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वैराग्य से नहीं बल्कि समाज का हिस्सा बनकर करें भलाई का काम
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वाराणसी। आइएएस एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार देर शाम को जग्गी वासुदेव से मुखातिब हुआ। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुए संवाद में जग्गी वासुदेव ने कहा, आईएएस बनने के बाद समाज का हित आप लोगों पर निर्भर है। मगर आईएएस एकेडमी के मूलमंत्र योग: कर्मेशु कौशलम का मंत्र सदैव आपको ऊर्जा देता है।
देश के सात आइएएस अफसरों पैनलिस्ट में शामिल वाराणसी के जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने भी सवाल किया। जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने पूछा कि कई बार काम का प्रचार किया जाता है। इससे हमारे कर्मों पर क्या असर पड़ता है। इस पर जग्गी वासुदेव ने कहा कि वैराग्य या संन्यास लेकर काम करने की बजाय समाज का हिस्सा बनकर उसका हित करें। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण का उदाहरण दिया कि महाभारत में वे इन्वाल्व रहे, मगर इसका खुद के लिए कोई लाभ नहीं सोचा। जब समाज के हित में निर्णय लिए जाए तो उसमें एक तरह का सिद्धांत आवश्यक है। परिस्थिति के हिसाब से बदलाव नहीं होना चाहिए। ब्रह्मांड में बहुत ऊर्जा है और योग आदि के जरिये इसे प्राप्त करें।
संविधान और कानून के हिसाब से निर्णय में मानवता आड़े आने के सवाल पर जग्गी ने कहा कि नियमों का पालन ही सर्वोपरि है और जहां नियम ठीक न लगे तो वहां आवाज उठाकर उसमे बदलाव कराएं। शारीरिक और मानसिक योग के साथ आत्म विश्लेषण आवश्यक है। आपका कर्म नियम कायदे से बंधा हुआ है।
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देश के सात आइएएस अफसरों पैनलिस्ट में शामिल वाराणसी के जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने भी सवाल किया। जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने पूछा कि कई बार काम का प्रचार किया जाता है। इससे हमारे कर्मों पर क्या असर पड़ता है। इस पर जग्गी वासुदेव ने कहा कि वैराग्य या संन्यास लेकर काम करने की बजाय समाज का हिस्सा बनकर उसका हित करें। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण का उदाहरण दिया कि महाभारत में वे इन्वाल्व रहे, मगर इसका खुद के लिए कोई लाभ नहीं सोचा। जब समाज के हित में निर्णय लिए जाए तो उसमें एक तरह का सिद्धांत आवश्यक है। परिस्थिति के हिसाब से बदलाव नहीं होना चाहिए। ब्रह्मांड में बहुत ऊर्जा है और योग आदि के जरिये इसे प्राप्त करें।
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संविधान और कानून के हिसाब से निर्णय में मानवता आड़े आने के सवाल पर जग्गी ने कहा कि नियमों का पालन ही सर्वोपरि है और जहां नियम ठीक न लगे तो वहां आवाज उठाकर उसमे बदलाव कराएं। शारीरिक और मानसिक योग के साथ आत्म विश्लेषण आवश्यक है। आपका कर्म नियम कायदे से बंधा हुआ है।
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