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UP: सेवानिवृत्त दरोगा से 5.50 लाख की धोखाधड़ी में वाराणसी से दो अरेस्ट, सरगना की तलाश; बनाई थी फर्जी वेबसाइट

Sat, 06 Dec 2025 06:29 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 06 Dec 2025 06:29 AM IST
सार

Varanasi Crime: पुलिसकर्मी के साथ धोखाधड़ी मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों के पास से 10 हजार रुपये और मोबाइल बरामद हुए हैं। उनके आपराधिक रिकाॅर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।

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Two arrested from Varanasi for defrauding retired sub-inspector mastermind still large created fake website
वाराणसी में पुलिस ने की कार्रवाई। - फोटो : Freepik

विस्तार

Varanasi News: गूगल पर बैंकों की फर्जी वेबसाइट बनाकर धोखाधड़ी करने वाले अंतरराज्यीय दो साइबर अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस को उनके सरगना की तलाश है। आरोपियों ने एक सेवानिवृत्त दरोगा के खाते से 5.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी की थी। पुलिस की जांच में आरोपियों के कई लोगों को ठगी का शिकार बनाकर करीब 25 से 30 लाख की धोखाधड़ी की है।

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सदर कोतवाली क्षेत्र के सादीपुर खुर्द निवासी नवाब आलम सेवानिवृत्त दरोगा हैं। उनके दो बैंक खातों से 28 अप्रैल को 5.50 लाख रुपये दो बार में साइबर अपराधियों ने निकाले थे। साइबर पुलिस ने 19 जून को प्राथमिकी दर्ज की थी।
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इसी मामले में साइबर पुलिस ने बृहस्पतिवार को वाराणसी जिले के टेंगरा मोड़ बाईपास रामनगर सोनभद्र गांव से मिर्जापुर जिला चुनार थाने के भवानीपुर निवासी प्रिंस पटेल और सोनभद्र जिला पिपरी थाने के तुर्रा लंका काॅलोनी निवासी कुनाल यादव को गिरफ्तार किया है। पुलिस शुक्रवार को दोनों को थाने लेकर आई। साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों से दो फोन और 10 हजार रुपये बरामद किए हैं।

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आरोपी प्रिंस पटेल और कुनाल यादव एक दूसरे के पूर्व परिचित हैं। वाराणसी में किराये के कमरे में एक साथ रहते हैं। दोनों ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए झारखंड प्रांत धनबाद निवासी शराफत के माध्यम से गूगल पर बैंकों की वेबसाइट बनाते हैं। उनके लिंक वेबसाइट में डालते हैं।

वह ट्रेडिंग का झांसा व रुपयों का लालच देकर अलग-अलग बैंको में लोगों के खाता खुलवाते हैं। उनके बैंक पासबुक, मोबाइल, सिमकार्ड, डेबिट कार्ड जारी कराने के बाद कूरियर से धनबाद भेजते हैं।

आरोपियों ने पिछले करीब एक साल में इस तरह से करीब 15 लोगों के फर्जी खातों में धोखाधड़ी में इस्तेमाल किया है। पकड़े जाने वालों ने कबूला कि मास्टरमाइंड शराफत को वह पहचानते नहीं है। उनका काम सिर्फ खाते खुलवाना रहता है। बदले में उन्हें रुपये मिलते हैं।

ठगी के लिए किराए पर ले रखा था कमरा
पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों ने वाराणसी में ऑनलाइन ठगी के लिए किराये का कमरा लिया था। कमरे से ही वह सारा नेटवर्क सरगना के कहने पर संचालित करते थे। आरोपी प्रिंस मिर्जापुर जिले में आईआईटी का छात्र है। उसका साथी कुनाल यादव इंटर पास है। दोनों पूर्व परिचित है। पुलिस दोनों शराफत के संपर्क में कैसे आए। पुलिस इसका पता लगाने में जुटी है। व्हाट्सएप चैट, आईपी एड्रेस के जरिये शराफत तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है।

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