फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Tribal society arranged frog marriage for rain people attend barat in Sonbhadra

यूपी: बारिश के लिए आदिवासी समाज ने कराई मेंढक-मेंढकी की शादी, बरात में सैकड़ों लोग हुए शामिल

Tue, 24 Aug 2021 11:34 PM IST
हरि User अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र Published by: हरि User Updated Tue, 24 Aug 2021 11:34 PM IST
सार

सोनभद्र में आदिवासी समाज श्रद्धा के साथ यह परंपरा हर वर्ष निभाते हैं। विवाह के दौरान वाद्य यंत्रों पर महिला-पुरुष खूब थिरके। बरातियों का स्वागत करते हुए उन्हें भोजन भी कराया गया। 
 

विज्ञापन
Tribal society arranged frog marriage for rain people attend barat in Sonbhadra
मेंढक-मेंढकी की शादी के लिए जुटी भीड़। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इसे अंधविश्वास कहें या कुछ और, मगर सोनभद्र में आदिवासी समाज के लिए यह एक परंपरा है। वर्षों से वह इसका निर्वहन पूरी श्रद्धा के साथ करते आ रहे हैं। इस बार भी यह परंपरा निभाई गई तो बड़ी संख्या में आदिवासी समाज इसका साक्षी बना। पूरे धूमधाम के साथ मेंढक की बरात निकाली। गांव के महिला पुरुष इसमें शामिल हुए। मेंढक दूल्हे ने दुल्हन के रूप में मेंढकी से विवाह रचाया। विदाई के बाद दोनों को तालाब में छोड़ दिया गया।

विज्ञापन


दरअसल, आदिवासी समाज में यह मान्यता है कि मेंढक और मेंढकी की शादी करने से इंद्रदेव प्रसन्न होंगे। भरपूर वर्षा होगी और धान के खेत को पानी की कमी नहीं होगी। इसी मान्यता के तहत सोनभद्र के दुद्धी क्षेत्र के आदिवासी बहुल कटौली गांव में यह आयोजन हुआ। मझौली, गोपी मोड़ सहित अन्य गांवों के महिला-पुरुष और बच्चे तालाब से लोटे में जल लेकर पूरे गांव का भ्रमण करते हुए कटौली गांव स्थित डीहवार पहुंचे। यहां दुल्हन रूप में सजी मेंढकी को हल्दी लगाई गई। 
विज्ञापन


बरातियों को कराया भोजन

विज्ञापन
विज्ञापन


आदिवासी परंपरा के अनुसार मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया गया। इस दौरान वाद्य यंत्रों पर महिला-पुरुष खूब थिरके। बरातियों का स्वागत करते हुए उन्हें भोजन भी कराया गया। दुल्हन के रूप में मेंढकी को लाल चुनरी पहनाई गई थी। इस अद्भुत परंपरा को देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। गांव के पूर्व प्रधान मोतीलाल ने बताया कि कई वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है। इसके पहले चार दिनों तक रोज लोटे में जल लेकर लोग गांव की परिक्रमा करते हैं। पांचवें दिन विवाह कराया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed