{"_id":"582f653f4f1c1bf23c8ffc08","slug":"two-pacemakers-sell-illegally-caught","type":"story","status":"publish","title_hn":"अवैध रूप से पेसमेकर बेचते दो पकड़े गए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अवैध रूप से पेसमेकर बेचते दो पकड़े गए
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 19 Nov 2016 02:01 AM IST
विज्ञापन
बीएचयू
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में शुक्रवार को अवैध रूप से पेसमेकर बेचते एक कंपनी से जुड़े दो युवकों को पकड़ा गया। मामला तब सामने आया, जब पेसमेकर का भुगतान मरीज का परिजन पांच सौ तथा एक हजार रुपये के नोट में करने लगा। युवकों के मना करने पर परिजन ने चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय से शिकायत की।
सूचना पर पहुंची प्राक्टोरियल बोर्ड की टीम ने युवकों को कैथ लैब से पकड़कर लंका पुलिस को सौंप दिया। युवकों के खिलाफ तहरीर दी गई है। चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि अस्पताल में कोई बाहरी आकर दवा व चिकित्सकीय उपकरण बेचे, मामला गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन अपने स्तर से भी इस पर कार्रवाई करेगा।
गाजीपुर की शांति देवी का इलाज डॉ. ओमशंकर के निर्देशन में चल रहा है। शुक्रवार को उन्हें पेसमेकर लगाया गया है। परिजन विजय कुमार का कहना है कि पेसमेकर उन्होंने अस्पताल में ही एक कंपनी के प्रतिनिधि से 63 हजार रुपये में खरीदा था। चूंकि अस्पताल में पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट लेने का आदेश है, इसलिए युवकों के पुराने नोट लेने से मना करने पर उन्होंने शिकायत की। चीफ प्राक्टर प्रो. ओएन सिंह ने भी इनसे पूछताछ की।
विज्ञापन
विज्ञापन
सूचना पर पहुंची प्राक्टोरियल बोर्ड की टीम ने युवकों को कैथ लैब से पकड़कर लंका पुलिस को सौंप दिया। युवकों के खिलाफ तहरीर दी गई है। चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि अस्पताल में कोई बाहरी आकर दवा व चिकित्सकीय उपकरण बेचे, मामला गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन अपने स्तर से भी इस पर कार्रवाई करेगा।
विज्ञापन
गाजीपुर की शांति देवी का इलाज डॉ. ओमशंकर के निर्देशन में चल रहा है। शुक्रवार को उन्हें पेसमेकर लगाया गया है। परिजन विजय कुमार का कहना है कि पेसमेकर उन्होंने अस्पताल में ही एक कंपनी के प्रतिनिधि से 63 हजार रुपये में खरीदा था। चूंकि अस्पताल में पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट लेने का आदेश है, इसलिए युवकों के पुराने नोट लेने से मना करने पर उन्होंने शिकायत की। चीफ प्राक्टर प्रो. ओएन सिंह ने भी इनसे पूछताछ की।
विज्ञापन