पंचायत चुनाव के किस्से: खुद को जिंदा साबित करने के लिए चुनाव लड़ रहे संतोष मूरत सिंह, जानें पूरा मामला
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उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के दौरान कई ऐसे किस्से निकलकर सामने आ रहे हैं, जिन्हें सुनकर हम भी चौंक जाते हैं। वाराणसी में भी एक शख्स सामने आया है, जो पंचायत चुनाव लड़ रहा है। चौबेपुर के छितौनी गांव के रहने संतोष मूरत सिंह ‘मैं जिंदा हूं’ को अंतत: गुरुवार को प्रस्तावक मिल गया। वार्ड संख्या 100 से बीडीसी प्रत्याशी के रूप में उन्होंने नामांकन किया।
संतोष नामांकन फार्म खरीद कर प्रस्तावक की तलाश कर रहे थे। जाल्हूपुर निवासी तूफानी ने प्रस्तावक के रूप में अपनी सहमति प्रदान की। 1:00 बजे उन्होंने नामांकन की प्रक्रिया पूरी की। संतोष ने कहा कि हमें न्याय के लिए हर स्तर पर संघर्ष करना पड़ रहा है। लेकिन प्रयास से पीछे नहीं हटूंगा।
संतोष सिंह सालों से अपने जिंदा होने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने बीडीसी चुनाव का नामांकन भर दिया है। उनका कहना है कि भीख मांगकर चुनाव में नामांकन भरने के लिए पैसे जुटाए और प्रस्तावक भी भीख मांगकर मिला है। मानवाधिकार आयोग ने उनके मामले में वाराणसी के डीएम को तलब भी किया है, जिससे उन्हें कुछ उम्मीद बंधी है।
संतोष ने कहा कि उन्होंने लोकसभा और विधानसभा में भी नामांकन किया था, लेकिन वो रिजेक्ट हो गए थे। उन्होंने बताया कि वह 2017 में वाराणसी से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इन सबके बावजूद वह अभी भी सरकारी फाइलों में मृत हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद को जिंदा साबित करते के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।