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बड़ा गणेश के दर से निराश लौटे श्रद्धालु, नहीं खुला कपाट
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वाराणसी। प्रशासन की ओर से शहर में मंदिरों को खोलने की अनुमति तो दे दी गई है बावजूद इसके बुधवार को कई मंदिरों से श्रद्धालुओं को निराश लौटना पड़ा। लोहटिया स्थित बड़ा गणेश मंदिर में सुबह से ही दर्शनार्थियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था लेकिन मंदिर का कपाट बंद रहा।
बुधवार को भगवान गणेश का दिन होने के कारण सुबह से ही लोहटिया स्थित बड़ा गणेश मंदिर के बाहर फूल-माला और मिठाई की दुकानें सज गईं। मंगला आरती के बाद भी जब मंदिर का कपाट नहीं खुला तो श्रद्धालुओं ने दरवाजा खटखटाया तो उन्हें बताया गया कि मंदिर अभी नहीं खुलेगा। इससे श्रद्धालुओं ने मंदिर के द्वार पर ही दूर्वा, फूल और प्रसाद चढ़ाकर प्रणाम किया।
वहीं संकटा जी का मंदिर सुबह छह बजे दर्शनार्थियों के लिए खुल गया लेकिन आम दर्शनार्थियों की लापरवाही देखने को मिली। मंदिर की ओर से हैंड सैनिटाइजेशन का इंतजाम किए जाने के बावजूद कई श्रद्धालु बिना हैंड सैनिटाइजेशन और जूता-चप्पल उतारे ही मंदिर परिसर में प्रवेश कर गए। इसकी जानकारी जब मंदिर के पुजारी गोविंद को हुई तो उन्होंने मंदिर के द्वार पर सख्ती शुरू कर दी। पुजारी गोविंद ने बताया कि मंदिर 25 मार्च से बंद था।
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वहीं आत्मवीरेश्वर महादेव मंदिर का द्वार भी भक्तों के लिए खोल दिया गया। मंदिर के पुजारी द्वारा हर आने-जाने वाले को हाथ धोकर और हैंड सैनिटाइजेशन के बाद ही मंदिर में प्रवेश करने को कहा जा रहा था। वहीं बगल में स्थित पीतांबरा देवी के मंदिर के कपाट नहीं खुले। दशाश्वमेध घाट स्थित बृहस्पति मंदिर को भी सुबह थोड़ी देर के लिए खोला गया और फिर बंद कर दिया गया। श्रद्धालु नीचे दरवाजे से ही दर्शन करके वापस लौट गए।
सारनाथ स्थित सारंगनाथ महादेव मंदिर भी खुला। मंदिर खुलते ही श्रद्धालु सारंगनाथ महादेव मंदिर दर्शन पूजन करने पहुंचने लगे। महंत मनीष उपाध्याय ने बताया कि कोरोना वायरस की महामारी के चलते मंदिर बंद कर दिया गया था। बुधवार की सुबह आरती के बाद मंदिर को दर्शन के लिए खोल दिया गया। यहां दर्शन करने आने वाले भक्तों को मास्क, व हाथ साफ करके ही मंदिर में प्रवेश मिलेगा। मंदिर में दूरी बनाने के लिए गोला बनाया गया है।
शहर में कई मंदिरों को खोलने की अनुमति प्रशासन ने भले ही दे दी हो लेकिन हर जगह इंतजाम पूरे नहीं है। कहीं थर्मल स्कैनिंग का इंतजाम नहीं है तो कहीं हैंड सैनिटाइजेशन का। इसके कारण बुधवार को कई मंदिरों ने कपाट खोलना उचित नहीं समझा। वहीं संकटमोचन मंदिर, कालभैरव मंदिर, मणि मंदिर सहित कई बड़े मंदिर प्रबंधन ने कोरोना संक्रमण की तेज रफ्तार को देखते हुए फिलहाल मंदिर खोलने पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को अन्नपूर्णा मंदिर का जायजा लिया। नोडल अधिकारी डॉ. संजय राय ने मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी, शंकर पुरी और पं. रामनारायण द्विवेदी के साथ बैठक कर व्यवस्था के बारे में जानकारी दी। नोडल अधिकारी ने बताया कि मंदिर के प्रवेश द्वार पर स्वाचलित सेंसर युक्त सैनिटाइजर मशीन लगी थी। दर्शनार्थियों की थर्मल स्कैनिंग की जा रही थी। सुरक्षाकर्मी भी फेस शील्ड व मास्क पहनकर ड्यूटी कर रहे थे। उन्होंने मंदिर के प्रवेश द्वार और अन्य जगहों पर जागरूकता के लिए बैनर व पोस्टर लगाने की सलाह दी।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में बुधवार को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ रुद्राभिषेक किया गया। पुजारियों ने संकल्प दिलाकर सीधे जल और दूध शिवलिंग पर अर्पित कर दिया। न तो श्रृंगी से जलाभिषेक हुआ न ही दुग्धाभिषेक। वहीं पुजारियों को निर्देश दिया गया था कि वह श्रद्धालुओं से रोरी, रक्षा, कपूर का स्पर्श नहीं कराएंगे। वहीं श्रद्धालुओं की भीड़ बेहद सामान्य रही।
