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Varanasi News: गांव में युवाओं को एकजुट करके दे रहे प्रशिक्षण, खेल में बना रहे पारंगत

Tue, 10 Jan 2023 05:30 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 10 Jan 2023 05:30 AM IST
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Uniting the youth in the village, giving training, becoming well versed in sports
मछलीशहर के बरहता गांव में बुमरैंग के अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ी प्रशिक्ष के दौरान खिलाडियों के सा? - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। कुछ नया करने का जुनून ही युवाओं की पहचान है। बूमरैंग का नाम जिले में कोई नहीं जानता था तब जौनपुर के खिलाड़ी ने जयसिंह यादव ने फ्रांस में जाकर न सिर्फ इस खेल में अपना दमखम दिखाया बल्कि पूरी टीम ही खड़ी कर दी।
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बूमरैंग एक तरह का अस्त्र है, जिसका इस्तेमाल युद्ध और शिकार करने के लिए किया जाता था। आस्ट्रेलिया के आदिवासी आज भी शिकार करने में इसका इस्तेमाल करते हैं। ऑस्ट्रेलिया में इसकी 52 राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं हो चुकी हैं। यह चक्र की तरह होता है, जिसको फेंककर लक्ष्य भेदने के बाद वापस पकड़ना होता है।
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जय सिंह यादव क्रिकेटर बनना चाहते थे। मछलीशहर के बरहता में जन्मे जयसिंह ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई प्रतापगढ़ से की और फैजाबाद से स्नातक व बीपीएड किया। वर्ष 2009 में उनका चयन सहायक अध्यापक के रूप में हो गया। जीवन की इस आपाधापी में क्रिकेट पीछे छूट गया। उन्होंने बूमरैंग को अपना अस्त्र बना लिया। फ्रांस में 15 अगस्त को होने वाली प्रतियोगिता में हिस्सा लेन वाली भारतीय टीम में उनका चयन हुआ। बूमरैंग विश्व चैंपियनशिप के लिए खेल मंत्रालय ने यात्रा खर्च नहीं दिया। उन्होंने पेरिस के लिए 80 हजार रुपये का टिकट खरीदा और वहां से बस से बोर्डेक्स पहुंचे। इस प्रतियोगिता में भारतीय टीम ने पहली ही बार में छठवां स्थान हासिल किया था।
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गांव में युवाओं को दे रहे प्रशिक्षण
फ्रांस से लौटने के बाद जय सिंह ने बूमरैंग फेडरेशन क्लब का गठन करके गांव की ऊसर भूमि पर युवकों को प्रशिक्षण देना शुरू किया। टीम 10 से 27 साल के उम्र के खिलाड़ी हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के कुछ शिक्षक भी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों की संख्या 30 के करीब हो चुकी है। उन्होंने आस्ट्रेलिया से 25 हजार रुपये खर्च करके दस बूमरैंग मंगवाए तो कस्टम ने पकड़ लिया। वहां कर चुकाने के बाद उनको लाना पड़ा। जय सिंह क्रिकेट, फुटबाल व खो-खो का प्रशिक्षण भी शुरू करने की तैयारी में है।

बूमरैंग से वर्ष 2018 में हुआ जुड़ाव
वर्ष 2018 में इनकी मुलाकात बूमरैंग के कोच विवेक मांट्रोज से हुई। हरियाणा के फरीदाबाद में प्रशिक्षण लेने के बाद यह लगातार घर पर अभ्यास करते रहे। ट्रायल में बेहतर खेल को देखते हुए इनका चयन नवंबर 2021 में तमिलनाडु में आयोजित नेशनल बूमरैंग प्रतियोगिता में हुआ। इसके बाद इन्होंने मई 2022 में इंटर स्टेट टूर्नामेंट खेला, जिसमें गोल्ड जीता।
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