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UP: लोकल सामान को दें बढ़ावा, अपने घरों से करें स्वदेशी की शुरुआत; काशी के उद्यमी और व्यापारियों ने कही ये बात

Fri, 08 Aug 2025 03:47 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Fri, 08 Aug 2025 03:47 PM IST
सार

Varanasi News: अमेरिकी सरकार द्वारा भारतीय सामानों के निर्यात पर 25 टैरिफ लागू होने के बाद भारतीय निर्यातकों के पास केवल स्वदेशी ही एक मात्र विकल्प शेष है।

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US tariffs effect varanasi Entrepreneurs and businessmen said promote local goods start Swadeshi
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में शामिल उद्यमी और व्यापारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वदेशी के लिए लोगों को अपने घर से ही शुरुआत करनी होगी। ये हमारी जिम्मेदारी है कि हम लोकल सामान को बढ़ावा दें। अपने परिवार को भी इसके प्रति जागरूक करें। ये छोटे- छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं। हां, इसमें सरकार का भी समर्थन जरूरी है। अमेरिकी सरकार द्वारा भारतीय सामानों के निर्यात पर 25 टैरिफ लागू होने के बाद भारतीय निर्यातकों के पास केवल स्वदेशी ही एक मात्र विकल्प शेष है। ये बातें उद्यमियों और व्यापारियों ने अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में कहीं।

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पूर्वांचल निर्यातक संघ के अध्यक्ष बोले
अमेरिकी टैरिफ के कारण सालाना 12-12.5 हजार करोड़ की इंडस्ट्री अब 4-5 हजार करोड़ पर सिमट जाएगी। निर्यातकों के लिए सरकार को कुछ आवश्यक कदम उठाने होंगे। उद्यमियों को बिना गारंटी लोन उपलब्ध कराने की बात कही गई है, लेकिन सच्चाई ये है कि बिना गारंटी बैंक लोन दे ही नहीं सकते। पूर्वांचल में कार्पेट इंडस्ट्री के जरिये 20 लाख लोगों की रोजी रोटी चल रही है। बालश्रम के नियमों के कारण अब कारीगरों का मिलना मुश्किल हो गया है। -रघु मेहरा, अध्यक्ष, पूर्वांचल निर्यातक संघ
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लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष बोले
हमारे यहां इंफ्रास्ट्रक्चर और मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। जो सुविधाएं विदेशों में दी जा रही हैं, यहां नहीं हैं। सरकार ने स्वदेशी अपनाने की अपील की है। लेकिन धरातल पर सुविधाओं का अभाव है। एमएसएमई के ओर से पहले वर्कशॉप होते थे, अब वह भी नहीं होते। लघु उद्योग भारती ने इसके लिए कई बार प्रयास किए हैं। सरकार हैंडलूम को बढ़ावा दे रही है। यह अच्छी पहल है लेकिन केवल हैंडलूम से ही देश नहीं चलेगा। - ज्योति शंकर मिश्रा, अध्यक्ष, वाराणसी मंडल, लघु उद्योग भारती

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घर से करें स्वदेशी की शुरुआत

स्वदेशी की शुरुआत हमें अपने घर से ही करनी होगी। विदेशी मल्टीनेशनल कंपनियों के सामानों का इस्तेमाल बंद करना होगा। इन कंपनियों के उत्पाद काफी महंगे हैं। लोकल व्यापारी अपने सामान सस्ता करें और उसमें क्वालिटी लाएं। -अशोक कसेरा, अध्यक्ष, वाराणसी किराना व्यापार समिति

इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर फार्मा इंडस्ट्रीख् सभी अपने उत्पाद की क्वालिटी सुधारें तो लोगों का भरोसा बनेगा। इससे देश की जीडीपी भी बेहतर होगी और स्वदेशी को बल मिलेगा। 2017 से पहले कृषि यंत्रों के आयात-निर्यात पर कोई टैक्स नहीं लगता था, अब 12 प्रतिशत जीएसटी देनी होती है। -राजेश कुमार सिंह, प्रदेश सचिव, लघु उद्योग भारती

अमेरिका की ओर से लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ का असर कालीन निर्यातकों पर पड़ेगा। इससे हमारी इंडस्ट्री वेंटीलेटर पर चली जाएगी। भारत में कालीन के उपभोक्ता हम हैं। हमें दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। -भारत भूषण गुप्ता, उद्यमी

उद्यमियों के विकास के लिए सरकारी नीतियां लागू ही नहीं हो पाईं। हमें अपने उत्पादों की क्वालिटी पर ध्यान देना होगा। बाहरी कंपनियां मजबूत गाड़ियां बनाती हैं। जबकि हम इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। -पीयूष अग्रवाल, महामंत्री, औद्योगिक आस्थान संघ 

देश के लिए स्वदेशी अत्यंत जरूरी है। हमें अपने परिवार के सदस्यों को इसके लिए जागरूक करना चाहिए। विदेशी कंपनियां हमारे घर पर हावी हो चुकी हैं। ऑनलाइन व्यापार बंद होगा तभी स्वदेशी को बढ़ावा मिलेगा। हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। -किशोर सेठ, महामंत्री, उप्र स्वर्णकार संघ 
 
वर्तमान में स्वर्ण कारीगर विदेशी मशीनों पर निर्भर हो गए हैं। जबकि हम बेहतरीन कारीगरी और नक्काशी के लिए जाने जाते हैं। गांवों में कारीगरी बंद हो रही है। सरकार इस पर कुछ प्रयास करे तो शिल्पकारी फिर से जीवंत हो उठेगी। -सत्यनारायण सेठ, प्रदेश अध्यक्ष, उप्र स्वर्णकार संघ 
 
अभी टैरिफ के और बढ़ने की आशंका है। इन सबके बीच आयातक और निर्यातक दोनों के समन्वय से व्यापार जारी रह सकता है। केंद्र सरकार भी इसमें दखलअंदाजी करे तो स्थिति सुधर सकती है। अन्यथा बेरोजगारी बढ़ेगी और निर्यातक वर्ग समाप्त हो जाएगा। -अनिल अग्रवाल, उपाध्यक्ष, पूर्वांचल निर्यातक संघ 

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