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मासूम पर दो ने जताया हक, बाल कल्याण समिति करेगी फैसला
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वाराणसी। मंडुवाडीह थाने में रविवार को एक मासूम पर दो लोगों ने अपना हक जताया। इसको लेकर घंटों पंचायत हुई। बात नहीं बनी तो पुलिस ने बच्चे को बाल कल्याण समिति शिवपुर भेज दिया। अब सोमवार को समिति के जरिए बच्चे को लेकर फैसला होगा। बच्चे के पिता और बच्चे का पालन पोषण करने वाली महिला ने अपना-अपना हक मासूम पर जताया है।
दरअसल, लहरतारा महेशपुर निवासी राहुल की पत्नी ने तीन साल पूर्व एक बेटे को जन्म दिया। इसके बाद पत्नी की कैंसर से मौत हो गई। बच्चे के पालन पोषण की समस्या को देखते राहुल ने महेशपुर निवासी मित्र रिंकू के बड़े भाई को दे दिया। कुछ दिन बाद रिंकू की भाभी ने बच्चे को लेकर मुंबई चली गई। इस बीच राहुल ने एक या दो बार बच्चे की मांग रिंकू से की थी। वहीं रिंकू और उसके भाई में थोड़ी अनबन हुई तो रिंकू बच्चे को लेकर बनारस चला आया और राहुल को सौंप दिया। इसके बाद रविवार को बनारस पहुंचे पालक माता-पिता ने बच्चे को पाने की गुहार मंडुवाडीह पुलिस से लगाई। मूल पिता और पालने वाले माता-पिता की बात को सुनते हुए मंडुवाडीह थानाध्यक्ष राजीव सिंह ने मासूम बेटे को बाल कल्याण समिति को सौंपा। थानाध्यक्ष राजीव सिंह ने बताया कि सोमवार को समिति के समक्ष दोनों को बुलाया गया है, वहीं तय होगा। मासूम बेटे के असली पिता ने तीन साल में एक या दो बार संपर्क किया, वहीं बेटा उसे पहचानता तक नहीं है। पालने वाले माता-पिता के साथ ही बेटा सहज महसूस कर रहा है।
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दरअसल, लहरतारा महेशपुर निवासी राहुल की पत्नी ने तीन साल पूर्व एक बेटे को जन्म दिया। इसके बाद पत्नी की कैंसर से मौत हो गई। बच्चे के पालन पोषण की समस्या को देखते राहुल ने महेशपुर निवासी मित्र रिंकू के बड़े भाई को दे दिया। कुछ दिन बाद रिंकू की भाभी ने बच्चे को लेकर मुंबई चली गई। इस बीच राहुल ने एक या दो बार बच्चे की मांग रिंकू से की थी। वहीं रिंकू और उसके भाई में थोड़ी अनबन हुई तो रिंकू बच्चे को लेकर बनारस चला आया और राहुल को सौंप दिया। इसके बाद रविवार को बनारस पहुंचे पालक माता-पिता ने बच्चे को पाने की गुहार मंडुवाडीह पुलिस से लगाई। मूल पिता और पालने वाले माता-पिता की बात को सुनते हुए मंडुवाडीह थानाध्यक्ष राजीव सिंह ने मासूम बेटे को बाल कल्याण समिति को सौंपा। थानाध्यक्ष राजीव सिंह ने बताया कि सोमवार को समिति के समक्ष दोनों को बुलाया गया है, वहीं तय होगा। मासूम बेटे के असली पिता ने तीन साल में एक या दो बार संपर्क किया, वहीं बेटा उसे पहचानता तक नहीं है। पालने वाले माता-पिता के साथ ही बेटा सहज महसूस कर रहा है।
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