काशी का अद्वितीय साज-श्रृंगार शुरू: शहीदों की याद में मोक्षदायिनी के गले में सजीं आकाशदीपों की लड़ियां
काशी के नभमंडल में रविवार की शाम बांस की टोकरियों में आकाशदीप जगमगाने लगे। एक ओर शरद पूर्णिमा की चांदनी चटख हुई और दूसरी ओर शीतला घाट पर शहीदों की याद में बांस के पोरों पर आकाशदीप जलने शुरू हुए।
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शरद पूर्णिमा को सांझ ढलते ही काशी का अद्वितीय साज-श्रृंगार शुरू हो गया। शरद पूर्णिमा के चांद की किरणों की रश्मियां जैसे ही गंगा की लहरों पर बिखरीं वैसे ही आकाशदीप भी टिमटिमा उठे। परलोक के पुण्यपथ की राह को आलोकित करने के लिए मास पर्यंत जलने वाले आकाशदीप का श्रीगणेश रविवार की शाम को हुआ।
पुलिस और पीएसी के शहीद जवानों की स्मृति और उनके पुण्यपथ की राह को दीयों की रोशनी से रोशन करने के लिए गंगोत्री सेवा समिति की ओर से आयोजन आरंभ हुआ। तीर्थ पुरोहितों के अलावा महिलाएं, बच्चे गंगा घाटों की सीढ़ियां उतरे। डेलियों में दीप जलाकर बांस के पोरों पर रस्सी के सहारे खींचे जाने लगे।
रविवार को दशाश्वमेध घाट पर गंगा के पश्चिमी तट पर बांस के स्तंभ पर श्रद्धा और नमन के डोर से बंधी बांस की टोकरियों में टिमटिमाते दीपों को अनंत आकाश में स्थापित किया गया। गंगोत्री सेवा समिति की ओर से पुलिस और पीएसी के उन वीर जवानों का इस वर्ष भी नमन करते हुए जो अपने कर्तव्य की राह पर आकस्मिक निधन को प्राप्त शहीद कर्मवीर जवानों की आत्मिक शांति के निमित आकाशदीप प्रज्ज्वलित हुए।
बैंड के धुन पर गूंजा राष्ट्रगान
आयोजन की शुरुआत में मंगलाचरण के साथ समाज के विभिन्न वर्ग के अतिथियों द्वारा वीरों को नमन किया गया। शांति पाठ के बीच 34वीं वाहिनी पीएसी बटालियन भुल्लनपुर के बैंड की धुन से उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद पांच ब्राह्मणों द्वारा मां गंगा का षोडशोचार पूजन हुआ।
मां गंगा की धारा में 101 दीप प्रवाहित हुए। इस दौरान गंगोत्री सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष पं. किशोरी रमन दुबे, अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी, आयुषमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, एसीपी दशाश्वमेध अवधेश पांडेय, डॉ. रितु गर्ग आदि मौजूद रहे।
50 दिन बाद दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती
गंगा में आई बाढ़ के कारण विश्व प्रसिद्ध मां गंगा की आरती 50 दिनों के बाद रविवार को भव्य रूप से विधिवत पूजन-अर्चन और के साथ हुई। बढ़े जलस्तर कारण 20 अगस्त से एक अर्चक द्वारा गंगा सेवा निधि कार्यालय की छत पर आरती हो रही थी। लेकिन अब घाट साफ होने के बाद रविवार को पहली बार सात अर्चकों द्वारा गंगा की आरती की गई। इस दौरान देश-विदेश से गंगा आरती देखने पहुंचे श्रद्धालुओं को भी सुखद अहसास हुआ।