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संत कबीर के विचारों को अपनाने का संदेश
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 19 Jun 2016 01:55 AM IST
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कबीर प्राकट्य धाम लहरतारा में कबीर पंथाचार्य पंथ श्री हजूर अर्धनाम साहेब संबोधित करते हुए।
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संत कबीर की जयंती पर लहरतारा प्राकट्य स्थल पर पहुंचे दुनिया भर के कबीर पंथियों में पाखंड और छुआछूत के खात्मे का संकल्प दोहराया। संतों ने कहा कि मजहबी दीवारों में बंटे समाज को जोड़ने के लिए कबीर के विचारों को आत्मसात करना चाहिए। लहरतारा प्राकट्यधाम के महंत अर्धनाम साहेब ने कहा कि सद्गुरु संत कबीर ने दुनिया को मेहनत के बल पर सम्मान की जिंदगी जीने का संदेश दिया है।
कबीर किसी जाति, धर्म, संप्रदाय की दीवार में बंध कर रहने को पाखंड मानते थे। ऐसे में मानवता और प्रेम के धर्म का पालन करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। प्राकट्य धाम में खझड़ी बजाकर नाचने, गाने वाले कबीर पंथियों का शनिवार को देर शाम तक हुजूम उमड़ता रहा। मंदिर परिसर में एक तरफ सत्संग होता रहा तो दूसरी ओर प्रतिमा के दर्शन के लिए लंबी कतार लगी रही।
भक्तों की भीड़ मंदिर परिसर में जहां-तहां आसन जमाए रही। लहरतारा कुंड के जल को शीशियों में भर कर ले जाने की भी होड़ मची रही। हरियाणा, राजस्थान, बिहार, झारखंड समेत कई राज्यों से पहुंचे अनुयायियों का उत्साह देखते बन रहा ता। सत्संग में अर्धनाम साहेब ने कहा कि संत कबीर के विचारों को अपनाकर ही मानव मात्र का भला हो सकता है।
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धर्माधिकारी सुधाकर शास्त्री, महंत प्रेमदास साहेब, अंकित दास, नितिन भाई, सुनील दास शास्त्री, महंत सुमिरन दास, महंत मनभंग दास, महंत राजेंद्र समेत तमाम संतों ने विचार व्यक्त किए। कबीर के पदों और भजनों की किताबों के अलावा मालाओं और अन्य वस्तुओं को भी भक्तों ने मंदिर परिसर में सजाया है। इन स्टालों पर खरीदारी के लिए भी दिन भर भीड़लगी रही।
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कबीर किसी जाति, धर्म, संप्रदाय की दीवार में बंध कर रहने को पाखंड मानते थे। ऐसे में मानवता और प्रेम के धर्म का पालन करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। प्राकट्य धाम में खझड़ी बजाकर नाचने, गाने वाले कबीर पंथियों का शनिवार को देर शाम तक हुजूम उमड़ता रहा। मंदिर परिसर में एक तरफ सत्संग होता रहा तो दूसरी ओर प्रतिमा के दर्शन के लिए लंबी कतार लगी रही।
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भक्तों की भीड़ मंदिर परिसर में जहां-तहां आसन जमाए रही। लहरतारा कुंड के जल को शीशियों में भर कर ले जाने की भी होड़ मची रही। हरियाणा, राजस्थान, बिहार, झारखंड समेत कई राज्यों से पहुंचे अनुयायियों का उत्साह देखते बन रहा ता। सत्संग में अर्धनाम साहेब ने कहा कि संत कबीर के विचारों को अपनाकर ही मानव मात्र का भला हो सकता है।
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धर्माधिकारी सुधाकर शास्त्री, महंत प्रेमदास साहेब, अंकित दास, नितिन भाई, सुनील दास शास्त्री, महंत सुमिरन दास, महंत मनभंग दास, महंत राजेंद्र समेत तमाम संतों ने विचार व्यक्त किए। कबीर के पदों और भजनों की किताबों के अलावा मालाओं और अन्य वस्तुओं को भी भक्तों ने मंदिर परिसर में सजाया है। इन स्टालों पर खरीदारी के लिए भी दिन भर भीड़लगी रही।