बेहद खराब स्तर पर पहुंचा बनारस का एयर क्वालिटी इंडेक्स, स्मॉग ने बढ़ाई सांस के मरीजों की परेशानी
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वायु गुणवत्ता की खराबी ने बनारस को गैस का चैंबर बना दिया है। सुबह से ही हवा में धुंध और धूल से स्मॉग का असर देखने को मिला। सोमवार को वाराणसी का एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहद खराब स्तर पर पहुंच गया। दिल्ली से होकर पूर्वांचल के आसमान में छाए स्मॉग का असर दिनभर बना रहा।
वहीं शहर के मंडलीय चिकित्सालय की ओपीडी में सांस, दमा और गले के संक्रमण के मरीजों की संख्या सबसे अधिक रही। हालांकि पीएम 10 और पीएम 2.5 के अधिकतम व न्यूनतम आंकड़ों में 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
सोमवार की सुबह वाराणसी का एयर क्वालिटी इंडेक्स 384 तक पहुंच गया था, जिसे बेहद खराब माना जाता है। दोपहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स 341 और रात 9 बजे 323 दर्ज किया गया। अर्दली बाजार से लेकर पांडेयपुर, गौदोलिया से चौक, लहरतारा से चांदपुर, लंका से सामनेघाट और बीएलडब्ल्यू से चितईपुर, नई सड़क से चेतगंज तक के इलाके में धूल की चादर छाई रही।
शहर के कई इलाकों में सोमवार की दोपहर जाम की समस्या भी बनी रही। पीएम 2.5 की अधिकतम मात्रा रात 9 बजे 398 और न्यूनतम मात्रा 162 तथा पीएम 10 की अधिकतम मात्रा 424 और न्यूनतम मात्रा 168 तक पहुंच गई थी। रविवार को अधिकतम और न्यूनतम आंकड़ों में 40 से 46 क्युबिक मीटर का ही अंतर रह गया था।
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के प्रो. अजय कुमार ने बताया कि वायु प्रदूषण और बदलते मौसम ने एलर्जी की समस्या को बढ़ा दिया है। छींक, खांसी और जुकाम इसके शुरूआती लक्षण हैं। पीएम 10 और पीएम 2.5 के सूक्ष्म कण सांस के रास्ते फेफड़ों तक पहुंचकर परेशानियां बढ़ा रहे हैं। इन सबसे बचने के लिए मास्क लगाकर ही घर से निकलें और भाप लें। तीन लीटर गुनगुना पानी जरूर पीएं। समस्या बढ़ने पर चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कालिका सिंह ने बताया कि शहर के कई इलाकों में पानी के छिड़काव का निर्देश दिया गया है। शुक्रवार से ही पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। एयर क्वालिटी में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।