशन कराएं अन्यथा इसके लिए भी कोई बाध्यता नहीं होगी। राज्य मंत्री ने कहा है कि गंगा के घाटों पर परंपरागत तरीके से पूजा-पाठ, धार्मिक कार्य एवं कर्मकांड कराने वाले पंडा समाज को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, उनसे कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा।
गौरतलब है कि गंगा घाटों पर गंगा आरती के लिए आयोजकों से सालाना और गंगा घाटों पर परंपरागत तरीके से पूजा पाठ कराने, धार्मिक कार्य एवं कर्मकांड कराने वाले तीर्थ पुरोहित और ब्राह्मïणों से नगर निगम द्वारा शुल्क लिए जाने की घोषणा की गई थी। इसका संज्ञान लेते हुए राज्य मंत्री ने कमिश्नर दीपक अग्रवाल एवं नगर आयुक्त गौरांग राठी से फोन पर बातचीत कर इसे अव्यवहारिक बताते हुए इस पर तत्काल रोक लगाए जाने को कहा है।
मंत्री ने कहा कि काशी एक धार्मिक नगरी है, पूरी दुनिया से लोग यहां पर आकर गंगा के घाटों पर पूजन पाठ एवं धार्मिक कार्य के साथ-साथ कर्मकांड कराते हैं। ऐसी स्थिति में पंडो से शुल्क लिया जाना कतई व्यवहारिक नहीं है।