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बांह में लाल रंग का रिबन बांध कर अधिवक्ताओं ने किया प्रदर्शन
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वाराणसी। अधिवक्ताओं की कल्याणकारी योजनाओं की लगातार उपेक्षा का आरोप लगाकर सोमवार को अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। इस दौरान अधिवक्ताओं ने बांह में लाल रिबन बांध कर दीवानी कचहरी में जुलूस निकाला और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए डीएम पोर्टिको में प्रदर्शन किया।
यूपी बार काउंसिल के आह्वान पर प्रदर्शन करने वाले अधिवक्ताओं ने कहा कि पूर्व की सरकार में हर वर्ष जारी होने वाला 40 करोड़ का फंड रिलीज किया जाए। अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि डेढ़ लाख से बढ़ा कर पांच लाख रुपये की जाए। मुख्यमंत्री अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल से मिलकर उनकी समस्याएं सुनें और समाधान कराएं। अधिवक्ताओं ने बताया कि आगामी 23 मार्च को वह तहसील और जिला मुख्यालय पर अपनी मांगों के समर्थन में धरना प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान यूपी बार काउंसिल के चेयरमैन हरिशंकर सिंह, सेंट्रल बार के अध्यक्ष प्रेमशंकर पांडेय व महामंत्री शैलेंद्र सिंह बबलू, बनारस बार अध्यक्ष मोहन सिंह यादव व महामंत्री अरुण सिंह झप्पू, संजय सिंह दाढ़ी, शशिकांत राय चुन्ना, शैलेंद्र सिंह सरदार, सुरेंद्र प्रताप सिंह, ओपी पांडेय, अशोक उपाध्याय, सुनील मिश्र, नित्यानंद राय, विनोद पांडेय, कृपाशंकर सिंह, विवेक सिंह, रंजन मिश्र, राकेश पांडेय और अंबरीष सिंह आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।
एडवोकेट आन रोल को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच यूपी बार काउंसिल के चेयरमैन हरिशंकर सिंह ने स्पष्ट किया है कि जिला जज द्वारा बनवाए जा रहे परिचय पत्र का विरोध करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा बीते तीन मार्च को पारित आदेश को वापस लेने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया गया है। इस मामले की हाईकोर्ट में पैरवी के लिए बार काउंसिल ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। उन्होंने कहा कि उस निर्णय पर बार काउंसिल कायम है जिसमें सुप्रीम कोर्ट और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के आदेश पर बनी सीओपी को ही जनपद अदालत में प्रवेश व वकालत के लिए मान्य कहा गया था। चेयरमैन ने कहा कि एडवोकेट एक्ट में वकीलों के पंजीकरण और परिचय पत्र बनाने का अधिकार बार काउंसिल को है। पूरे देश में जिला जज को परिचय पत्र बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। उधर, इस मुद्दे पर सेंट्रल और बनारस बार की संयुक्त बैठक 18 मार्च को बुलाई गई है।
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यूपी बार काउंसिल के आह्वान पर प्रदर्शन करने वाले अधिवक्ताओं ने कहा कि पूर्व की सरकार में हर वर्ष जारी होने वाला 40 करोड़ का फंड रिलीज किया जाए। अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि डेढ़ लाख से बढ़ा कर पांच लाख रुपये की जाए। मुख्यमंत्री अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल से मिलकर उनकी समस्याएं सुनें और समाधान कराएं। अधिवक्ताओं ने बताया कि आगामी 23 मार्च को वह तहसील और जिला मुख्यालय पर अपनी मांगों के समर्थन में धरना प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान यूपी बार काउंसिल के चेयरमैन हरिशंकर सिंह, सेंट्रल बार के अध्यक्ष प्रेमशंकर पांडेय व महामंत्री शैलेंद्र सिंह बबलू, बनारस बार अध्यक्ष मोहन सिंह यादव व महामंत्री अरुण सिंह झप्पू, संजय सिंह दाढ़ी, शशिकांत राय चुन्ना, शैलेंद्र सिंह सरदार, सुरेंद्र प्रताप सिंह, ओपी पांडेय, अशोक उपाध्याय, सुनील मिश्र, नित्यानंद राय, विनोद पांडेय, कृपाशंकर सिंह, विवेक सिंह, रंजन मिश्र, राकेश पांडेय और अंबरीष सिंह आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।
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एडवोकेट आन रोल को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच यूपी बार काउंसिल के चेयरमैन हरिशंकर सिंह ने स्पष्ट किया है कि जिला जज द्वारा बनवाए जा रहे परिचय पत्र का विरोध करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा बीते तीन मार्च को पारित आदेश को वापस लेने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया गया है। इस मामले की हाईकोर्ट में पैरवी के लिए बार काउंसिल ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। उन्होंने कहा कि उस निर्णय पर बार काउंसिल कायम है जिसमें सुप्रीम कोर्ट और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के आदेश पर बनी सीओपी को ही जनपद अदालत में प्रवेश व वकालत के लिए मान्य कहा गया था। चेयरमैन ने कहा कि एडवोकेट एक्ट में वकीलों के पंजीकरण और परिचय पत्र बनाने का अधिकार बार काउंसिल को है। पूरे देश में जिला जज को परिचय पत्र बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। उधर, इस मुद्दे पर सेंट्रल और बनारस बार की संयुक्त बैठक 18 मार्च को बुलाई गई है।
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