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शोध एवं विकास विषयक तीन दिवसीय कार्यशाला आरंभ
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संस्कृत भारती के महासचिव महामहोपाध्याय पद्मश्री चमू कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा अद्वितीय ज्ञान और प्रज्ञा की प्रतीक है, जिसमें ज्ञान और विज्ञान, लौकिक और पारलौकिक, कर्म और धर्म तथा भोग और त्याग का अद्भुत समन्वय है। वह शनिवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में पाणिनी भवन सभागार में आयोजित शोध एवं विकास विषयक तीन दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
काशी विद्वत परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि न्याय, मीमांसा, वेदांत इत्यादि सूत्रकारों की जो सूत्र शैली है उसकी जो टीकाएं हैं उस पर शोध होने से नवीन शोध आयाम का उदय व ज्ञान विज्ञान की नवीन धारा का प्रवाह होगा। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डॉ. वाचस्पति मिश्र ने कहा कि शोध परियोजना के माध्यम से संस्कृत ज्ञान परंपरा का विकास होगा। इस दौरान जेएनयू के प्रो. संतोष कुमार, अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी, कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी, प्रो. हरिशंकर पांडेय, प्रो. रमेश प्रसाद, डॉ. रविशंकर पांडेय आदि मौजूद रहे।
अन्नपूर्णा मंदिर के महंत का हुआ सम्मान
अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकरपुरी का सम्मान और अभिनंदन कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने किया। वहीं, पाणिनी भवन सभागार में आयोजित कार्यशाला के दौरान विश्वविद्यालय प्रकाशन संस्थान द्वारा प्रकाशित गरुणपुराणसारोद्वार: और सारस्वती सुषमा का लोकार्पण किया गया। पुस्तक के प्रधान संपादक कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी, संपादक प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी हैं।
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काशी विद्वत परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि न्याय, मीमांसा, वेदांत इत्यादि सूत्रकारों की जो सूत्र शैली है उसकी जो टीकाएं हैं उस पर शोध होने से नवीन शोध आयाम का उदय व ज्ञान विज्ञान की नवीन धारा का प्रवाह होगा। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डॉ. वाचस्पति मिश्र ने कहा कि शोध परियोजना के माध्यम से संस्कृत ज्ञान परंपरा का विकास होगा। इस दौरान जेएनयू के प्रो. संतोष कुमार, अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी, कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी, प्रो. हरिशंकर पांडेय, प्रो. रमेश प्रसाद, डॉ. रविशंकर पांडेय आदि मौजूद रहे।
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अन्नपूर्णा मंदिर के महंत का हुआ सम्मान
अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकरपुरी का सम्मान और अभिनंदन कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने किया। वहीं, पाणिनी भवन सभागार में आयोजित कार्यशाला के दौरान विश्वविद्यालय प्रकाशन संस्थान द्वारा प्रकाशित गरुणपुराणसारोद्वार: और सारस्वती सुषमा का लोकार्पण किया गया। पुस्तक के प्रधान संपादक कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी, संपादक प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी हैं।
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