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बापू को माल्यार्पण कर निकाला जूलूस, पुष्पवर्षा कर किया स्वागत
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वाराणसी। मुस्लिम, हिंदू, सिख, ईसाई सबने हजरत अली की 1466वीं जयंती पूरे जोशो खरोश के साथ मनाई। 13 साल से उठने वाला कदीमी जुलूसे अली टाउनहाल गेट से निकला। जुलूस रवाना होने के पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व कस्तूरबा की मूर्ति पर माल्यार्पण करने के बाद संयोजक हाजी फरमान हैदर, जाफर एडवोकेट, जहीर हैदर, अमीन रिजवी की देख रेख में जुलूस रवाना हुआ।
मैदागिन बुलानाला से होते हुए जुलूस नीचीबाग गुरुद्वारा पहुंचा तो सिख समाज ने माल्यार्पण करके और पुष्प वर्षा करके स्वागत किया। भाई महेंदर सिंह की अगुवाई में लोगों ने मौलानाओं को फूल माला पहनाया। चौक पहुंचने पर मौलाना जायर हुसैन ने संक्षिप्त तकरीर करके हजरत अली के जीवन पर प्रकाश डाला। जुलूस दालमंडी से गुजरकर नई सड़क चौमुहानी पहुंचा तो यहां पर मौलाना नदीम असगर ने नूरानी तकरीर पेश की। जुलूस पितरकुंडा, नई सड़क, काली महल, नई पोखरा होते हुए फातमान पहुंचा। यहां हजारों लोगों ने हजरत अली के रौजे की जियारत की। हाजी फरमान हैदर ने बताया कि महफिलों का सिलसिला छह मार्च तक जारी रहेगा।
धर्मगुरुओं ने डाला हजरत अली के जीवन पर प्रकाश
जुलूस के बाद दरगाह ए फातमान में सर्वधर्म सेमिनार का आयोजन किया गया। संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र, वाराणसी प्रांत के बिशप यूजीन जोजेफ, गुरुद्वारा नीचीबाग के भाई धर्मवीर सिंह, फादर फिलिप आदि ने हजरत अली के जीवन पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने बताया कि हजरत अली का जीवन सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं बल्कि दुनियां के तमाम लोगों के लिए एक मील का पत्थर एवं एक रोशन चिराग है। वे इंसाफ पसंद और गरीब परवर थे। इस अवसर पर अंजुमन आबिदिया, चौहट्टा लाल खां, अंजुमन जादे आखेरत मदनपुरा को विलायत अली एवार्ड दिया गया। शिक्षा के क्षेत्र में नाम रोशन करने वाले बच्चों को भी पुरस्कृत किया गया। सेमिनार में मुख्य रूप से प्रो. अजीज हैदर, मौलना नदीम असगर, मौलाना कैअर नजफी, मौलाना शबीब दिल्ली, मौलाना कासिम, मौलाना इकबाल हैदर आदि मौजूद रहे।
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मैदागिन बुलानाला से होते हुए जुलूस नीचीबाग गुरुद्वारा पहुंचा तो सिख समाज ने माल्यार्पण करके और पुष्प वर्षा करके स्वागत किया। भाई महेंदर सिंह की अगुवाई में लोगों ने मौलानाओं को फूल माला पहनाया। चौक पहुंचने पर मौलाना जायर हुसैन ने संक्षिप्त तकरीर करके हजरत अली के जीवन पर प्रकाश डाला। जुलूस दालमंडी से गुजरकर नई सड़क चौमुहानी पहुंचा तो यहां पर मौलाना नदीम असगर ने नूरानी तकरीर पेश की। जुलूस पितरकुंडा, नई सड़क, काली महल, नई पोखरा होते हुए फातमान पहुंचा। यहां हजारों लोगों ने हजरत अली के रौजे की जियारत की। हाजी फरमान हैदर ने बताया कि महफिलों का सिलसिला छह मार्च तक जारी रहेगा।
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धर्मगुरुओं ने डाला हजरत अली के जीवन पर प्रकाश
जुलूस के बाद दरगाह ए फातमान में सर्वधर्म सेमिनार का आयोजन किया गया। संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र, वाराणसी प्रांत के बिशप यूजीन जोजेफ, गुरुद्वारा नीचीबाग के भाई धर्मवीर सिंह, फादर फिलिप आदि ने हजरत अली के जीवन पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने बताया कि हजरत अली का जीवन सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं बल्कि दुनियां के तमाम लोगों के लिए एक मील का पत्थर एवं एक रोशन चिराग है। वे इंसाफ पसंद और गरीब परवर थे। इस अवसर पर अंजुमन आबिदिया, चौहट्टा लाल खां, अंजुमन जादे आखेरत मदनपुरा को विलायत अली एवार्ड दिया गया। शिक्षा के क्षेत्र में नाम रोशन करने वाले बच्चों को भी पुरस्कृत किया गया। सेमिनार में मुख्य रूप से प्रो. अजीज हैदर, मौलना नदीम असगर, मौलाना कैअर नजफी, मौलाना शबीब दिल्ली, मौलाना कासिम, मौलाना इकबाल हैदर आदि मौजूद रहे।
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