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UP: पूर्वांचल में 40 साल से राजनीतिक वनवास काट रही कांग्रेस; कभी था गढ़, आज 12 सीट पर बिना लड़े मैदान से बाहर
Tue, 16 Apr 2024 01:13 PM IST
शाहरुख खान
राहुल दुबे, अमर उजाला, वाराणसी
राहुल दुबे, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 16 Apr 2024 01:13 PM IST
सार
पूर्वांचल में 2004 में वाराणसी से अंतिम बार कांग्रेस के डॉ. राजेश मिश्रा ने जीत दर्ज की थी। कभी पंजे का गढ़ रहा पूर्वांचल आज 12 सीटों पर बिना लड़े ही मैदान से बाहर है।
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UP Lok Sabha Election 2024
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पूर्वांचल की 13 सीटों की बात करें तो यहां बनारस और घोसी को छोड़कर कांग्रेस राजनीतिक वनवास काट रही है। पिछले 40 वर्षों से इन सीटों पर पार्टी को कोई जीत हासिल नहीं हुई है। इस बार तो समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में हैं तो बिना लड़े ही 12 सीटों से बाहर हो गई है।
कारण, गठबंधन में कांग्रेस के हिस्से में सिर्फ वाराणसी की सीट आई है। इस सीट पर भी पार्टी ने अंतिम बार 2004 में जीत दर्ज की थी। 1984 में कांग्रेस लहर में इन सभी सीटों पर पार्टी ने जीत हासिल की थी। मगर इसके बाद पार्टी इस जीत को बचाकर नहीं रख सकी।
यहीं से भाजपा और क्षेत्रीय दल हावी होना शुरू हो गए। 1991 में राम मंदिर के मुद्दे के बाद भाजपा ने कई सीटों पर खाता खोला मगर इस लहर में कांग्रेस ने घोसी सीट पर जीत दर्ज कर ली। इसके बाद 2004 में सिर्फ बनारस में डॉ. राजेश मिश्रा ने जीत हासिल की है।
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इधर पिछले 40 सालों में बनारस और घोसी को छोड़कर पार्टी किसी भी सीट जीत नहीं सकी है। पिछले एक दशक में हाल यह है कि लगभग हर सीट से उपविजेता की दौड़ से भी पार्टी बाहर हो चुकी है।
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कारण, गठबंधन में कांग्रेस के हिस्से में सिर्फ वाराणसी की सीट आई है। इस सीट पर भी पार्टी ने अंतिम बार 2004 में जीत दर्ज की थी। 1984 में कांग्रेस लहर में इन सभी सीटों पर पार्टी ने जीत हासिल की थी। मगर इसके बाद पार्टी इस जीत को बचाकर नहीं रख सकी।
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यहीं से भाजपा और क्षेत्रीय दल हावी होना शुरू हो गए। 1991 में राम मंदिर के मुद्दे के बाद भाजपा ने कई सीटों पर खाता खोला मगर इस लहर में कांग्रेस ने घोसी सीट पर जीत दर्ज कर ली। इसके बाद 2004 में सिर्फ बनारस में डॉ. राजेश मिश्रा ने जीत हासिल की है।
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इधर पिछले 40 सालों में बनारस और घोसी को छोड़कर पार्टी किसी भी सीट जीत नहीं सकी है। पिछले एक दशक में हाल यह है कि लगभग हर सीट से उपविजेता की दौड़ से भी पार्टी बाहर हो चुकी है।
राजनीति विशेषज्ञों का मानना है कि यही कारण है कि गठबंधन में कांग्रेस के हिस्से में सिर्फ वाराणसी सीट आई है और इस सीट पर भी पार्टी पिछले दो चुनाव जमानत नहीं बचा सकी, तीसरे नंबर पर रही है। अब इस चुनाव में चंदौली, भदोही, गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़, लालगंज, जौनपुर, मिर्जापुर, सलेमपुर, घोसी, रॉबटर्सगंज और मछलीशहर में कांग्रेस का कोई प्रत्याशी नहीं है। ऐसे में इन सीटों पर लड़ने से पहले ही पार्टी बाहर है।
1984 में कांग्रेस ने सभी सीटें जीती थी। 1989 के लोकसभा में हार के बाद पार्टी की स्थिति कमजोर होती गई। आज वाराणसी मंडल में आने वाली 13 लोकसभा सीटों में गठबंधन में उन्हें एक सीट वाराणसी मिली है। बाकी सीटें सपा ने अपने हिस्से में रखी, उसका कारण है कि क्षेत्रीय पार्टियों के पास संगठन, जमीनी स्तर पर काम कर रहे कार्यकर्ता और बेस वोट बैंक है। कांग्रेस भी इस बात को जान रही है तभी उनके नेतृत्व ने सिर्फ एक सीट पर ही संतोष किया है।- प्रोफेसर तेज प्रताप सिंह, राजनीति विभाग, बीएचयू
सीट कब-कब जीती कांग्रेस अंतिम बार जीत
| सीट | कब-कब जीती कांग्रेस | अंतिम बार जीत |
| वाराणसी | 1957, 62, 71, 80, 84, 2004 | 2004 |
| चंदौली | 1957, 62, 71, 1984 | 1984 |
| भदोही | यहां कभी नहीं मिली जीत | |
| गाजीपुर | 1952, 57, 62, 80, 1984 | 1984 |
| बलिया | 1957, 62, 67, 71, 1984 | 1984 |
| आजमगढ़ | 1952, 57, 62, 67, 71, 78, 1984 | 1984 |
| लालगंज | 1967, 71, 1984 | 1984 |
| जौनपुर | 1952, 57, 63, 67, 71, 1984 | 1984 |
| मिर्जापुर | 1952, 57, 62, 71, 80, 81, 1984 | 1984 |
| सलेमपुर | 1952, 57, 62, 67, 71, 80, 1984 | 1984 |
| घोसी | 1984, 89, 1991 | 1991 |
| रॉबटर्सगंज | 1962, 67, 71, 80, 1984 | 1984 |
| मछलीशहर | 1962, 67, 71, 1984 | 1984 |