लकड़ी, कुश, मिट्टी के आसन पर विराजे काशीपुराधिपति, तिलकोत्सव में दिखा बाबा का मनोहारी रूप
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बसंत पंचमी का शुभ संयोग और काशीपुराधिपति का तिलकोत्सव। भोले के तिलक पर काशी निहाल हुई तो काशीवासी भी बाबा के उत्सव के साक्षी बनकर निहाल हो उठे। हर-हर महादेव और डमरू की नाद के बीच बाबा विश्वनाथ के तिलकोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। गुरुवार को इसके साथ ही बाबा के विवाह की तैयारियां भी शुरू हो गईं, काशी भी अपने अधिपति के रंग में रंगी नजर आई।
गुरुवार को टेढ़ीनीम स्थित गेस्ट हाउस में सुबह मुहूर्त के अनुसार षोडशोपचार पूजन और रुद्राभिषेक किया गया। दोपहर में भोग-पूजन के बाद नए वस्त्राभूषण बाबा को धारण कराया गया। बाबा को लकड़ी की चौकी पर कुश और गंगा मिट्टी से बने आसन पर विराजमान कराया गया। शाम को छह बजे बाबा का तिलकोत्सव आरंभ हुआ।
काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बाबा की प्रतिमा पर तिलक लगाकर वैवाहिक उत्सव का शुभारंभ किया गया। बाबा का तिलकोत्सव शुरू होने के साथ ही समूचा परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। चारों ओर बाबा की जय-जयकार के साथ ही भक्त झूम उठे। शाम होते ही गेस्ट हाउस परिसर डमरू दल की डमडम और फूलों की महक से गमक उठा।
बाबा की पंचबदन प्रतिमा का शृंगार कर फूलों और माला से सजाया गया। फल और मिष्ठान्न का भोग लगाकर परंपराओं का निर्वहन हुआ। बाबा का तिलकोत्सव पूर्ण होते ही भक्तों ने हर-हर महादेव के जयघोष से काशी की परंपरा को नमन किया। पूजन अर्चन और आरती के बाद बाबा का प्रसाद वितरित किया गया।
क्षतिग्रस्त हुआ था सिंहासन
बाबा विश्वनाथ की पंचबदन रजत प्रतिमा का लगभग 350 वर्ष पुराना सिंहासन महंत आवास का एक हिस्सा गिरने की वजह से क्षतिग्रस्त हो गया था। हालांकि हादसे में बाबा की प्रतिमा सुरक्षित रही। इसके बाद से ही अस्थायी आवास में बाबा की प्रतिमा स्थापित कर पूर्व निर्धारित परंपराओं के अनुसार ही तिलकोत्सव का आयोजन किया गया।
वाराणसी। बाबा विश्वनाथ के तिलकोत्सव पर गीतकार कन्हैया दुबे केडी के संयोजन में शिवांजलि का आयोजन हुआ। रविंद्र सिंह ज्योति ने राजा हिमांचल जी पहुंचे दुवार बाबा ने किया सिंगार..., कइसे अंगुरि पे मांई हिसाब राखेलू...की मनमोहक प्रस्तुति दी। विजय बागी ने हे शंभू तिहारी इच्छा से द्वार तिहारे आए हैं..., जन-जन का कल्याण करें मेरे शंभू बाबा..., डॉ. अमलेश शुक्ल ने नागेंद्र हाराय त्रिलोचनाय..., बम-बम बोल रहा है काशी..., पारुल नंदा ने शिव जी ब्याहने चले...गौरी तेरी अंखिया सूरमे दानी... और शुभम मिश्रा ने तेरा जग में बाजे डंका...की प्रस्तुति पर भक्तों को झूमाया। इस अवसर पर प्रो. अजीत कुमार शुक्ल, डॉ. संजय गर्ग, डॉ. रितु गर्ग, संजय मिश्र, आदि मौजूद रहे।