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वाराणसी: डॉ. डीपी सिंह ने बढ़ाया मान, लगातार चौथी बार दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल
Tue, 13 Oct 2026 04:50 PM IST
किशन चौबे
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: किशन चौबे
Updated Tue, 13 Oct 2026 04:50 PM IST
सार
भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डीपी सिंह को स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की 2026 की सूची में लगातार चौथे वर्ष दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल किया गया है। उन्हें पौध जीव विज्ञान, सूक्ष्मजीव जैवप्रौद्योगिकी और पौध-सूक्ष्मजीव संबंधों पर शोध के लिए यह पहचान मिली है।
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डॉ. डीपी सिंह, आईआईवीआर वाराणसी, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय, दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डीपी सिंह को वर्ष 2026 में लगातार चौथे साल दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किया गया है। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की ओर से जारी इस सूची में उन्हें पौध जीव विज्ञान, सूक्ष्मजीव जैवप्रौद्योगिकी और पौध-सूक्ष्मजीव संबंधों के क्षेत्र में उनके शोध कार्यों के लिए स्थान मिला है।
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डॉ. सिंह का शोध मुख्य रूप से यह समझने पर केंद्रित है कि जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के दौरान पौधे किस तरह प्रतिक्रिया करते हैं। इसके लिए उन्होंने मेटाबोलॉमिक्स और प्रोटिओमिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया। इन तकनीकों की मदद से पौधों में होने वाले जैविक बदलावों और उनसे जुड़े विभिन्न यौगिकों का अध्ययन किया जाता है।
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शोध के दौरान पहचाने गए कुछ उपयोगी यौगिकों को बायोस्टिमुलेंट उत्पादों के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया गया। ऐसे उत्पादों का उद्देश्य पौधों की वृद्धि और विकास में मदद करना है। इस तरह वैज्ञानिक शोध को किसानों के लिए उपयोगी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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डॉ. डीपी सिंह लगातार चौथी बार दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल
- फोटो : Amar Ujala
आधुनिक तकनीकों से सब्जी उत्पादन को बेहतर बनाने पर जोर
आईआईवीआर के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने डॉ. डीपी सिंह की उपलब्धि पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि संस्थान के वैज्ञानिक आधुनिक तकनीकों की मदद से सब्जी फसलों को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। संस्थान का प्रयास है कि सब्जी उत्पादन और पौध संरक्षण से जुड़े शोध के परिणाम किसानों तक पहुंचें, ताकि उन्हें खेती में इसका लाभ मिल सके।
स्कोपस के आंकड़ों के आधार पर तैयार होती है सूची
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और एल्सेवियर की ओर से प्रतिवर्ष दुनिया के प्रमुख वैज्ञानिकों की सूची जारी की जाती है। इसे तैयार करने में स्कोपस डेटाबेस में उपलब्ध शोध प्रकाशनों और उद्धरणों से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें वैज्ञानिकों के शोध कार्यों के प्रभाव का आकलन करने के लिए मानकीकृत मानकों को आधार बनाया जाता है। यह सूची विभिन्न वैज्ञानिक विषयों के शोधकर्ताओं को शामिल करती है।
डॉ. डीपी सिंह का लगातार चौथे वर्ष इस सूची में स्थान पाना उनके शोध कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान को दर्शाता है। साथ ही, यह उपलब्धि पौध जैवप्रौद्योगिकी और सब्जी फसलों से जुड़े अनुसंधान के महत्व को भी रेखांकित करती है।
आईआईवीआर के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने डॉ. डीपी सिंह की उपलब्धि पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि संस्थान के वैज्ञानिक आधुनिक तकनीकों की मदद से सब्जी फसलों को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। संस्थान का प्रयास है कि सब्जी उत्पादन और पौध संरक्षण से जुड़े शोध के परिणाम किसानों तक पहुंचें, ताकि उन्हें खेती में इसका लाभ मिल सके।
स्कोपस के आंकड़ों के आधार पर तैयार होती है सूची
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और एल्सेवियर की ओर से प्रतिवर्ष दुनिया के प्रमुख वैज्ञानिकों की सूची जारी की जाती है। इसे तैयार करने में स्कोपस डेटाबेस में उपलब्ध शोध प्रकाशनों और उद्धरणों से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें वैज्ञानिकों के शोध कार्यों के प्रभाव का आकलन करने के लिए मानकीकृत मानकों को आधार बनाया जाता है। यह सूची विभिन्न वैज्ञानिक विषयों के शोधकर्ताओं को शामिल करती है।
डॉ. डीपी सिंह का लगातार चौथे वर्ष इस सूची में स्थान पाना उनके शोध कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान को दर्शाता है। साथ ही, यह उपलब्धि पौध जैवप्रौद्योगिकी और सब्जी फसलों से जुड़े अनुसंधान के महत्व को भी रेखांकित करती है।