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देश में सौ लाख मीट्रिक टन जड़ी बूटियों की जरूरत : दयाशंकर मिश्र
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आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार गोमाता, आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। इसके जल्द ही उत्साहजनक परिणाम देखने को मिलेंगे। वर्तमान में सौ लाख मीट्रिक टन जड़ी बूटियों की आवश्यकता है। इसकी पूर्ति के लिए जड़ी-बूटियों की कांट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास चल रहे हैं।
शुक्रवार को बीएचयू चिकित्सा विज्ञान संस्थान के आयुर्वेद संकाय के काय चिकित्सा विभाग एवं गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र देवलापार के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय गोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. मिश्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देसी व पारंपरिक चीजों का उत्थान शुरू हुआ है। आयुर्वेद के पुराने चिकित्सालयों को वेलनेस सेंटर बनाने की दिशा में काम चल रहा है। वैश्विक महामारी कोरोना की आपदा को अवसर में बदल दिया गया। आयुष किट एवं काढ़े ने लोगों को बहुत राहत दी। देसी गायों का संरक्षण जब देश में होने लगा तो यह सुखद संकेत है। चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एसके सिंह ने कहा कि देसी गाय का दूध अत्यंत पौष्टिक होता है। इस दौरान प्रो. कमल नयन द्विवेदी, सुनील मानसिंह, प्रो. केएन मूर्ती, प्रो. ओपी सिंह ने विचार व्यक्त किए। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सुनंदा पेढे़कर ने दिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन किया। संगोष्ठी में देश विदेश के लगभग 200 प्रतिभागी उपस्थित थे। उद्घाटन सत्र के पूर्व आयुर्वेद में पंचगव्य चिकित्सा विषय पर तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। अध्यक्षता प्रो. एसके तिवारी एवं प्रो. केके पांडेय ने की।
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शुक्रवार को बीएचयू चिकित्सा विज्ञान संस्थान के आयुर्वेद संकाय के काय चिकित्सा विभाग एवं गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र देवलापार के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय गोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. मिश्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देसी व पारंपरिक चीजों का उत्थान शुरू हुआ है। आयुर्वेद के पुराने चिकित्सालयों को वेलनेस सेंटर बनाने की दिशा में काम चल रहा है। वैश्विक महामारी कोरोना की आपदा को अवसर में बदल दिया गया। आयुष किट एवं काढ़े ने लोगों को बहुत राहत दी। देसी गायों का संरक्षण जब देश में होने लगा तो यह सुखद संकेत है। चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एसके सिंह ने कहा कि देसी गाय का दूध अत्यंत पौष्टिक होता है। इस दौरान प्रो. कमल नयन द्विवेदी, सुनील मानसिंह, प्रो. केएन मूर्ती, प्रो. ओपी सिंह ने विचार व्यक्त किए। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सुनंदा पेढे़कर ने दिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन किया। संगोष्ठी में देश विदेश के लगभग 200 प्रतिभागी उपस्थित थे। उद्घाटन सत्र के पूर्व आयुर्वेद में पंचगव्य चिकित्सा विषय पर तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। अध्यक्षता प्रो. एसके तिवारी एवं प्रो. केके पांडेय ने की।
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