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Varanasi News: भारतीय संस्कृति वेद, तंत्र एवं योग की त्रिवेणी
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भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन कर हम एक बार फिर बन सकते हैं विश्वगुरु
संस्कृत विवि में आंबेडकर जयंती और जी-20 पर संगोष्ठी का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। बीएचयू के प्रो. विमलेंद्र कुमार ने कहा कि डॉ. आंबेडकर सामाजिक समानता और समरसता के प्रणेता थे। उन्होंने वंचितों के उत्थान का संकल्प लेकर उन्हें सामाजिक प्रतिष्ठा एवं समानता का अधिकार दिलाया। हिंदू समाज में छुआछूत, भेदभाव, अस्पृश्यता को दूर करने की दिशा में उनके द्वारा किए गए समाज सुधार के कार्य अतुलनीय हैं। यही वजह है कि बाबा साहेब की जयंती को भारत में सामाजिक समरसता दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
वह रविवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के योग साधना केंद्र में आंबेडकर जयंती और जी-20 पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। भारतीय ज्ञान परंपरा सामाजिक समरसता एवं डॉ. भीमराव आंबेडकर विषयक एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि बीएचयू व्याकरण विभागाध्यक्ष प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति वेद, तंत्र एवं योग की त्रिवेणी है। ऋग्वेद को आधार मानकर ही भारतीय ज्ञान परंपरा का उदय हुआ है। भारतीय दृष्टिकोण से ही ज्ञान परंपरा का अध्ययन कर हम एक बार फिर विश्व गुरु बन सकते हैं। विभिन्न संस्कृति और परंपरा के लोगों के बीच की घनिष्ठता ने भारत को बनाया है। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि डॉ. आंबेडकर के जीवन में सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामया की परिकल्पना नजर आती है। इस दौरान प्रो. हरप्रसाद दीक्षित, इंग्लैंड की डॉ. लूसी गेस्ट, स्पेन की मारिया रुईज, ईशा बेल, प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. सुधाकर मिश्र आदि ने विचार व्यक्त किए।
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संस्कृत विवि में आंबेडकर जयंती और जी-20 पर संगोष्ठी का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। बीएचयू के प्रो. विमलेंद्र कुमार ने कहा कि डॉ. आंबेडकर सामाजिक समानता और समरसता के प्रणेता थे। उन्होंने वंचितों के उत्थान का संकल्प लेकर उन्हें सामाजिक प्रतिष्ठा एवं समानता का अधिकार दिलाया। हिंदू समाज में छुआछूत, भेदभाव, अस्पृश्यता को दूर करने की दिशा में उनके द्वारा किए गए समाज सुधार के कार्य अतुलनीय हैं। यही वजह है कि बाबा साहेब की जयंती को भारत में सामाजिक समरसता दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
वह रविवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के योग साधना केंद्र में आंबेडकर जयंती और जी-20 पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। भारतीय ज्ञान परंपरा सामाजिक समरसता एवं डॉ. भीमराव आंबेडकर विषयक एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि बीएचयू व्याकरण विभागाध्यक्ष प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति वेद, तंत्र एवं योग की त्रिवेणी है। ऋग्वेद को आधार मानकर ही भारतीय ज्ञान परंपरा का उदय हुआ है। भारतीय दृष्टिकोण से ही ज्ञान परंपरा का अध्ययन कर हम एक बार फिर विश्व गुरु बन सकते हैं। विभिन्न संस्कृति और परंपरा के लोगों के बीच की घनिष्ठता ने भारत को बनाया है। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि डॉ. आंबेडकर के जीवन में सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामया की परिकल्पना नजर आती है। इस दौरान प्रो. हरप्रसाद दीक्षित, इंग्लैंड की डॉ. लूसी गेस्ट, स्पेन की मारिया रुईज, ईशा बेल, प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. सुधाकर मिश्र आदि ने विचार व्यक्त किए।
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