फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   varanasi jain daslakshan mahaparv

सज्जनता और सौम्यता के रास्ते पर ले जाती है दिल से मांगी क्षमा

Fri, 04 Sep 2020 12:48 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2020 12:48 AM IST
विज्ञापन
varanasi jain daslakshan mahaparv
क्षमा पर्व का पावन दिन है, भव्य भावना का त्योहार। विगत वर्ष की सारी भूलें, देना हमारी आप बिसार।। दिल से मांगी गई क्षमा हमें सज्जनता और सौम्यता के रास्ते पर ले जाती है। आइए इस क्षमा पर्व पर हम अपने मन में क्षमा भाव का दीपक जलाएं उसे कभी बुझने न दें ताकि क्षमा का मार्ग अपनाते हुए धर्म के रास्ते पर चल सकें। आत्मशुद्धि के पावन पर्व के दिन जैन धर्मावलंबियों ने दशलक्षण महापर्व के समापन पर इसी संकल्प के साथ एक दूसरे से क्षमा मांगी।
विज्ञापन

कोरोना संक्रमण के कारण सार्वजनिक आयोजन निरस्त रहे। बृहस्पतिवार को कोरोना संक्रमण के कारण क्षमावाणी महापर्व पर ऑनलाइन क्षमा मांगी गई। फोन, मोबाइल संदेश और वीडियो कॉलिंग के जरिए वर्ष भर की गई गलतियों के लिए एक दूसरे से क्षमा मांगी। जैन धर्म के सातवें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ की जन्मस्थली स्थित भदैनी जी दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र में क्षमावाणी पर्व मनाया गया। प्रात 8 बजे भगवान का 108 कलशों से जलाभिषेक हुआ। इसके बाद वृहद शांतिधारा और विशेष पूजन संपन्न हुआ। जैन धर्मावलंबियों ने पूरे विश्व से कोरोना के खात्मे की कामना की। शाम को भगवान के चरणों का अभिषेक पूजन केबाद आरती उतारी गई। इस सुरेंद्र कुमार जैन, आनंद जी जैन, सुनील, संजय, आकाश जैन, सुमित जैन, बीके जैन, आरती, मंजुला, मनोरमा, लता, बीना आदि मौजूद रहीं।
विज्ञापन

कश्मीर में बने अहिंसा स्थली
श्री दिगंबर जैन महासमिति के महामंत्री राकेश जैन ने बताया कि कोरोना के कारण सामूहिक रूप से क्षमा पर्व नहीं मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैन समाज का प्रतिनिधिमंडल जम्मू कश्मीर में अहिंसा स्थली बनाने केलिए जल्द ही कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा से भेंट करेगा। कहा कि अगर केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में अहिंसा स्थली बनाती है तो पूरे विश्व को सकारात्मक संदेश जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

विजयी को मिलता है हारने वाले के पैर छूने का अधिकार
दिगंबर जैन समाज के राजेश जैन ने बताया कि क्षमावाणी पर्व अनूठे अंदाज में मनाया जाता है। पिछले साल के आयोजन की यादें आज भी जेहन में ताजा हैं। सभी पुरुष एकत्र होकर क्षमावाणी की तैयारी करते थे। अपने-अपने कुर्ते उतारकर बैठ जाते और अपने-अपने लक्ष्य को पहले से देखकर मन ही मन तय कर लेते कि किसको किससे भिड़ना है। जैसे ही संकेत होता, लोग उठकर एक दूसरे से भिड़ जाते। उस समय अगर कोई बाहरी व्यक्ति देखे तो घबरा जाए कि यह क्या हो रहा है। सभी संभ्रांत लोग आपस में इतनी जोर शोर से क्यों लड़ रहे हैं लेकिन थोड़ी देर में सारा माजरा समझ में आ जाता है। इस कुश्ती में एक दूसरे के पैरों पर गिरने की आजमाइश होती है। जो इसमें विजयी होता है उसे हारने वाले के पैर छूने का अधिकार मिलता है। यहां बड़े छोटे का कोई भेद नहीं होता है। बस जो जीता वही विनयी। वही क्षमावान।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed