फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Transition period made school education, teachers, parents made hi-tech, counseling of girl students along with activities

अमर उजाला शिक्षा अभियान: कोरोना काल में बंद रहे स्कूल, खुला रहा ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प

Mon, 28 Mar 2022 10:05 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Mon, 28 Mar 2022 10:05 AM IST
सार

 लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन शिक्षा का तेजी से प्रसार हुआ। अब यह जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। स्कूलों ने ऑनलाइन गतिविधियों के जरिए भी छात्र-छात्राआें को बेहतर माहौल देने का प्रयास किया। 

विज्ञापन
Transition period made school education, teachers, parents made hi-tech, counseling of girl students along with activities
ऑनलाइन कक्षा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कोरोना संक्रमण काल में भले ही स्कूलों पर ताला लटका रहा, लेकिन ऑनलाइन कक्षाओं ने शिक्षा जगत को कई विकल्प भी दिए। संक्रमण काल के दौरान हुई ऑनलाइन पढ़ाई ने शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थियों को हाईटेक बना दिया। ऑनलाइन अध्ययन सामग्री की उपलब्धता ने शिक्षा को अब हर दरवाजे तक पहुंचा दिया।

विज्ञापन


लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन शिक्षा का तेजी से प्रसार हुआ। अब यह जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। स्कूलों ने ऑनलाइन गतिविधियों के जरिए भी छात्र-छात्राआें को बेहतर माहौल देने का प्रयास किया। कोरोना महामारी ने जहां लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाला, वहीं शिक्षा क्षेत्र भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ।

विज्ञापन

ऑनलाइन शिक्षा के अलावा कोई रास्ता नहीं था

लॉकडाउन की वजह से स्कूलों को ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प चुनने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। इसमें सबसे बड़ी चुनौती थी, बच्चों को जोड़ना। इस चुनौती को आर्य महिला नागरमल मुरारका मॉडल स्कूल की सीईओ पूजा दीक्षित ने समझा। उन्होंने ऑनलाइन कक्षाओं में बच्चों को जोड़ने के लिए गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

इसमें छोटे बच्चों को आर्ट एंड क्राफ्ट के जरिए विषयों को समझाया गया। शिक्षकों ने भी अहम भूमिका निभाते हुए नाट्य कलाकारों के रूप में कार्य किया। स्कूल के बड़े बच्चों को शिक्षा, प्रोजेक्ट कार्य देने के साथ लगातार उनकी काउंसिलिंग की गई। ताकि वो तनाव से दूर रहें। शिक्षण कार्य के साथ विद्यालय ने सभी पर्व और त्योहारों को ऑनलाइन मनाकर, उन्हें कला, संस्कृति और परंपरा से जोड़े रखा।

गणित का डर भगाने को तैयार की गणित लैब

कोरोना काल में सब अपने घरों में ही रहने को मजबूर थे। इस दौरान बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक बच्चों तक शिक्षा और शिक्षण सामग्री पहुंचाने में लगे हुए थे। कोरोना के कारण बच्चों की पढ़ाई का क्रम न टूटे, इसके लिए आराजीलाइन ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय सिहोरवा प्रथम के प्रधानाध्यापक राकेश सिंह ने खुद जिम्मेदारी ली और बच्चों के घर तक पहुंचे, उन्हें शिक्षण सामग्री देने के साथ ही विभाग द्वारा जारी प्रिंट रिच सामग्री मुहैया कराई।


उन्होंने गांव की पक्की दीवारों पर शासन की ओर से बच्चों के लिए निर्धारित किए गए प्रेरणा लक्ष्य चार्ट बनाए। ऑनलाइन ऑडियो-वीडियो के साथ-साथ वो मोहल्ला कक्षाओं में बच्चों को खेलों के माध्यम से पढ़ाई कराते थे। बच्चों के मन से गणित का डर भगाने के लिए उन्होंने गणित की लैब तैयार कराई। स्कूल की फर्श और दीवारों पर ऐसी चित्रकारी कराई, जिसे देखकर बच्चे पढ़ाई कर सकें।

अभिभावकों को समझाना पड़ा, जरूरी है मोबाइल


प्राथमिक विद्यालय अमीनी सेवापुरी की सहायक अध्यापिका मालविका राय ने बताया कि कोरोना काल में बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया गया। शुरुआत में थोड़ी समस्या हुई तो अभिभावकों को समझाना पड़ा कि पढ़ाई जारी रखने के लिए बच्चों को मोबाइल देना आवश्यक है। ऑनलाइन पढ़ाई से फायदा हुआ कि बच्चों की पढ़ाई में कोई गैप नहीं हुआ और वह पाठ्य सामग्री को भूलें नहीं। बच्चे जो समझ नहीं पाते थे उसको वीडियो कॉल के जरिए समझाया जाता था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed