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मुंशी प्रेमचंद के गांव के बहुरेंगे दिन, वाराणसी के डीएम ने लमही को गोद लेने की घोषणा की

Wed, 31 Jul 2019 04:35 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: Sayali Maurya Updated Wed, 31 Jul 2019 04:35 PM IST
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Varanasi DM Adopt mushi premchand village lamhi on his birth anniversary
लमही महोत्सव में शामिल होते डीएम - फोटो : अमर उजाला

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानियां तो विश्व प्रसिद्ध हैं, लेकिन मुंशी प्रेमचंद का गांव लमही अभी तक दुर्व्यवस्थाओं की भेंट चढ़ा हुआ था। मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर वाराणसी के जिलाधिकारी ने लमही गांव में नई जान फूंकने का काम किया है। 

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बुधवार को मुंशी प्रेमचंद की जयंती उनके पैतृक गांव में बड़े धूमधाम से मनाई जा रही है। मंगलवार से शुरू हुआ लमही महोत्सव गुरुवार को खत्म होगा।इसी बीच वाराणसी के डीएम सुरेंद्र सिंह ने मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही को लेकर एक दिल खुश करने वाली घोषणा की।
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वाराणसी के डीएम सुरेंद्र सिंह ने कहा कि वह मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही को गोद लेंगे। साथ ही गांव के विकास के लिए काम करेंगे। डीएम सुरेंद्र सिंह की इस घोषणा से लमही गांव के लोग काफी खुश हैं। डीएम ने यह भी कहा कि मान महल की तर्ज पर लमही को वर्चुअल म्यूजियम मिलेगा। वर्चुअल म्यूजियम की यह सौगात ग्रामीणों को अगले साल तक मिल जाएगी। 
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डीएम सुरेंद्र सिंह ने कहा कि जो साहित्यकार भारतीय संस्कृति में आस्था रखते हैं, अपने सुझाव और योगदान दें। उन्होंने कहा कि जहां की गलियों, खेत-खलिहानों और गांव के परिवेश से प्रेरणा लेकर मुंशी प्रेमचंद इतने महान लेखक बने और जीवन के विविध रूपों का वास्तविक चित्रण किया, उस लमही के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखा जाएगा। 
 

डीएम सुरेंद्र सिंह ने लमही को एक ऐसा पर्यटक स्थल बनाने की घोषणा की जहां पाठकों, दर्शकों व पर्यटकों का आना-जाना बना रहे। उन्होंने प्रतिबद्धता जाहिर की कि हमारी सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम स्मारक भवन को वृहद रूप देकर म्यूजियम के रूप में विकसित कर सकें। मुंशी प्रेमचंद की जन्म स्थली को विश्व पटल पर लाने का प्रयास किया जाएगा।

डीएम सुरेंद्र सिंह ने कहा कि आगामी लमही महोत्सव से पहले संस्कृति विभाग द्वारा एक बड़ा संग्रहालय बनाया जाएगा जिसका प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है। इस दौरान 'बड़ी परेशानी है भाई' हंस पब्लिकेशन की पुस्तक का विमोचन डीएम ने किया।

इसके साथ ही डीएम ने लमही के लेखपाल और सचिव को तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए आवश्यक निर्देश दिए। प्रोबेशनर आईएएस विक्रमादित्य सिंह मलिक को निर्देशित किया कि वहां के भवन पर रुफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने तथा सोखते गड्ढे और जल संरक्षण के समस्त कार्य कराने की पड़ताल कर लें।

हिचकोले खाते हुए लोग पहुंच रहे लमही महोत्सव

मुंशी प्रेमचंद का गांव लमही मूलभूत सुविधाओं से वंछित है। जिसका उदाहरण पांडेयपुर चौराहे से लमही स्मारक स्थल तक की सड़क है। पांडेयपुर से लमही प्रवेश द्वार के बीच कई जगह सड़क खोदकर छोड़ दी गई है। स्वच्छता का मजाक बना हुआ है।

मुंशी जी के आवास के पीछे व रामलीला मैदान की क्षतिग्रस्त सड़क पर बरसाती तथा घरों का गंदा पानी जमा है। इससे साफ है कि प्रेमचंद के पात्र लमही के ग्रामीण उसी दुर्दशा में जीवन गुजार रहे हैं। जिसे देखते हुए वाराणसी के डीएम ने इस गांव को गोद लेने का फैसला लिया है। 
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