फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Varanasi airport radar range reduced surveillance coverage drops from 46,000 to 25,000 feet.

बड़ा बदलाव: वाराणसी एयरपोर्ट के रडार की सीमा घटी, 46 हजार से 25 हजार फीट हुई निगरानी

Sat, 13 Jun 2026 04:23 PM IST
Pragati Chand अभिषेक मिश्र, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
अभिषेक मिश्र, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Sat, 13 Jun 2026 04:23 PM IST
सार

Varanasi News: नागरिक उड्डयन मंत्रालय के निर्देशों के तहत वाराणसी एयरपोर्ट के रडार की सीमा घटाई गई। रडार की निगरानी अब 46 हजार से 25 हजार फीट हो गई है।

विज्ञापन
Varanasi airport radar range reduced surveillance coverage drops from 46,000 to 25,000 feet.
लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हवाई यातायात लगातार बढ़ रहा है लेकिन एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) रडार की निगरानी सीमा 46 हजार फीट से घटाकर 25 हजार फीट कर दी गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के निर्देशों के तहत यह बदलाव किया गया है। इसके बाद 25 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर उड़ रहे विमानों की निगरानी मुख्य रूप से कोलकाता एटीसी के माध्यम से की जा रही है।

विज्ञापन


एयरपोर्ट के तकनीकी अधिकारियों के अनुसार रडार रेडियो तरंगों के माध्यम से उड़ने वाली वस्तुओं की स्थिति का पता लगाता है। इसकी विशेषता यह है कि यह विमान, हेलीकॉप्टर अथवा अन्य हवाई गतिविधियों की निगरानी करने में सक्षम होता है। 
विज्ञापन


इसे भी पढ़ें; सेहत से खिलवाड़: खुद की डॉक्टरी से जान को खतरा, बिना सलाह युवतियां खा रहीं गर्भपात की गोलियां; बढ़ रही समस्या 
विज्ञापन
विज्ञापन


अधिकारियों के अनुसार समुद्री क्षेत्रों से जुड़े हवाई क्षेत्रों में उच्च स्तर की निगरानी की आवश्यकता को देखते हुए कुछ एयरपोर्टों की रडार सीमा अधिक रखी  गई है। चूंकि वाराणसी एयरपोर्ट का किसी समुद्री क्षेत्र से सीधा संबंध नहीं है, इसलिए इसकी निगरानी सीमा कम की गई है। अब 25 हजार फीट तक उड़ान भरने वाले विमान वाराणसी एटीसी की निगरानी में रहते हैं, जबकि इससे अधिक ऊंचाई पर पहुंचने के बाद उनकी निगरानी संबंधित अन्य एटीसी इकाइयों, विशेष रूप से कोलकाता एटीसी, द्वारा की जाती है।  

बढ़ते हवाई दबाव के बीच भविष्य में बढ़ सकती है सीमा
वाराणसी एयरपोर्ट पूर्वांचल के साथ-साथ बिहार और आसपास के राज्यों के यात्रियों के लिए भी प्रमुख हवाई केंद्र बन चुका है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या बढ़ने से यहां हवाई यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। मौसम या तकनीकी कारणों से अन्य शहरों के लिए उड़ान भर रहे विमानों को भी कई बार वाराणसी एयरपोर्ट पर उतारा जाता है। ऐसे में भविष्य में बढ़ते हवाई यातायात को देखते हुए रडार सीमा बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।

टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान महत्वपूर्ण होती है रडार निगरानी
किसी भी एयरपोर्ट के आसपास का हवाई क्षेत्र सबसे संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि इसी क्षेत्र में विमान उड़ान भरते और उतरते हैं। ऐसे में टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान रडार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। रडार अपने दायरे में होने वाली गतिविधियों की निगरानी कर संभावित जोखिमों की समय रहते जानकारी उपलब्ध कराता है।

अधिकारी बोले
वाराणसी एयरपोर्ट के एटीसी रडार की सीमा पहले 46 हजार फीट थी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के नियमों और निर्देशों के तहत इसमें बदलाव किया गया है। हालांकि इससे संचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सभी एयरपोर्ट और एटीसी इकाइयां आपस में इंटरकनेक्टेड हैं, इसलिए विमानों की आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध होती रहती है।
-पुनीत गुप्ता, एयरपोर्ट निदेशक, वाराणसी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed