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तीन लाख परिवार संवार सकेंगे आशियाना
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 30 Apr 2016 02:02 AM IST
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मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुका दशाश्वमेध क्षेत्र का एक मकान
गंगा किनारे 200 मीटर के दायरे में वर्षों से रह रहे भवन स्वामियों को हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद जर्जर भवनों की मरम्मत का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट के इस आदेश से पक्का महाल समेत आसपास के इलाके के 40 हजार से अधिक भवनों में रहने वाले लगभग तीन लाख परिवारों को फायदा होगा। अब तक जर्जर भवनों में गुजारा कर रहे परिवारों में अरसा बाद खुशी छाई है। दीवारों के दरकने, ईंटें और धरन आदि टूटने, कमजोर होने से हादसे की आशंका के बीच उन्हें परेशान नहीं होना पड़ेगा।
बता दें, गंगा किनारे के बाशिंदों की परेशानी को देखते हुए कुछ महीने पहले वीडीए बोर्ड की बैठक में मरम्मत पर सहमति के बाद उसे मंजूरी के लिए शासन को भेजा गया था। शासन ने भी हरी झंडी देते हुए पूरे दस्तावेज हाईकोर्ट को सौंप दिए थे। अब हाईकोर्ट की ओर से मौलिक स्वरूप से किसी तरह की छेड़छाड़ के बिना मरम्मत की अनुमति मिलने से करीब दस साल बाद गंगा किनारे के बाशिंदों को एक बड़ी राहत मिली है। तकरीबन सालों बाद वे अपने आशियाने की मरम्मत करा सकेंगे।
गंगा किनारे 200 मीटर के दायरे में भवन मरम्मत पर रोक 2005 से ही प्रभावी थी। जर्जर हो चुके भवनों के मालिकों ने मरम्मत की अनुमति के लिए वीडीए में प्रार्थना पत्र दिया लेकिन कोई राहत नहीं मिली। मामले के हाईकोर्ट में विचाराधीन होने का हवाला देकर वीडीए ने मरम्मत की अनुमति नहीं दी। हालांकि, गुपचुप तरीके से इक्का-दुक्का लोगों के निर्माण और मरम्मत की शिकायतें जब-तब जरूर सामने आती रहीं।
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बता दें, गंगा किनारे के बाशिंदों की परेशानी को देखते हुए कुछ महीने पहले वीडीए बोर्ड की बैठक में मरम्मत पर सहमति के बाद उसे मंजूरी के लिए शासन को भेजा गया था। शासन ने भी हरी झंडी देते हुए पूरे दस्तावेज हाईकोर्ट को सौंप दिए थे। अब हाईकोर्ट की ओर से मौलिक स्वरूप से किसी तरह की छेड़छाड़ के बिना मरम्मत की अनुमति मिलने से करीब दस साल बाद गंगा किनारे के बाशिंदों को एक बड़ी राहत मिली है। तकरीबन सालों बाद वे अपने आशियाने की मरम्मत करा सकेंगे।
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गंगा किनारे 200 मीटर के दायरे में भवन मरम्मत पर रोक 2005 से ही प्रभावी थी। जर्जर हो चुके भवनों के मालिकों ने मरम्मत की अनुमति के लिए वीडीए में प्रार्थना पत्र दिया लेकिन कोई राहत नहीं मिली। मामले के हाईकोर्ट में विचाराधीन होने का हवाला देकर वीडीए ने मरम्मत की अनुमति नहीं दी। हालांकि, गुपचुप तरीके से इक्का-दुक्का लोगों के निर्माण और मरम्मत की शिकायतें जब-तब जरूर सामने आती रहीं।
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