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स्वर-लय के खेल में टूटीं कई बंदिशें

Thu, 09 Apr 2015 02:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी Updated Thu, 09 Apr 2015 02:44 AM IST
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Tutin in tone and rhythm of the game restrictions
संकट मोचन संगीत समारोह में स्वर और लय का ऐसा मेल जमा कि सारी बंदिशें और सरहदें टूटती चली गईं। बुधवार को पहली निशा में संगीत जगत के दिग्गजों ने अपने अनुभव से उम्र को मात दे दी। कुछ ऐसा हुआ कि धर्म, भाषा, भूगोल की सरहदें लांघता हुआ स्वर दिल और दिमाग पर छाता चला गया।
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संगीत प्रेमी भी इस कदर उमड़े कि समारोह के इतिहास में ऐसी भीड़ कभी नहीं हुई। बिरजू महाराज, हरिप्रसाद चौरसिया गुलाम अली, अमजद अली खान, डा. विश्वनाथ जैसे दिग्गज कलाकार ने ऐसी सुरलहरी बिखेरी कि रस में गोता लगाते रसिकों को पता ही नहीं चला कब रात ढलती चली गई और कब भोर ने दस्तक दे दी। शुरुआत पं. बिरजू महाराज के कथक से हुई। 
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समारोह की शुरूआत पंडित बिरजू महाराज के कथक  से हुई। आंगिक चेष्टाओं और भाव-भंगिमा से उन्होंने सब कुछ कह दिया। ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की व्याख्या कर डाली। ‘मंगल मूरत मारुति नंदन’ भजन पर भाव नृत्य किया। पं. बिदा दीन महाराज के कुल तिलक और बनारस बाज तबले घराने के महापुरुष राम सहाय के कुल तिलक संजू सहाय के बीच जबरदस्त लग्घी-लढ़ी चली।
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घुंघरू और तबले की नोकझोंक और संवाद ने सबको कायल बना दिया। घोंसले से निकलकर चिड़ियों के दाना चुगने और मयूर की गत पर तो लोग तालियां बजाते रहे। सूरदास के पद ‘उधो मोहि ब्रज बिसरत नाहीं’ पर भाव नृत्य के बाद आपने कार्यक्रम को विराम दिया। उनके साथ दीपक महाराज ने आमद और उपज की प्रस्तुति दी। तबले पर प्रांशु चतुरलाल ने भी साथ दिया। गायन अनिर्वान भट्टाचार्या, सारंगी पर संतोष मिश्र और सितार पर ध्रुव नाथमिश्र ने संगत की।

इनके बाद पंडित हरिप्रसाद चौरिसया मंच पर आए। उन्होंने बांसुरी पर अपने प्रिय राग राग दुर्गा की अवतारणा की। अलाप और जोड़ के बाद उन्होंने छोटी-छोटी कई बंदिशे बजाई। राग दुर्गा बजाते समय उन्होंने कहीं-कहीं पहाड़ी की भी छौंक लगाई। इनके साथ बासुरी पर विवेक सोनार ने सहयोग किया। तबले पर शुभंकर बनर्जी,  पखावज पर भवानी शंकर ने संगत की। इसके बाद डॉ. विश्वनाथ ने राग मधुकौंस सुनाया।


समारोह के दौरान सुरक्षा के भी कड़े प्रबंध नजर आए। चप्पे-चप्पे पर निगरानी की जा रही थी। गजल गायक गुलाम अली सहित कई बड़ी शख्सियतों को सुनने के लिए मंदिर परिसर से बाहर तक भीड़ उमड़ी रही। कई थानों की पुलिस और पीएसी के जवान पर चप्पे-चप्पे पर तैनात रहे।
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