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Varanasi Monsoon: वाराणसी में मानसून की दस्तक के साथ मौसम ने ली करवट, 5 डिग्री सेल्सियस गिरा पारा
Thu, 27 Jun 2024 12:26 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Thu, 27 Jun 2024 12:26 PM IST
सार
वाराणसी में बारिश के साथ मौसम ने करवट ले लिया है। मानसून की पहली बारिश के बाद बीएचयू मौसम विभाग ने 41.4 मिलीमीटर तो केंद्रीय जल आयोग ने 95 मिलीमीटर बारिश दर्ज की।
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Rain
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वाराणसी जिले में गरज-चमक के साथ बारिश के साथ ही मानसून ने दस्तक दे दी। मंगलवार को रात भर बारिश रुक- रुककर होती रही। केंद्रीय जल आयोग ने जिले में 95 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड किया है, वहीं बीएचयू मौसम विभाग ने 41.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की है। बारिश के कारण अधिकतम तापमान में भी पांच डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई।
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बुधवार को तामपान 36.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मंगलवार को तापमान 41.4 डिग्री सेल्सियस था। न्यूनतम तापमान औसत से 1.9 डिग्री कम होकर 25.2 रिकॉर्ड किया गया। बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि मानसून के दस्तक के बाद इस सप्ताह फिलहाल बारिश होते रहने के आसार हैं। तापमान में भी कमी देखने को मिल सकती है।
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पिछले साल भी 25 जून को आया था मानसून
वाराणसी में सोनभद्र के रास्ते मानसून की दस्तक होती है। इस बार मानसून सोनभद्र में तो 22 जून को ही आ गया था लेकिन इसकी सक्रियता कम हो गई थी। फिलहाल मानसून की दस्तक 25 जून को वाराणसी में हुई है। पिछले साल भी मानसून ने 25 जून को दस्तक दी थी। 2022 में 22 जून को ही मानसून की पहली बारिश हुई थी।
मोटे अनाज व दलहन की बोआई व नर्सरी में आई तेजी
वाराणसी। बारिश के बाद किसानों ने खेतों की ओर रुख किया और धान की नर्सरी डाली। साथ ही दलहनी फसलों की बुआई भी शुरू हो गई। सब्जियों के लिए भी यह बारिश फायदेमंद है। किसान अभी तक केवल मोटे अनाजों और दलहन की बुआई शुरू नहीं कर पाए थे।
चिरईगांव के छितौना के किसान भृगुनाथ यादव और मुस्तफाबाद के राघवेंद्र सिंह ने बताया कि अब खेती के काम में तेजी आएगी। कृषि विशेषज्ञ देवमणि त्रिपाठी ने बताया कि किसान अभी हरे चारे के लिए ज्वार व बाजरा की बुआई कर सकते हैं। साथ ही उड़द और दलहनी फसलों में अगेती अरहर की भी बुआई कर सकते हैं।
मोटे अनाज व दलहन की बोआई व नर्सरी में आई तेजी
वाराणसी। बारिश के बाद किसानों ने खेतों की ओर रुख किया और धान की नर्सरी डाली। साथ ही दलहनी फसलों की बुआई भी शुरू हो गई। सब्जियों के लिए भी यह बारिश फायदेमंद है। किसान अभी तक केवल मोटे अनाजों और दलहन की बुआई शुरू नहीं कर पाए थे।
चिरईगांव के छितौना के किसान भृगुनाथ यादव और मुस्तफाबाद के राघवेंद्र सिंह ने बताया कि अब खेती के काम में तेजी आएगी। कृषि विशेषज्ञ देवमणि त्रिपाठी ने बताया कि किसान अभी हरे चारे के लिए ज्वार व बाजरा की बुआई कर सकते हैं। साथ ही उड़द और दलहनी फसलों में अगेती अरहर की भी बुआई कर सकते हैं।