26 घंटे की पूछताछ में अंजू कटियार के छूटे पसीने, कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा
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लोकसेवा आयोग की परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार को हिरासत में लेने से पहले उनसे करीब 26 घंटे तक गहन पूछताछ की गई। वह कई सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं। कई बार जवाब देते हुए हड़बड़ा गईं। जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर उन्हें हिरासत में लेकर क्राइम ब्रांच की टीम वाराणसी रवाना हो गई।
यूपीपीएससी की परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार को शाम करीब 6 बजे क्राइम ब्रांच प्रयागराज से लेकर पुलिस लाइन पहुंची। यहां से जज के सामने पेश किए जाने और जेल भेजे जाने तक वे असहज नजर आईं। उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस की सूचना पर उनके पति भी पुलिस लाइन पहुंचे थे। खुद को ईमानदार बताते हुए अंजू बार-बार कहती रहीं थी कि उनके खिलाफ कोई प्रमाण नहीं है।
सपा सरकार के दौरान आयोग द्वारा की गई भर्तियों की जांच सीबीआई कर रही है, इसमें भी वह सहयोग कर रही हैं। उधर, अंजू को जब जज के आवास पर ले जाया गया तो अधिवक्ताओं की भीड़ लग गई। अधिवक्ताओं का कहना था कि एक आरोपी के बयान और कुछ मेसेज और कॉल के आधार पर अदालत में अंजू पर आरोप सिद्ध कर पाना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा।
ये है मामला :
29 जुलाई 2018 को बनारस में आयोजित एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा के हिंदी और सामाजिक विज्ञान का पेपर आउट हुआ था। कोलकाता निवासी अशोक देव चौधरी से पश्चिम बंगाल सीआईडी को मिली इस जानकारी के आधार पर यूपी एसटीएफ ने जांच शुरू की थी। अशोक की सूचना पर 27 मई को कोलकाता निवासी प्रिंटिंग प्रेस मालिक कौशिक कुमार को एसटीएफ ने चोलापुर क्षेत्र से गिरफ्तार किया।
कौशिक ने बताया कि एलटी ग्रेड परीक्षा के पेपर उसके प्रेस में छपे थे और प्रति अभ्यर्थी 5 लाख रुपये लेकर उसने 28 जुलाई 2018 को सॉल्वर गैंग के पास बनारस भिजवाया था। कौशिक ने यह भी बताया कि इस काम में अंजू की मिलीभगत थी और इसके बदले में उसने उन्हें 26 मई को 10 लाख रुपये दिए थे। इसके अलावा जब भी लोक सेवा आयोग के पेपर छपते थे तो मिलने वाली धनराशि में वह 5 प्रतिशत कमीशन अंजू को देता था। इस आधार पर चोलापुर थाने में अंजू सहित नौ के खिलाफ केस दर्ज कर कौशिक को जेल भेज दिया गया।
ऐसे हुई शुरुआत :
27 मई को प्रिंटिंग प्रेस मालिक कौशिक कुमार कर की गिरफ्तारी के बाद से ही अंजू पर शिकंजा कसना शुरू हो गया था। 28 मई को एसटीएफ लखनऊ के इंस्पेक्टर बिजेंद्र शर्मा ने चोलापुर थाने में परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार और कौशिक समेत नौ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
कोर्ट से सर्च वारंट लेने के बाद टीम रात करीब 12.15 बजे प्रयागराज पहुंची। टीम ने सबसे पहले लोक सेवा आयोग के गेस्ट हाउस स्थित परीक्षा नियंत्रक के कक्ष संख्या 15 को कब्जे में ले लिया और तलाशी ली। इसमें उनके मोबाइल और लैपटॉप के साथ दस्तावेज कब्जे में लिए। इसके बाद उनसे कई चरणों में पूछताछ की गई।