कोरोना महामारी के कारण ढाई महीने से बंद बाबा कीनाराम स्थल भी बुधवार को खुल गया। अघोरपीठ केखुलने की सूचना मिलते ही दर्शनार्थी भी सुबह से पहुंचने लगे थे। श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए मंदिर में प्रवेश दिया गया।
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बुधवार को भगवान गणेश का दिन होने के कारण सुबह से ही लोहटिया स्थित बड़ा गणेश मंदिर के बाहर फूल-माला और मिठाई की दुकानें सज गईं। मंगला आरती के बाद भी जब मंदिर का कपाट नहीं खुला तो श्रद्धालुओं ने दरवाजा खटखटाया तो उन्हें बताया गया कि मंदिर अभी नहीं खुलेगा। इससे श्रद्धालुओं ने मंदिर के द्वार पर ही दूर्वा, फूल और प्रसाद चढ़ाकर प्रणाम किया।
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वहीं संकटा जी का मंदिर सुबह छह बजे दर्शनार्थियों के लिए खुल गया लेकिन आम दर्शनार्थियों की लापरवाही देखने को मिली। मंदिर की ओर से हैंड सैनिटाइजेशन का इंतजाम किए जाने के बावजूद कई श्रद्धालु बिना हैंड सैनिटाइजेशन और जूता-चप्पल उतारे ही मंदिर परिसर में प्रवेश कर गए। इसकी जानकारी जब मंदिर के पुजारी गोविंद को हुई तो उन्होंने मंदिर के द्वार पर सख्ती शुरू कर दी। पुजारी गोविंद ने बताया कि मंदिर 25 मार्च से बंद था।
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वहीं आत्मवीरेश्वर महादेव मंदिर का द्वार भी भक्तों के लिए खोल दिया गया। मंदिर के पुजारी द्वारा हर आने-जाने वाले को हाथ धोकर और हैंड सैनिटाइजेशन के बाद ही मंदिर में प्रवेश करने को कहा जा रहा था। वहीं बगल में स्थित पीतांबरा देवी के मंदिर के कपाट नहीं खुले। दशाश्वमेध घाट स्थित बृहस्पति मंदिर को भी सुबह थोड़ी देर के लिए खोला गया और फिर बंद कर दिया गया। श्रद्धालु नीचे दरवाजे से ही दर्शन करके वापस लौट गए।
सारनाथ स्थित सारंगनाथ महादेव मंदिर भी खुला। मंदिर खुलते ही श्रद्धालु सारंगनाथ महादेव मंदिर दर्शन पूजन करने पहुंचने लगे। महंत मनीष उपाध्याय ने बताया कि कोरोना वायरस की महामारी के चलते मंदिर बंद कर दिया गया था। बुधवार की सुबह आरती के बाद मंदिर को दर्शन के लिए खोल दिया गया। यहां दर्शन करने आने वाले भक्तों को मास्क, व हाथ साफ करके ही मंदिर में प्रवेश मिलेगा। मंदिर में दूरी बनाने के लिए गोला बनाया गया है।
शहर में कई मंदिरों को खोलने की अनुमति प्रशासन ने भले ही दे दी हो लेकिन हर जगह इंतजाम पूरे नहीं है। कहीं थर्मल स्कैनिंग का इंतजाम नहीं है तो कहीं हैंड सैनिटाइजेशन का। इसके कारण बुधवार को कई मंदिरों ने कपाट खोलना उचित नहीं समझा। वहीं संकटमोचन मंदिर, कालभैरव मंदिर, मणि मंदिर सहित कई बड़े मंदिर प्रबंधन ने कोरोना संक्रमण की तेज रफ्तार को देखते हुए फिलहाल मंदिर खोलने पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को अन्नपूर्णा मंदिर का जायजा लिया। नोडल अधिकारी डॉ. संजय राय ने मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी, शंकर पुरी और पं. रामनारायण द्विवेदी के साथ बैठक कर व्यवस्था के बारे में जानकारी दी। नोडल अधिकारी ने बताया कि मंदिर के प्रवेश द्वार पर स्वाचलित सेंसर युक्त सैनिटाइजर मशीन लगी थी। दर्शनार्थियों की थर्मल स्कैनिंग की जा रही थी। सुरक्षाकर्मी भी फेस शील्ड व मास्क पहनकर ड्यूटी कर रहे थे। उन्होंने मंदिर के प्रवेश द्वार और अन्य जगहों पर जागरूकता के लिए बैनर व पोस्टर लगाने की सलाह दी।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में बुधवार को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ रुद्राभिषेक किया गया। पुजारियों ने संकल्प दिलाकर सीधे जल और दूध शिवलिंग पर अर्पित कर दिया। न तो श्रृंगी से जलाभिषेक हुआ न ही दुग्धाभिषेक। वहीं पुजारियों को निर्देश दिया गया था कि वह श्रद्धालुओं से रोरी, रक्षा, कपूर का स्पर्श नहीं कराएंगे। वहीं श्रद्धालुओं की भीड़ बेहद सामान्य रही।
कोरोना महामारी के कारण ढाई महीने से बंद बाबा कीनाराम स्थल भी बुधवार को खुल गया। अघोरपीठ केखुलने की सूचना मिलते ही दर्शनार्थी भी सुबह से पहुंचने लगे थे। श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए मंदिर में प्रवेश दिया गया।