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हौसले के सामने दिव्यंगता नतमस्तक: बनारस की आस्था ने बिस्तर पर लेट कर पूरी की पढ़ाई, बनीं ग्राफिक्स डिजाइनर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 29 Jan 2022 12:37 PM IST
आस्था।
आस्था। - फोटो : अमर उजाला
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दुनिया में सिर्फ एक ही विकलांगता है और वह है नकारात्मक सोच। इस बात को सच साबित कर न सिर्फ अपने लिए बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं काशी की आस्था। हौसले और हिम्मत से इन्होंने अपनी शारीरिक अक्षमता को कमजोरी नहीं बनने दी। जीवन के प्रति सकारात्मक सोच हम सबके लिए प्रेरणा का काम करेगी। कुछ ऐसी ही कहानी है रेवड़ी तालाब इलाके में रहने वाली 34 वर्षीय आस्था की। आस्था की शरीर की हड्डियां 100 जगहों से टूटी हैं।

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उनके 12 ऑपरेशन भी हो चुके हैं।  2002 में व्हीलचेयर के सहारे आस्था ने किसी तरह इंटर तो पास कर किया, लेकिन कुछ वक्त के बाद उनके शरीर ने जवाब दे दिया। 20 साल से वह बेड पर लेटकर सारे काम करती हैं। बावजूद जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण होने के कारण इन्होंने अपना हौसला नहीं छोड़ा। दूरस्थ शिक्षा के जरिये पढ़ाई जारी रखी।


कंप्यूटर के जरिये इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से डिग्री ली और आज एक ग्राफिक्स डिजाइनर के रूप में काम कर रही हैं। आस्था ने अपने इस हुनर को दूसरों तक पहुंचाने के लिए यूट्यूब चैनल खोला है। साथ ही लोगों को प्रशिक्षण दे रही हैं। यहीं नहीं बिस्तर पर लेटे हुए आस्था लावारिस पशुओं के संरक्षण के लिए भी काम कर रही हैं।

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