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भारतीय-बौद्ध परंपरा हुई एकाकार
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 04 Oct 2016 01:54 AM IST
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गंगा पूजा करते स्पेन के मर्सियो फैविला (सफेद शर्ट में ) और मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण।
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दशाश्वमेध घाट पर सोमवार शाम गंगा आरती की सतरंगी छटा के बीच भारतीय और बौद्ध परंपरा एकाकार हुई। दुनिया के 32 देशों के तीन सौ से अधिक बौद्ध प्रतिनिधियों ने पतितपावनी गंगा की आरती का नजारा लिया। एक तरफ हवा के मंद झोकों के साथ गंगा की लहरें दूधिया रोशनी में मचलती रहीं तो दूसरी ओर गेंदा-गुलाब के फूलों से सजी मढ़ियों पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शांति-अहिंसा का संदेश दिया गया। थाईलैंड की पर्यटन एवं खेल उपमंत्री असिस्टेंट प्रोफेसर चावानी तोन्ग्रोआच ने गंगा की पंचोपचार विधि से पूजा-आरती के बाद कहा कि इसी धरती से भगवान गौतम बुद्ध ने शांति-अहिंसा का संदेश दिया था। इसे हम नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि इस कान्क्लेव से भारत के साथ एशिया और यूरोपियन देशों के व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्ते प्रगाढ़ होंगे। इसी के साथ दो दिवसीय बुद्धिस्ट कॉन्क्लेव शुरू हो गया।
शाम करीब 6:30 बजे कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच पहुंचे बुद्धिस्ट कॉन्क्लेव के प्रतिनिधियों की मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण और जिलाधिकारी विजय किरन आनंद ने अगवानी की। रेड कारपेट से होकर गुजरे यूके, जापान, म्यामार, जर्मनी, फ्रांस, पोलैंड, चेकोस्लोवाकिया, श्रीलंका, वियतनाम समेत 32 देशों के प्रतिनिधियों के बीच थाई सरकार की पर्यटन एवं खेल उप मंत्री चावानी और स्पेन के एक्ज्यूक्यूटिव डायरेक्टर मार्क फेविल्ला ने गंगा की सविधि पूजा-आरती की। इसके बाद नौ मढ़ियों पर रिद्धि-सिद्धि के रूप में 18 देव कन्याएं डंवर डुलाने लगीं। नौ वैदिक ब्राह्मणों ने घी के दीयों के बाद गुग्गुल दशांग और फिर कपूर की आरती की। शिव तांडव स्तोत्र की धुन गूंजती रही। दीपों से जगमगाती घाट की अनोखी छठा देख वहां मौजूद अतिथि भाव विभोर हो उठे।
आरती देखने के लिए आसपास के घाटों के अलावा मंदिरों की छतों पर लोग उमड़े थे। गंगा के बीच लहरों से भी कुछ लोगों ने आरती देखी। प्रतिनिधियों को गंगा सेवा निधि की ओर से गंगा आरती की परंपरा की जानकारी दी गई। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र, सचिव हनुमान यादव, सुरजीत सिंह, आशीष तिवारी ने अतिथियों का स्वागत किया। इससे पहले लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रतिनिधियों का भारतीय-बौद्ध परंपरा से खाता भेंट कर और शहनाई की मंगल ध्वनि से स्वागत किया गया। बुद्धिस्ट प्रतिनिधि मंगलवार को धमेख स्तूप और संग्रहालय देखने जाएंगे।
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शाम करीब 6:30 बजे कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच पहुंचे बुद्धिस्ट कॉन्क्लेव के प्रतिनिधियों की मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण और जिलाधिकारी विजय किरन आनंद ने अगवानी की। रेड कारपेट से होकर गुजरे यूके, जापान, म्यामार, जर्मनी, फ्रांस, पोलैंड, चेकोस्लोवाकिया, श्रीलंका, वियतनाम समेत 32 देशों के प्रतिनिधियों के बीच थाई सरकार की पर्यटन एवं खेल उप मंत्री चावानी और स्पेन के एक्ज्यूक्यूटिव डायरेक्टर मार्क फेविल्ला ने गंगा की सविधि पूजा-आरती की। इसके बाद नौ मढ़ियों पर रिद्धि-सिद्धि के रूप में 18 देव कन्याएं डंवर डुलाने लगीं। नौ वैदिक ब्राह्मणों ने घी के दीयों के बाद गुग्गुल दशांग और फिर कपूर की आरती की। शिव तांडव स्तोत्र की धुन गूंजती रही। दीपों से जगमगाती घाट की अनोखी छठा देख वहां मौजूद अतिथि भाव विभोर हो उठे।
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आरती देखने के लिए आसपास के घाटों के अलावा मंदिरों की छतों पर लोग उमड़े थे। गंगा के बीच लहरों से भी कुछ लोगों ने आरती देखी। प्रतिनिधियों को गंगा सेवा निधि की ओर से गंगा आरती की परंपरा की जानकारी दी गई। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र, सचिव हनुमान यादव, सुरजीत सिंह, आशीष तिवारी ने अतिथियों का स्वागत किया। इससे पहले लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रतिनिधियों का भारतीय-बौद्ध परंपरा से खाता भेंट कर और शहनाई की मंगल ध्वनि से स्वागत किया गया। बुद्धिस्ट प्रतिनिधि मंगलवार को धमेख स्तूप और संग्रहालय देखने जाएंगे।
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