Varanasi: भट्ठे पर चिमनी से सटी ईंट की दीवार गिरी, दबकर दो महिलाओं की मौत, दो गंभीर रूप से घायल
वाराणसी के गोंसाईपुर स्थित ईंट भट्ठे में चिमनी के पास खड़ी ईंट की दीवार अचानक गिर गई। चपेट में आने से दो महिलाओं की मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल दो महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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विस्तार
वाराणसी के बड़ागांव थाना क्षेत्र से गुरुवार शाम एक दर्दनाक खबर सामने आई। गोसाईपुर अनौरा गांव में ईंट-भट्ठे की चिमनी से दीवार ढहने से मलबे में दबकर दो महिलाओं की मौत हो गई। वहीं, दो महिलाएं घायल हैं। बताया जा रहा है कि महिलाएं कोयला उठाने गई थीं। इसी बीच हादसा हो गया। घटना के बाद जिलाधिकारी व पुलिस के आला अफसर पहुंचे। घायल महिलाओं को अस्पताल भेजवाया गया। साथ ही जेसीबी की मदद से मलबे में दबी महिलाओं को बाहर निकाला गया।
बड़ागांव थाना क्षेत्र के भगतुपुर गांव की रहने वाली माला देवी (45) और लालमनी देवी (65) बृहस्पतिवार की शाम साढ़े चार बजे अपने घर से करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित ईंट-भट्ठे से कोयला एकत्रित करने गई थीं। उस समय भट्ठे से ईंट की निकासी भी हो रही थी। भट्ठे की चिमनी के पास ही लालमनी और माला देवी कोयला एकत्रित कर रही थीं।
दीवार गिरते ही मौके पर मची अफरातफरी
इसी बीच ईंटों की दीवार भरभराकर ऊपर ही गिर पड़ी। वहीं मौजूद जौनपुर के सिकरारा की रीता और छत्तीसगढ़ की रहने वाली राधिका चपेट में आईं और मलबे के नीचे दब गईं। इससे अफरातफरी मच गई। ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले और लोगों ने मलबा हटाना शुरू किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। सूचना पाकर दोनों महिलाओं के परिजन भी आ गए।
बड़ागांव पुलिस ने राहत-बचाव कार्य तेज कराया। जेसीबी की मदद से मलबा हटवाया गया। तब पता चला कि मलबे में चार महिलाएं दबी हैं। कुछ देर में रीता और राधिका को मलबे से निकालकर अस्पताल भेजवाया गया। दोनों का इलाज चल रहा है। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद माला व लालमनी को मलबे से बाहर निकाला जा सका। बताया जा रहा है कि मलबे से बाहर निकालने से पहले ही दोनों महिलाओं ने दम तोड़ दिया था।
...तो हो जाता बड़ा हादसा
ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि गांव की तमाम महिलाएं रोजाना भट्ठे पर कोयला लेने आती हैं। बृहस्पतिवार को भी महिलाएं आई थीं। भट्टे पर मौजूद कर्मचारियों ने महिलाओं को मना किया था। इसके बावजूद नहीं मानीं और कोयला निकालने के लिए भट्ठे की चिमनी से सटकर ईंट पकाने के लिए बनाए गए रैंप के पास चली गईं। इसी बीच पास ही बनी ईंटों की दीवार ढह गई। इससे महिलाएं मलबे में दब गईं। चिमनी के पास अक्सर मजदूर रहते हैं, लेकिन उस वक्त नहीं थे। अगर मजदूर होते तो बड़ा हादसा हो सकता था।
चिमनी का निर्माण पुराना
घटनास्थल पर जिलाधिकारी एस राजलिंगम व पुलिस के अधिकारियों ने सिगरा निवासी ईट भट्ठा मालिक अमर प्रद्धवानी से चिमनी निर्माण के वर्ष के बारे में जानकारी ली। इसका स्पष्ट जवाब भट्ठा मालिक नहीं दे सके। आसपास के लोगों ने बताया कि चिमनी का निर्माण पुराना है। ।
कोयला बेचकर कमाती हैं पैसा
मृत लालमनी देवी के चार बेटे हैं। तीन बेटे मजदूरी करते हैं, जबकि बड़े बेटे गुलाब राम भगतुपुर गांव के प्रधान रह चुके हैं। वहीं, माला देवी के पति नंदा राम मजदूरी करते हैं। उनकी दो बेटियां और दो बेटे हैं, जो अभी छोटे हैं। पूर्व ग्राम प्रधान हंसराज यादव ने बताया कि जला कोयला एकत्रित करके महिलाएं बेचती हैं। इसी लालच में महिलाएं भट्ठे तक जाती हैं।
कोयला एकत्र करके उसे चाय की दुकानों पर बेचती हैं। दोनों महिलाओं के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। घटनास्थल पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों मृत महिलाओं के परिजनों को उचित सरकारी मदद दिलाने का आश्वासन दिया है।