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ट्रामा सेंटर में रोबोटिक सर्जरी
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Fri, 12 Jun 2015 01:59 AM IST
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बीएचयू ट्रामा सेंटर में अब रोबोटिक सर्जरी भी हो सकेगी। शुक्रवार को किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी और एसजीपीजीआई लखनऊ के पूर्व निदेशक डॉ. महेंद्र भंडारी बीएचयू के ट्रामा सेेंटर को ‘रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम’ भेंट करेंगे। इस मौके पर कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी और महामना के पौत्र जस्टिस गिरिधर मालवीय भी मौजूद रहेंगे।
18 करोड़ के इस सिस्टम को ट्रामा सेंटर के दूसरे तल पर बने पॉलीट्राम वार्ड में रखा जाएगा। दिल्ली और कोलकाता के बाद वाराणसी ही ऐसा शहर होगा, जहां रोबोटिक सर्जरी होगी।
बता दें कि रोबोटिक सर्जरी में न सिर्फ समय कम लगता है बल्कि इस विधि से किए जाने वाले ऑपरेशन में शरीर की दूसरी कोशिकाओं पर भी कोई असर नहीं पड़ता। इस विधि से पेल्विस, प्रोस्टेट, ओवरी आदि के कैंसर के ऑपरेशन आसानी से किए जा सकते हैं। इसका इस्तेमाल यूरोलॉजी, गेस्ट्रोइंट्रोलॉजी और थोरेसिक विभाग द्वारा किया जाता है। इस ऑपरेशन में रोबो आर्म्स मानव शरीर के उस हिस्से तक पहुंचते हैं, जहां चिकित्सकों के हाथ नहीं पहुंच पाते। थ्री डी तकनीक से होने वाले इस ऑपरेशन को पूरी तरह चिकित्सकों की टीम संचालित करती है लेकिन मरीज के शरीर पर रोबो आर्म्स काम करते हैं।
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की-बोर्ड के जरिये डॉक्टर रोबोट को कंट्रोल करते हैं। यहां तक कि विदेशों से भी विशेषज्ञ इस विधि के जरिए टेली सर्जरी कर सकते हैं। रोबोटिक सर्जरी में एक से डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है जबकि सामान्य लेप्रोस्कोपिक आपरेशन 15-20 हजार में हो जाते हैं। बेहद सेंसिटिव होने के नाते रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम के रखरखाव का खर्च भी ज्यादा होता है। लेकिन ऑपरेश्ान सटीक और सुविध्ााजनक होता है।
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18 करोड़ के इस सिस्टम को ट्रामा सेंटर के दूसरे तल पर बने पॉलीट्राम वार्ड में रखा जाएगा। दिल्ली और कोलकाता के बाद वाराणसी ही ऐसा शहर होगा, जहां रोबोटिक सर्जरी होगी।
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बता दें कि रोबोटिक सर्जरी में न सिर्फ समय कम लगता है बल्कि इस विधि से किए जाने वाले ऑपरेशन में शरीर की दूसरी कोशिकाओं पर भी कोई असर नहीं पड़ता। इस विधि से पेल्विस, प्रोस्टेट, ओवरी आदि के कैंसर के ऑपरेशन आसानी से किए जा सकते हैं। इसका इस्तेमाल यूरोलॉजी, गेस्ट्रोइंट्रोलॉजी और थोरेसिक विभाग द्वारा किया जाता है। इस ऑपरेशन में रोबो आर्म्स मानव शरीर के उस हिस्से तक पहुंचते हैं, जहां चिकित्सकों के हाथ नहीं पहुंच पाते। थ्री डी तकनीक से होने वाले इस ऑपरेशन को पूरी तरह चिकित्सकों की टीम संचालित करती है लेकिन मरीज के शरीर पर रोबो आर्म्स काम करते हैं।
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की-बोर्ड के जरिये डॉक्टर रोबोट को कंट्रोल करते हैं। यहां तक कि विदेशों से भी विशेषज्ञ इस विधि के जरिए टेली सर्जरी कर सकते हैं। रोबोटिक सर्जरी में एक से डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है जबकि सामान्य लेप्रोस्कोपिक आपरेशन 15-20 हजार में हो जाते हैं। बेहद सेंसिटिव होने के नाते रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम के रखरखाव का खर्च भी ज्यादा होता है। लेकिन ऑपरेश्ान सटीक और सुविध्ााजनक होता है।