Aachar Sanhita in UP: नियम के उल्लंघन पर छह माह की कैद और दो हजार जुर्माना या दोनों लगेगा, निर्देश जारी
आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी कौशल राज शर्मा ने इसके अनुपालन के लिए सभी विभाग, संस्थान, निगम और विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी किए हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान बिना मुद्रक और प्रकाशक की घोषणा के पंपलेट व पोस्टर प्रकाशित नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए प्रकाशन करने वाले और करवाने वाले दोनों ही लोगों को जिम्मेदार माना जाएगा और नियम के उल्लंघन पर छह माह की कैद व दो हजार जुर्माना या दोनों लगाया जा सकता है।
जिला निर्वाचन अधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा-127 क के तहत कोई व्यक्ति किसी ऐसे निर्वाचन पंफलेट, पोस्टर का मुद्रण या प्रकाशन नहीं करेगा न ही करवाएगा, इसके मुख्य पृष्ठ पर मुद्रक एवं इसके प्रकाशक का नाम व पता न लिखा हो।
प्रकाशक की पहचान की घोषणा उनके द्वारा हस्ताक्षरित और उन्हें व्यक्तिगत जानने वाले दो व्यक्तियों से सत्यापित करवाकर नियमों के अनुसार प्रकाशित करना होगा। मुद्रक को छपाई के बाद दस्तावेज की एक प्रति, अपनी घोषणा की एक प्रति जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में जमा करना होगा।
पढ़ेंः पश्चिमी विक्षोभ से बदला मौसम: बनारस में बारिश से बढ़ी गलन, दो दिन तक ऐसे ही रहने के आसार
निर्देशों के पालन में लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी कौशल राज शर्मा ने इसके अनुपालन के लिए सभी विभाग, संस्थान, निगम और विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी किए हैं। इसमें बताया गया कि भारत सरकार, प्रदेश सरकार व अन्य शासकीय अधिकारी और कर्मचारी भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराएं।
यदि विभागों, अधिकारियों व कर्मचारियों पर लागू आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किसी भी प्रकार से होता पाया गया तो अनुशासनिक कार्यवाही की जाएगी। आदर्श आचार संहिता केंद्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों, विश्वविद्यालय, संस्थानों एवं अन्य संस्थाओं पर स्वत: लागू हो गई है।
पढ़ेंः UP Election 2022: टोपी से लेकर चाय तक के खर्च की दरें तय, जिला निर्वाचन कार्यालय ने की जारी
इस संबंध में विस्तृत जानकारी आयोग की वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है। जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया यदि कोई ऐसी आकस्मिक स्थिति उत्पन्न होती है, जिसमें आदर्श आचार संहिता का विचलन आवश्यक हो तो उस स्थिति में आयोग की अनुमति ली जाएगी। बिना अनुमति उल्लंघन पर संबंधित विभाग, निगम व संस्था के जिले में सबसे वरिष्ठतम प्रभारी तथा उनके अंतर्गत विचलन करने वाले विभागाध्यक्ष या कार्यालयाध्यक्ष की जिम्मेदारी तय की जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से प्रभावी हैं।
होर्डिंग, बैनर पर पुलिस करेगी कार्रवाई, वसूलेगी खर्च
आचार संहिता लागू होने के बाद राजनीतिक दल, संगठन, प्रत्याशी या उनके समर्थकों को किसी निजी या सरकारी संपत्ति, भवन पर पोस्टर, बैनर, कटआउट, होर्डिंग आदि लगाने व दीवारों पर प्रचार लिखवाना मना है। यदि ऐसा करते हुए कोई पाया गया तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई के साथ ही सामग्री हटवाने का खर्च भी वसूला जाएगा। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने स्पष्ट किया कि आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
पढ़ेंः बलिया में छठे, तो वाराणसी समेत पूर्वांचल के इन जिलों में आखिरी चरण में चुनाव, पढ़ें पूरी रिपोर्ट
डीएम ने बताया कि सरकारी भवन की परिभाषा में साइन बोर्ड, हाईवे पर लगे संकेत चिन्ह, पत्थर, रेलवे प्लेटफार्म पर लगे बोर्ड, रेलवे क्रासिंग पर लगे नोटिस बोर्ड भी सम्मिलित है। यह भी निर्देश दिया गया है कि कोई भी राजनीतिक दल, संगठन या कोई भी व्यक्ति संबंधित सरकारी अधिकारी या निगम, टाउन एरिया कमेटी, जिला परिषद, नगर निगम, पंचायत समिति के प्राधिकारी कोई भी कट आउट, होर्डिंग आदि प्रचार सामग्री नहीं लगायेगा और संबंधित सरकारी अधिकारी व स्थानीय निकाय के प्राधिकारी का यह दायित्व होगा कि ऐसे कटआउट, होर्डिंग आदि सड़क के किनारे, हाईवे, ट्रैफिक क्रासिंग या किसी भी सरकारी भवन या संपत्ति, बिजली या टेलीफोन के खंभों पर न लगे। यदि ऐसे कटआउट, होर्डिंग, प्रचार सामग्री लगाऐ जाते हैं तो इन्हें तत्काल संबंधित दल, संगठन या व्यक्ति के खर्चे पर हटवा दें।