जनजातीय युवा संवाद: 10 करोड़ आदिवासियों के साथ विकसित होगा भारत, बीएचयू में विभिन्न मसलों पर चर्चा
इस संवाद में आदिवासियों को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुईं। इनके विकास काे लेकर कहा गया कि सरकारी योजनाओं की जानकारी गांव-गांव में जाकर दी जाएगी। विकसित भारत के उद्देश्य से इनकी पहचान कराई जाएगी।
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Varanasi News: बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में आयोजित जनजातीय युवा संवाद-2025 में 10 करोड़ जनजातियों को साथ लेकर विकसित भारत की योजना पर चर्चा की गई। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य निरुपम चकमा ने कहा कि आयोग के संज्ञान में आया है कि गांवों में रहने वालीं जनजातियों को भारत सरकार की योजनाओं और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के बारे में ज्यादा पता नहीं है। इनके उत्थान से विकसित भारत के उद्देश्य को हासिल करना आसान होगा।
वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय सह-युवा प्रमुख आनंद ने कहा कि गीत, संगीत, नृत्य, भाषा, परंपरा, रीति रिवाज, पुरखे, उपासना, आस्था आदि को अपने जीवन में शामिल करना होगा। अस्तित्व बचाए रखने के लिए ये जरूरी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के विजन को साकार करने के लिए 10 करोड़ जनसंख्या वाले जनजातीय समाज को साथ लेकर चलना होगा। बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि बीएचयू को विकसित बनाने में जनजातीय समाज के विद्यार्थियों, अध्यापकों और कर्मचारियों की बड़ी भूमिका रही है।
आंबेडकर ने नहीं किया आदिवासी शब्द का इस्तेमाल: आयोग के वरिष्ठ सलाहकार प्रकाश उइके ने कहा कि इस देश का हर रहवासी आदिवासी ही है। किसी भी कानून या किताब में आदिवासी शब्द का उल्लेख नहीं है।
चित्र प्रदर्शनी में राज्यों के आदिवासी नृत्य की झलकियां
कार्यक्रम में जनजातीय समाज की प्रमुख हस्तियों की चित्र प्रदर्शनी की झलक भी देखने को मिली। इसमें मिजोरम का दावोजौम लैंम नृत्य, मेघालय का लेवताना नृत्य, नागालैंड का तिखिर नृत्य, त्रिपुरा की फसल कटाई के लिए ममिता नृत्य, संतुलन और सामूहिकता का उदाहरण चकमा नृत्य, संथाली, मुंडा और उरॉव का सामूहिक नृत्य, सिक्किम का लोक नृत्य और मिणावाटी नृत्य शामिल थे।