खुद को बताती रहीं बेकसूर :
पूछताछ में पुलिस के सामने अंजू कटियार खुद को बेकसूर बताती रहीं। उन्होंने कहा कि उन्हें एसटीएफ की ओर से यह नहीं बताया गया कि कौशिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने जैसी कार्रवाई की जा रही है। सिर्फ यह बताया गया था कि कौशिक की फर्म की जांच की जा रही है। उन्होंने 26 मई को कौशिक से रुपयों के लेनदेन की बात को खारिज किया।
पुलिस ने जब कौशिक से मिली जानकारियां बताईं और दोनों के बीच व्हाट्सऐप पर हुई चैटिंग दिखाई तो अंजू शांत हो गईं। उधर, पुलिस लाइन में पत्रकारों से अंजू ने कहा कि उनके ऊपर लगाए गए आरोप निराधार हैं। आज तक उनके खिलाफ एक भी शिकायत नहीं है। उन्होंने नौकरी पूरी ईमानदारी के साथ की है। अदालत में वह अपना पक्ष रखेंगी और उन्हें विश्वास है कि वह निर्दोष साबित होंगी।
कई चरणों में हुई पूछताछ -
28 मई- पहला दिन
पहले दिन जांच करने पहुंची टीम ने उनके कमरे की तलाशी ली। उनके मोबाइल और लैपटॉप की भी जांच की। इससे पुलिस को अहम जानकारियां मिलीं। इसके बाद दोनों गैजेट सील कर दिए गए। चर्चा रही कि मोबाइल में पेपर लीक प्रकरण के मुख्य आरोपी कौशिक से हुई व्हाट्सएप चैट भी मिली। इसका स्क्रीन शॉट भी लिया गया। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस को पूर्व में हुई परीक्षाओं के साथ ही एलटी ग्रेड परीक्षा से संबंधित दस्तावेज मिले, जिन्हें कब्जे में ले लिया गया।
29 मई- दूसरा दिन
दूसरे दिन टीम ने परीक्षा नियंत्रक से पेपर लीक प्रकरण के आरोपी कौशिक के बयान और व्हाट्सएप चैट के बारे में पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, टीम ने सबसे पहले पूछा कि कौशिक 26 मई को उनसे मिलने आया था या नहीं। परीक्षा नियंत्रक ने इसका जवाब हां में दिया। लेकिन जब कौशिक की ओर से उन्हें 10 लाख रुपये दिए जाने से इंकार किया। दोपहर बाद टीम ने कौशिक के मोबाइल से मिले व्हाट्सएप चैट के संबंध में पूछताछ की। कौशिक के व्हाट्सएप कांटैक्ट में ‘Uppsc Ceo Anju Katiyar’ का अकाउंट मिला था। इसमें पुलिस इंक्वायरी और शिकायतकर्ता अशोक देव चौधरी के मामले में बात की गई थी। परीक्षा नियंत्रक को जब यह व्हाट्सएप चैट दिखाई गई तो वह हड़बड़ा गईं और संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं।
30 मई- तीसरा दिन
बृहस्पतिवार को हुई पूछताछ के दौरान परीक्षा नियंत्रक सबसे ज्यादा असहज नजर आईं। सुबह आयोग कार्यालय पहुंचने के बाद टीम ने उनसे ब्लैकलिस्ट होने के बाद भी आरोपी कौशिक को पेपर छपाई का काम देने के बाबत पूछताछ की। पूछा गया कि इस साल फरवरी में ही आयोग को बता दिया गया था कि एलटी ग्रेड भर्ती परीक्षा 2018 पेपर लीक मामले में कोलकाता स्थित ब्लेसिंग स्क्योर प्रेस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मालिक कौशिक की भूमिका संदिग्ध है और उसके खिलाफ जांच कर रही है। इसके बावजूद आगामी परीक्षा का पेपर छापने का काम उसे क्यों दिया गया। इस सवाल पर परीक्षा नियंत्रक पसीना-पसीना हो गईं। गोपनीयता भंग करने के आरोप के सवाल पर भी वह सकपका गईं।