{"_id":"6282dcddcf4d1027a83a25bf","slug":"truth-of-finding-ruins-of-hindu-temples-came-to-the-fore-in-commission-proceedings-held-26-years-ago-in-the-gyanvapi-campus","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gyanvapi Survey: 26 साल पहले भी कमीशन की कार्यवाही में सामने आया था सच, प्राचीन मंदिर के भग्नावशेष मिलने का था दावा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gyanvapi Survey: 26 साल पहले भी कमीशन की कार्यवाही में सामने आया था सच, प्राचीन मंदिर के भग्नावशेष मिलने का था दावा
Tue, 17 May 2022 07:47 AM IST
Vikas Kumar
शशांक मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी
शशांक मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 17 May 2022 07:47 AM IST
सार
न्यायालय में पेश उनकी रिपोर्ट में साफ तौर पर मस्जिद परिसर में प्राचीन मंदिर के भग्नावशेष मिलने का दाव किया गया था। इसके साथ ही परिसर के पूरब तट पर हनुमान प्रतिमा, गंगा व गंगेश्वर मंदिर की भी पुष्टि की गई थी।
विज्ञापन
काशी विश्वनाथ मंदिर से सटा ज्ञानवापी मस्जिद।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ज्ञानवापी परिसर में 26 साल पहले हुई कमीशन की कार्यवाही में हिंदू मंदिरों के भग्नावशेष मिलने का सच सामने आया था। सिविल जज की अदालत में दर्ज एंसिएंट आइडल स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर व अन्य के वाद में भी न्यायालय ने विशेष अधिवक्ता आयुक्त के तौर पर राजेश्वर प्रसाद सिंह को नियुक्त किया था।
विज्ञापन
न्यायालय में पेश उनकी रिपोर्ट में साफ तौर पर मस्जिद परिसर में प्राचीन मंदिर के भग्नावशेष मिलने का दाव किया गया था। इसके साथ ही परिसर के पूरब तट पर हनुमान प्रतिमा, गंगा व गंगेश्वर मंदिर की भी पुष्टि की गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर वर्ष 2019 में न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को रडार तकनीक से सर्वे का आदेश दिया था। हालांकि इस मामले में उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
दरअसल, अदालत में दर्ज एंशिएंट आइडल स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर व अन्य के वाद में 27 जुलाई 1996 को न्यायालय ने कमीशन की कार्यवाही का आदेश जारी करते हुए राजेश्वर प्रसाद सिंह को विशेष अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त किया था। इसमें कमीशन की ओर से दर्ज रिपोर्ट में साफ किया गया था कि विवादित स्थल के चारों तरफ प्राचीन काल की निर्मित पुस्ती को दिखाया गया, जो प्राचीन मंदिर का अवशेष देखने से प्रतीत हो रहा है। पूरब तरफ एक बड़ा चबूतरा है और पश्चिमी ओर मंदिर के भग्नावशेष मौजूद हैं, जो काफी उत्साहवर्धक है। पश्चिम तरफ मंदिर के भग्नावशेष के तीन दरवाजों को बंद करके चुन दिया गया है और भग्नावशेष के ऊपर मस्जिद नुमा ढांचा निर्मित है।
इस रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि भग्नावशेष के पश्चिम तरफ प्राचीन मंदिर के भग्नावशेष का ढेर है, जो बड़े चबूतरे में रूप में स्थित है। इस मामले में तत्कालीन विशेष अधिवक्ता आयुक्त ने वादीगण के अधिवक्ताओं के गणेश, शृंगार गौरी व मोदीश्वर देवतान की पूजा दावे पर मुहर लगाई थी। इसके साथ पूरब परिक्रमा पथ से हटकर हनुमान जी प्रतिमा व मंदिर, गंगा देवी व गंगेश्वर मंदिर के मौजूद रहने का जिक्र किया था।