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UP: 40% कार्बन निकालने वाली शहरी बिल्डिंग बनाई जाएंगी इको फ्रेंडली, आईआईटी में बनेगा क्यूब सेंटर; होंगे शोध

Sun, 26 Oct 2025 01:40 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 26 Oct 2025 01:40 PM IST
सार

IIT BHU: शहरों में बन रहीं बिल्डिंगें 40 फीसदी कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। इको फ्रेंडली बिल्डिंग बनाने के लिए आईआईटी बीएचयू में दो करोड़ की लागत से क्यूब रिसर्च सेंटर बनाया जाएगा।

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Urban buildings made eco-friendly emitting 40% carbon Cube Center built in IIT bhu
IIT BHU - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शहरी प्रदूषण को कम करने, ऊर्जा के इको फ्रेंडली संसाधनों और स्वच्छ ऊर्जा के लिए उचित मटेरियल पर रिसर्च के लिए आईआईटी बीएचयू में तीन रिसर्च सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इनकी अनुमानित लागत 15 करोड़ रुपये तक आंकी गई है। 

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क्यूब का पूरा नाम है - सेंटर फॉर अर्बन एंड बिल्ट एनवायरनमेंट। क्यूब के माध्यम से शहर को इको फ्रेंडली बनाया जाएगा। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय क्षति से हुईं समस्याओं के यहां पर समाधान खोजे जाएंगे। इस केंद्र में एनर्जी फ्रेंडली भवनों के डिजाइन पर अध्ययन किया जाएगा। भारत का बिल्डिंग सेक्टर भारत के एक-तिहाई से ज्यादा ऊर्जा का उपभोग करता है। 
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भविष्य में इसकी खपत बढ़ेगी तो भारत के ऊर्जा सेक्टर पर नकारात्मक असर पड़ेगा। आईआईटी बीएचयू ने इन सभी सेंटरों का प्रपोजल बना लिया है और अब फंड जुटाया जा रहा है। इसके लिए संस्थान के पुरा छात्रों की भी मदद ली जा रही है।
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देश-विदेश और संस्थान के कई विभागों के शोधार्थी मिलकर इस क्यूब सेंटर में नीतियां बनाएंगे। केंद्र में अत्याधुनिक लैब खोला जाएगा। इसके तहत थर्मल कम्फर्ट यानी कि सामान्य तापमान का वातावरण, घर के अंदर की शुद्ध हवा, फसाड टेक्नोलॉजी और एचवीएसी हिटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग सिस्टम पर रिसर्च किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्लानिंग एंड डिजाइन के साथ ही मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के भी वैज्ञानिक होंगे।

5 करोड़ से बनेगा क्रेस्ट सेंटर बनेगी हाई पॉवर बैटरी
ऊर्जा के नए संसाधनों को तैयार करने पर रिसर्च के लिए 5 करोड़ से क्रेस्ट सेंटर भी विकसित किया जाएगा। इसका पूरा नाम है - सेंटर फॉर रिसर्च इन एनर्जी, सस्टनेबल एंड टेक्नोलॉजी। हाई पॉवर बैटरी, सौर और नवीकरणीय ऊर्जा के अलग अलग स्रोतों की खोज की जाएगी। उन्हें विकसित कर लोगों के सामने लाया जाएगा। ऊर्जा के क्षेत्र में आने वाले इनोवेशन को आगे बढ़ाकर सतत विकास के तकनीक पर आधारित उपकरणों को बनाया जाएगा।

8 करोड़ से बनेगा क्रीम्स रिसर्च सेंटर
सेंटर फॉर रिसर्च इन इंजीनियरिंग एडवांस्ड मटेरियल्स फॉर सस्टेनेबिलिटी (क्रीम्स) की स्थापना की जाएगी। इसकी लागत आठ करोड़ रुपये तक होगी। इसमें स्वच्छ ऊर्जा इंजीनियरिंग के लिए सबसे बेहतर काम करने वाले अत्याधुनिक मटेरियल पर रिसर्च किया जाएगा। 

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