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Varanasi News: मानहानि केस में दो चिकित्सकों ने दर्ज कराया बयान, अगली सुनवाई 17 जनवरी को
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संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। सिविल जज जूनियर डिवीजन (सप्तम) जयति की अदालत में सोमवार को मानहानि के मामले में रामपुर के मुख्य चिकित्साधिकारी समेत चार डॉक्टरों के खिलाफ दाखिल परिवाद पर सुनवाई हुई। अदालत में दो डॉक्टरों ने अपने बयान दर्ज कराए। अदालत ने शेष विपक्षियों को तलब करने के लिए अगली सुनवाई की तिथि 17 जनवरी नियत की है। यह परिवाद वॉयस ऑफ आयुर्वेद संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. शैलेश कुमार राय की ओर से दाखिल किया गया है। परिवाद में रामपुर की सीएमओ डॉ. दीपा सिंह, डॉ. एसएस झा, डॉ. सत्यमूर्ति तोमर और डॉ. मृदुनिका सिंह को विपक्षी बनाया गया है। परिवादी की ओर से अदालत को बताया गया कि रामपुर की सीएमओ ने बिना क्षेत्राधिकार और शासनादेश के विपरीत, वॉयस ऑफ आयुर्वेद के सदस्य डॉ. आफाक और डॉ. नाजरीन के संबंध में जांच टीम गठित कर जांच शुरू कर दी। संगठन की ओर से जांच रोकने के लिए पत्र भी दिया गया, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि मनमाने तरीके से जांच रिपोर्ट जारी कर दी गई।परिवाद में कहा गया है कि जांच रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी (बीयूएमएस) डिग्रीधारी डॉक्टर भारत में कानूनी रूप से गर्भपात नहीं करा सकते, क्योंकि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम केवल एलोपैथिक (एमबीबीएस) डॉक्टरों को ही अनुमति देता है। जबकि परिवादी का दावा है कि एमटीपी अधिनियम के तहत एलोपैथिक के साथ-साथ आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध पद्धति के योग्य चिकित्सकों को भी गर्भपात करने का कानूनी अधिकार है। परिवादी के अनुसार, इस कथित मिथ्या बयान के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने से आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सकों की प्रतिष्ठा, उनकी प्रैक्टिस और जन-विश्वास को गहरा आघात पहुंचा है। इससे संगठन की साख को भी नुकसान हुआ और लगभग 25 लाख रुपये की क्षति हुई है।
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वाराणसी। सिविल जज जूनियर डिवीजन (सप्तम) जयति की अदालत में सोमवार को मानहानि के मामले में रामपुर के मुख्य चिकित्साधिकारी समेत चार डॉक्टरों के खिलाफ दाखिल परिवाद पर सुनवाई हुई। अदालत में दो डॉक्टरों ने अपने बयान दर्ज कराए। अदालत ने शेष विपक्षियों को तलब करने के लिए अगली सुनवाई की तिथि 17 जनवरी नियत की है। यह परिवाद वॉयस ऑफ आयुर्वेद संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. शैलेश कुमार राय की ओर से दाखिल किया गया है। परिवाद में रामपुर की सीएमओ डॉ. दीपा सिंह, डॉ. एसएस झा, डॉ. सत्यमूर्ति तोमर और डॉ. मृदुनिका सिंह को विपक्षी बनाया गया है। परिवादी की ओर से अदालत को बताया गया कि रामपुर की सीएमओ ने बिना क्षेत्राधिकार और शासनादेश के विपरीत, वॉयस ऑफ आयुर्वेद के सदस्य डॉ. आफाक और डॉ. नाजरीन के संबंध में जांच टीम गठित कर जांच शुरू कर दी। संगठन की ओर से जांच रोकने के लिए पत्र भी दिया गया, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि मनमाने तरीके से जांच रिपोर्ट जारी कर दी गई।परिवाद में कहा गया है कि जांच रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी (बीयूएमएस) डिग्रीधारी डॉक्टर भारत में कानूनी रूप से गर्भपात नहीं करा सकते, क्योंकि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम केवल एलोपैथिक (एमबीबीएस) डॉक्टरों को ही अनुमति देता है। जबकि परिवादी का दावा है कि एमटीपी अधिनियम के तहत एलोपैथिक के साथ-साथ आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध पद्धति के योग्य चिकित्सकों को भी गर्भपात करने का कानूनी अधिकार है। परिवादी के अनुसार, इस कथित मिथ्या बयान के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने से आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सकों की प्रतिष्ठा, उनकी प्रैक्टिस और जन-विश्वास को गहरा आघात पहुंचा है। इससे संगठन की साख को भी नुकसान हुआ और लगभग 25 लाख रुपये की क्षति हुई है।