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स्वच्छता सर्वेः अभी से नहीं दिया ध्यान तो 'गंदी' हो जाएगी वाराणसी की रैंकिंग
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 19 Dec 2017 05:20 PM IST
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गत वर्ष स्वच्छता सर्वे में देश में 32वें और प्रदेश में पहले स्थान पर रहने वाली काशी स्वच्छता एप में पिछड़ती जा रही है। बनारस में स्वच्छता सर्वे की शुरुआत अगले वर्ष जनवरी से की जा रही है। पिछले साल सर्वे में सूबे में पहले स्थान पर आकर सम्मान पाने वाला शहर इस बार जद्दोजहद में है।
गंदगी और कूड़े की समस्या को दूर करने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था के तहत स्वच्छता एप में वाराणसी अब 17वें स्थान पर पहुंच गई है। वजह इस बार अब तक नगर निगम की ओर से 14193 एप ही डाउनलोड कराया जा सका है।
इस बार स्वच्छता सर्वे के लिए 4041 शहरों को चुना जाना है। इसे तीन वर्गों में बांटा गया है। एक लाख से कम आबादी वाले 1944 शहर, एक से 10 लाख की आबादी वाले 355 शहर और 10 लाख या इससे अधिक आबादी के 54 शहरों में स्वच्छता एप डाउनलोड कराया जा रहा है।
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इसमें वाराणसी फिलहाल देश में 17वें स्थान पर पहुांच गई है। जबकि सूबे मेें स्वच्छता एप में सुधार करते हुए कानपुर पहले, गाजियाबाद दूसरे, लखनऊ तीसरे और वाराणसी चौथे स्थान पर पहुंच गई है। इधर जनवरी में स्वच्छता सर्वे 2018 होने जा रहा है।
इसके लिए फिर से स्वच्छता एप डाउनलोड कराया जा रहा है। नगर स्वास्थ्य अधिकरी डॉ. पीके दूबे ने बताया कि इस साल 26 हजार स्वच्छता एप डाउनलोड कराए जाने है। अब तक 14 हजार से अधिक एप को डाउनलोड कराया जा चुका है। 30 दिसंबर तक निर्धारित लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा। ताकि अधिक से अधिक लोग इस एप से जुड़ सकें।
इस बार स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों की रैंकिंग तो होगी ही उन्हें एक से लेकर सेवेन स्टार का भी दर्जा मिलेगा। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने इस बार एक से लेकर सेवेन स्टार देने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य शहरों के बीच स्वच्छता प्रतियोगिता को बढ़ावा देना है ताकि शहरों सफाई व्यवस्था बेहतर हो।
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गंदगी और कूड़े की समस्या को दूर करने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था के तहत स्वच्छता एप में वाराणसी अब 17वें स्थान पर पहुंच गई है। वजह इस बार अब तक नगर निगम की ओर से 14193 एप ही डाउनलोड कराया जा सका है।
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इस बार स्वच्छता सर्वे के लिए 4041 शहरों को चुना जाना है। इसे तीन वर्गों में बांटा गया है। एक लाख से कम आबादी वाले 1944 शहर, एक से 10 लाख की आबादी वाले 355 शहर और 10 लाख या इससे अधिक आबादी के 54 शहरों में स्वच्छता एप डाउनलोड कराया जा रहा है।
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इसमें वाराणसी फिलहाल देश में 17वें स्थान पर पहुांच गई है। जबकि सूबे मेें स्वच्छता एप में सुधार करते हुए कानपुर पहले, गाजियाबाद दूसरे, लखनऊ तीसरे और वाराणसी चौथे स्थान पर पहुंच गई है। इधर जनवरी में स्वच्छता सर्वे 2018 होने जा रहा है।
इसके लिए फिर से स्वच्छता एप डाउनलोड कराया जा रहा है। नगर स्वास्थ्य अधिकरी डॉ. पीके दूबे ने बताया कि इस साल 26 हजार स्वच्छता एप डाउनलोड कराए जाने है। अब तक 14 हजार से अधिक एप को डाउनलोड कराया जा चुका है। 30 दिसंबर तक निर्धारित लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा। ताकि अधिक से अधिक लोग इस एप से जुड़ सकें।
इस बार स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों की रैंकिंग तो होगी ही उन्हें एक से लेकर सेवेन स्टार का भी दर्जा मिलेगा। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने इस बार एक से लेकर सेवेन स्टार देने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य शहरों के बीच स्वच्छता प्रतियोगिता को बढ़ावा देना है ताकि शहरों सफाई व्यवस्था बेहतर हो।
बनारस में कागज पर सफाई, सड़क पर कूड़ा
गली-मुहल्लों की स्थिति और खराब, रोजाना नहीं उठाया जाता कूड़ा
- फोटो : अमर उजाला
हर महीने साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद वाराणसी की सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं आ रहा है। नगर निगम प्रशासन का दावा है कि शहर के सभी 90 वार्डों में डोर टू डोर कूड़ा उठवाया जा रहा है और नियमित सफाई कराई जा रही है, वहीं हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
शहर का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले कैंट से मलदहिया, सिगरा, भेलूपुर जाइए या फिर गोदौलिया-दशाश्वमेध, कहीं भी हालात दुरुस्त नहीं हैं। जगह-जगह सड़क पर कूड़ा-गंदगी से लोग परेशान हैं। सार्वजनिक स्थलों से गंगा घाटों तक भी स्थितियां लगभग ऐसी ही है।
