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वाराणसी: खुद को पुलिस कांस्टेबल बताकर लोन लेने का मामला, कोर्ट के आदेश की तिथि पूरी; प्राथमिकी दर्ज नहीं

Sun, 30 Aug 2026 12:46 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 30 Aug 2026 12:46 PM IST
सार

वाराणसी में खुद को पुलिस कांस्टेबल बताकर लोन लेने के मामले में कोर्ट के आदेश की निर्धारित अवधि पूरी हो गई, लेकिन अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि फर्जी पहचान के आधार पर लोन लिया गया। न्यायालय के आदेश के बावजूद पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं होने से मामला सवालों के घेरे में है।

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Varanasi Case of obtaining loan posing police constable court-ordered deadline expires FIR registered
वाराणसी कोर्ट। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

खुद को पुलिस कांस्टेबल बताकर बैंक ऑफ बड़ौदा की नीचीबाग शाखा से 10 लाख रुपये का पर्सनल लोन लेने के मामले में अदालत ने 14 अगस्त को प्राथमिकी दर्ज कर 15 दिनों में आख्या पेश करने को कहा था। अंतिम दिन तक मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। 

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बैंक प्रबंधन का आरोप है कि देवरिया निवासी त्रिगुना पर फर्जी दस्तावेज और पुलिस कर्मचारी कोड का इस्तेमाल कर बैंक को गुमराह करने का आरोप है। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कृष्ण कुमार की अदालत ने 14 अगस्त को प्रार्थनापत्र स्वीकार कर थाना चौक को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। 
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प्रार्थनापत्र के अनुसार, त्रिगुना ने 27 दिसंबर 2023 को पर्सनल लोन के लिए आवेदन किया था। आवेदन में उसने खुद को कांस्टेबल बताते हुए दस्तावेज और कर्मचारी कोड प्रस्तुत किया। बैंक की जांच में दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। सत्यापन कराने पर पुलिस विभाग में उसके कांस्टेबल पद पर नियुक्त होने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। 
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आरोप है कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर लोन स्वीकृत होने के बाद त्रिगुना ने कुछ किश्तों का भुगतान किया, लेकिन बाद में किस्तें जमा नहीं कीं। उसका ऋण खाता तीन जुलाई 2024 को एनपीए हो गया। मामले में पुलिस स्तर पर कराई गई जांच में भी उसके पुलिसकर्मी होने का दावा गलत पाया गया। वहीं, इस मामले में थाना प्रभारी दिलीप कुमार ने बताया कि इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। अधिवक्ता रजनीश मिश्रा ने बताया कि इस मामले पुलिस ने अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की है। 

प्रसूता की मौत के मामले में अस्पताल संचालक को जमानत
प्रसव के दौरान लापरवाही से प्रसूता की मौत के मामले में आरोपी अस्पताल संचालक को अदालत से राहत मिल गई। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सप्तम) प्रवीण कुमार की अदालत ने चौबेपुर निवासी अभय क्लिनिक मैटरनिटी होम के संचालक महेंद्र यादव को 25 हजार रुपये के एक जमानतदार और बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश दिया। 

अभियोजन के अनुसार, नेवादा, चौबेपुर निवासी मिथिलेश कुमार ने चौबेपुर थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि दो अगस्त 2026 को उसने अपनी 22 साल की पत्नी कंचन कुमारी को रुस्तमपुर चौधरी नगर के अभय क्लिनिक मैटरनिटी होम में प्रसव के लिए भर्ती कराया था। 

उपचार के दौरान ऑपरेशन से कंचन ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान संचालक महेंद्र यादव, सिजेरियन करने वाले चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ की कथित लापरवाही और असावधानी के चलते कंचन की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।  तीन अगस्त को अस्पताल संचालक समेत अन्य के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की थी।

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