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Varanasi News: रिसर्च और बिजनेस टायकून के बनने के बीच ये आठ स्टेप जरूरी
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आईआईटी बीएचयू के ट्रैक्शन कार्यक्रम में टेक्नोसेवियों को रिसर्च और बिजनेस टायकून बनने के बीच आठ बड़े स्टेप को पूरा करने की बात बताई गई। रविवार को समापन सत्र में प्रतिभागियों ने समस्या की पहचान, सत्यापन, ग्राहक खोजना, मिनिमम वायबल प्रोडक्ट, उत्पाद निर्माण, बिजनेस मॉडल, गो-टू-मार्केट रणनीति और फंडिंग की तैयारी जैसे कामों को जाना। इसके लिए कई कंपनियों के बिजनेसमैन के साथ संवाद, कार्यशालाएं, मेंटर क्लीनिक और व्यावहारिक अभ्यास कराए गए।
प्रतिभागियों को अपने विचारों को ग्राहकों के सामने परखने और उनमें जरूरी बदलाव करने का मौका मिला। कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. मुकेश मेश्राम ने बताया कि आईआईटी के पूर्व छात्रों और उद्योग विशेषज्ञों की भागीदारी रही। इनमें सीरियल आंत्रप्रेन्योर राजीव गुप्ता, फर्स्टक्राई और एक्सप्रेसबीज के संस्थापक अमितावा साहा, टेरी एसएएस के डॉ. आनंद जायसवाल, इंद्रा एस्ट्रा के सीटीओ धीरज डागा, मैग्ना हायर के सीईओ अकस्मत प्रधान और ट्रिफेक्टा कैपिटल के पार्टनर सौरभ सिंह सहित कई विशेषज्ञों ने बिजनेस तैयार करने का तरीका सुझाया। सैद्धांतिक ज्ञान के बजाय वास्तविक बाजार में विचारों के परीक्षण और उन्हें विस्तार योग्य उद्यम में बदलने की दिशा में व्यावहारिक अनुभव दिया।
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प्रतिभागियों को अपने विचारों को ग्राहकों के सामने परखने और उनमें जरूरी बदलाव करने का मौका मिला। कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. मुकेश मेश्राम ने बताया कि आईआईटी के पूर्व छात्रों और उद्योग विशेषज्ञों की भागीदारी रही। इनमें सीरियल आंत्रप्रेन्योर राजीव गुप्ता, फर्स्टक्राई और एक्सप्रेसबीज के संस्थापक अमितावा साहा, टेरी एसएएस के डॉ. आनंद जायसवाल, इंद्रा एस्ट्रा के सीटीओ धीरज डागा, मैग्ना हायर के सीईओ अकस्मत प्रधान और ट्रिफेक्टा कैपिटल के पार्टनर सौरभ सिंह सहित कई विशेषज्ञों ने बिजनेस तैयार करने का तरीका सुझाया। सैद्धांतिक ज्ञान के बजाय वास्तविक बाजार में विचारों के परीक्षण और उन्हें विस्तार योग्य उद्यम में बदलने की दिशा में व्यावहारिक अनुभव दिया।
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