बाहर से आने वाले सैलानियों और तीर्थयात्रियों को रोजाना मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं। ये हालात तब हैं जब नगर निगम की ओर से स्वच्छता सर्वे के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया जा चुका है। प्रदेश में नंबर वन का ताज बरकरार रखने के साथ ही देश में शहर की रैंकिंग सुधारने की चुनौती सबके सामने है।
शहर की सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम के साथ ही तीन निजी एजेंसियां लगाई गई हैं लेकिन सुव्यवस्थित मॉनीटरिंग न होने से कागज पर तो सफाई हो जा रही है लेकिन सड़कों पर कूड़ा पड़ा रह जा रहा है।
शहर का कोई भी ऐसा इलाका नहीं, जहां समुचित रूप से कूड़ा उठाया जा रहा हो और नियमित सफाई कराई जा रही हो। शहर के भीतरी हिस्से में तो हालात और बदतर हैं। निजी एजेंसियों आईएलएफएस, कियाना सोल्यूसंश और इकोपाल के डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के दावे के बावजूद सफाई कर्मी घरों तक नहीं पहुंच रहे हैं।
नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने कहा कि वार्डों में कूड़ा निस्तारण डोर टू डोर कराया जा रहा है। कुछ इलाकों से शिकायत आ रही है कि वहां सफाई कर्मंचारी नहीं पहुंच पा रहे हैं, वहां जोनल अधिकारी के अलावा सफाई इंस्पेक्टरों, सुपरवाइजरों को ताकीद की गई है। अब लापरवाही मिली तो कार्रवाई भी की जाएगी।
शहर का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले कैंट से मलदहिया, सिगरा, भेलूपुर जाइए या फिर गोदौलिया-दशाश्वमेध, कहीं भी हालात दुरुस्त नहीं हैं। जगह-जगह सड़क पर कूड़ा-गंदगी से लोग परेशान हैं। सार्वजनिक स्थलों से गंगा घाटों तक भी स्थितियां लगभग ऐसी ही है।
बाहर से आने वाले सैलानियों और तीर्थयात्रियों को रोजाना मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं। ये हालात तब हैं जब नगर निगम की ओर से स्वच्छता सर्वे के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया जा चुका है। प्रदेश में नंबर वन का ताज बरकरार रखने के साथ ही देश में शहर की रैंकिंग सुधारने की चुनौती सबके सामने है।
शहर की सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम के साथ ही तीन निजी एजेंसियां लगाई गई हैं लेकिन सुव्यवस्थित मॉनीटरिंग न होने से कागज पर तो सफाई हो जा रही है लेकिन सड़कों पर कूड़ा पड़ा रह जा रहा है।
शहर का कोई भी ऐसा इलाका नहीं, जहां समुचित रूप से कूड़ा उठाया जा रहा हो और नियमित सफाई कराई जा रही हो। शहर के भीतरी हिस्से में तो हालात और बदतर हैं। निजी एजेंसियों आईएलएफएस, कियाना सोल्यूसंश और इकोपाल के डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के दावे के बावजूद सफाई कर्मी घरों तक नहीं पहुंच रहे हैं।
नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने कहा कि वार्डों में कूड़ा निस्तारण डोर टू डोर कराया जा रहा है। कुछ इलाकों से शिकायत आ रही है कि वहां सफाई कर्मंचारी नहीं पहुंच पा रहे हैं, वहां जोनल अधिकारी के अलावा सफाई इंस्पेक्टरों, सुपरवाइजरों को ताकीद की गई है। अब लापरवाही मिली तो कार्रवाई भी की जाएगी।
पिछली रैंकिंग को बरकार रखना और बेहतर करना आसान नहीं
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वाराणसी नगर निगम को स्वच्छता सर्वे में पिछली रैंकिंग को बरकरार रखने केसाथ ही उसमें सुधार करना चुनौती होगी। वजह, शहर में बिजली के तार और गैस पाइप लाइन बिछाने केचलते सड़कें खोदी जा रही है। वहीं गलियों और सड़कों किनारे फैले कचरे को भी समय से निस्तारित नहीं किया जा रहा है।
नगर निगम के संसाधन
रोजना शहर के निकलने वाला कूड़ा- 600 मीट्रिक टन
हर महीने सफाई व्यवस्था पर 4.50 करोड़
अधिकारियों, कर्मचारियों की संख्या-करीब 100
वर्तमान में नियमित कार्यरत सफाईकर्मी-1216
वर्तमान में संविदा सफाईकर्मी-1129
आउटसोर्सिंग पर सफाईकर्मी-395
नगर निगम के पास आठ जेसीबी एवं आठ कांपैक्टर, 27 डंपर, 20 ट्रैक्टर, 18 हापर एवं नए 25 हापर, 37 टाटा मैजिक उपलब्ध हैं।
नगर निगम के अलावा आईएलएफएस, कियाना सोल्यूसंस और इकोपाल को दी गई है डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की जिम्मेदारी
नगर निगम के संसाधन
रोजना शहर के निकलने वाला कूड़ा- 600 मीट्रिक टन
हर महीने सफाई व्यवस्था पर 4.50 करोड़
अधिकारियों, कर्मचारियों की संख्या-करीब 100
वर्तमान में नियमित कार्यरत सफाईकर्मी-1216
वर्तमान में संविदा सफाईकर्मी-1129
आउटसोर्सिंग पर सफाईकर्मी-395
नगर निगम के पास आठ जेसीबी एवं आठ कांपैक्टर, 27 डंपर, 20 ट्रैक्टर, 18 हापर एवं नए 25 हापर, 37 टाटा मैजिक उपलब्ध हैं।
नगर निगम के अलावा आईएलएफएस, कियाना सोल्यूसंस और इकोपाल को दी गई है डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की जिम्मेदारी