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नियुक्ति में नियमों की अनदेखी के मामले में बीएचयू कुलसचिव समेत तीन बतौर आरोपी कोर्ट में तलब

Thu, 16 Jan 2020 11:19 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Thu, 16 Jan 2020 11:19 PM IST
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Three accused, including BHU registrar summoned in court for disregard of rules in appointment
court order - फोटो : court order

बीएचयू के कुलसचिव नीरज त्रिपाठी, आईआईटी बीएचयू के पूर्व निदेशक एसएन उपाध्याय और कुलसचिव की पत्नी उषा त्रिपाठी को बतौर आरोपी कोर्ट ने तलब किया है। इन पर चयन समिति के प्रभारी पद पर रहते हुए नियमों की अनदेखी कर शोध अधिकारी का पद सृजित कर पत्नी को नियुक्त करने का आरोप है। कोर्ट ने 14 फरवरी को तीनों लोगों को तलब किया है।

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दाखिल परिवाद में इन तीनों को बतौर आरोपी विचारण के लिए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम महेंद्र कुमार सिंह की अदालत ने 14 फरवरी को तलब करते हुए सम्मन जारी किया है। परिवाद में कुलसचिव पर चयन समिति का प्रभारी रहते हुए विधि विरुद्ध तरीके से निर्धारित चयन प्रक्रिया की अनदेखी करने, आधिकारिकअभिलेखों की कूटरचना, उच्चाधिकारियों को गुमराह कर पत्नी उषा को जरूरी मानकों में कटौती कर मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में शोध अधिकारी का पद सृजित कराते हुए वर्ष 2010 में नियुक्त कर देने का आरोप है।

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इसमें मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र के तत्कालीन समन्वयक एसएन उपाध्याय पर भी संलिप्तता का आरोप है। इस पद के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और कार्यकारिणी परिषद की अनुमति भी नही ली गई। परिवादी हरिकेश बहादुर सिंह ने चयन में धोखाधड़ी की जानकारी जन सूचना के तहत मांगी तब दस्तावेजी साक्ष्य और कूट रचित दस्तावेजों की जानकारी मिली।
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इसके बाद अधिवक्ता सन्तोष मौर्य के जरिये परिवाद दाखिल किया। परिवादी और सचिव रहे अश्विनी सिंह के इस बयान के बाद मानकों में कटौती कर विधि विरुद्ध तरीके से उषा की नियुक्ति की गई, अदालत ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की कई गंभीर धाराओं में प्रथम दृष्टया पर्याप्त अपराध पाते हुए बतौर आरोपी विचारण के लिए तलब किया।

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