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यूपी बजट 2022: पूर्वांचल के उद्यमियों को इस साल बड़ी उम्मीदें, आईआईए ने की बैठक, सरकार को दिए आठ सुझाव

Sat, 22 Jan 2022 05:57 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 22 Jan 2022 05:57 PM IST
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UP Budget 2022: Purvanchal Entrepreneurs have high hopes this year IIA held meeting gave eight suggestions to government
आईआईए उद्यमियों की बैठक। - फोटो : अमर उजाला

एक फरवरी 2022 को आने वाले बजट को लेकर वाराणसी के उद्यमियों को काफी उम्मीदें हैं। उद्यमियों ने आठ बिंदुओं पर सुझाव भी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भेजा है। शनिवार को मलदहिया स्थित विनायक प्लाजा में इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने बैठक कर बजट को लेकर चर्चा की।

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आईआईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आरके चौधरी ने कहा कि कोरोना महामारी के कहर ने सामाजिक जीवन और अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित करने के साथ-साथ ही एमएसएमई सेक्टर को भी आईसीयू में ला दिया। हालांकि सरकार की ओर से दी गई राहत से यह सेक्टर पटरी पर लौट रहा है। कुछ छूट और रियायत मिले तो उस संजीवनी से यह उद्योग रोजगार सृजन और राजस्व में अप्रत्याशित बढ़ोतरी लाएगा।

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बैठक में डॉ हेमंत गुप्ता, उमा शंकर अग्रवाल, राजेश भाटिया, नीरज पारिख, सुभाष पिपलानी, रतन कुमार सिंह, यूआर सिंह, अनुज डीडवानिया, सर्वेश अग्रवाल, जीतेन्द्र कुमार, आकाश दीप, हर्ष जैन, श्रीनारायण खेमका, शुभम अग्रवाल, राहुल मेहता, हर्षद तन्ना, बिपिन अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, दीपक कुमार बजाज, संजय गुप्ता ओपी बदलानी आदि उद्यमी मौजूद रहे।

उद्यमियों की आठ प्रमुख मांग और सुझाव- 
1- पिछड़ा क्षेत्र घोषित करके देश के अन्य पिछड़े राज्यों की तरह सभी सहूलियत एवं रियायतें देने से प्रदेश नहीं बल्कि देश के विकास में पंख लगेंगे।
2- पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने से यह सेक्टर तेजी से विकास करेगा और आम जनता को भी राहत मिलेगी।
3- ई-कॉमर्स व्यापार से विदेशी कंपनिया यहां के छोटे-छोटे कारोबारियों को खत्म करने की साजिश रच रही हैं, इन कंपनियों द्वारा 5000-6000 करोड़ रुपये का घाटा देकर भी अपना व्यवसाय बढ़ाना एक प्रश्न ही नहीं बल्कि चिंता की बात है। समय रहते इन पर तत्काल अंकुश लगा कर छोटे, खुदरा व्यापार को बचाना अति आवश्यक है।

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4- पूर्वांचल में 15 से ज्यादा जीआई उत्पाद के साथ-साथ यहां की उद्यमिता के कारण अधिक निर्यात की अपार संभावनाए हैं, यह सेक्टर लैंड लॉक्ड एरिया होने के कारण यहां से निर्यात किए जाने वाले सामानों पर फ्रेट सब्सिडी दिए जाने से यहां निर्यात कई गुना बढ़ेगा। निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा पूर्व में दी गई सभी रियायतें एक-एक कर वापस ले ली गईं। जैसे एमईआईएस स्कीम व ब्याज में छूट आदि, इन्हें फिर बहाल करने से प्रदेश का निर्यात और अधिक बढ़ जाएगा।
5- कॉर्पोरेट सेक्टर के समान आयकर की दरें पार्टनरशिप एवं प्रोपराइटरशिप पर लागू किया जाना न्याय संगत ही नहीं बल्कि व्यवसाय को बढ़ाने में मदद करेगा।
6- जीएसटी आर-वन की लेट फाईलिंग का नुकसान रेगुलर टाइम पर जीएसटी फाइल करने वाले उद्यमी को आईटीसी क्रेडिट नहीं मिलने के कारण उठाना पड़ रहा है, और कार्यशील पूंजी भी टैक्स के रूप में फंस रही है। यह कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है, इसे पहले की तरह किए जाने से रेगुलर जीएसटी फाइल करने वाले उद्यमी का मनोबल बना रहेगा और कार्यशील पूंजी नहीं फंसेगी।
7- एमएसएमई को आज बड़े उद्योगों के समक्ष प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए पूर्व में एक्साइज ड्यूटी में छूट के समान ही जीएसटी में कोई प्राविधान करने की आवश्यकता है, जिससे हर सेक्टर का तीव्र विकास रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण होगा।
8- 1 अप्रैल 2022 से ईंट पर 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत जीएसटी लागू करने का प्राविधान किया जा रहा है, इसे लागू नहीं किया जाए।

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