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Varanasi News: सात समंदर पार भी बनारसी सेवई के हैं मुरीद

Mon, 10 Apr 2023 12:19 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 10 Apr 2023 12:19 AM IST
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There are followers of Banarasi Sevai even across the seven seas.
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मोहब्बत व भाईचारे का पैगाम देने वाले त्योहार ईद-बकरीद में सेवई भी खास होती है। इससे ही इसके दस्तरखान सजते हैं। खास यह कि सेवइयों में बनारसी सेवई का कोई जवाब नहीं है। इसके मुरीद अपने देश के अलावा सात समंदर पार भी हैं। ईद पर ही बनारसी सेवई की खपत छह से सात सौ टन होती है। जबकि बनारस में इसका कारोबार दो से तीन करोड़ होता है।
भदऊचुंगी इलाके में सेवई मंडी है। यहां सौ साल पहले से सेवई बनती है। बनारस की किमामी सेवई ही अन्य शहरों में बनारसी सेवई के नाम जानी जाती है। कोरोना संक्रमण के चलते दो साल सेवई का कारोबार भी प्रभावित हुआ था। पिछले साल से इस बार लोगों में ईद को लेकर उत्साह है। खरीदारी भी खूब हो रही है। व्यापारियों की मानें तो पिछले साल के मुकाबले 20 फीसदी मांग ज्यादा है। हालांकि बारिश, बिजली कटौती एवं मैदा महंगा होने से उत्पादन पर 10 प्रतिशत का असर पड़ा है। तीन पीढि़यों से सेवई का कारोबार करने वाले अशर्फीलाल केशरी व पवन केशरी ने बताया कि मंडी में अभी 40 कारखानों में सेवई बनती है। कोरोना की वजह से करीब 15 कारखाने बंद हो गए। फिर भी उत्पादन कम नहीं है। यहां किमामी, छत्ता, छड़, मोटी और कांटी वाली, लछी वाली, भुनी सेवई आदि बिकती है। ज्यादा मांग किमामी की होती है। उन्होंने बताया कि इस बार फरवरी के अंतिम सप्ताह से सेवई बन रही है। दो माह में छह से सात सौ टन सेवई बनती है। देश के करीब सभी प्रांतों में सेवई भेजी जाती है।
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पवन ने बताया कि मंडी में ईद व बकरीद को देखते हुए सेवई करीब पांच माह तक बनती है। मगर ईद को देखते दो माह उत्पादन ज्यादा होता है। प्रतिदिन 10 से 12 टन बनाया जाता है। इस समय कारीगर भी आसपास जिलों से बुलाए जाते हैं।
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बनारस की आबोहवा है अनुकूल
बनारस की आबोहवा सेवई के लिए अनुकूल होती है। 87 साल के व्यापारी अनंतलाल केशरी ने बताया कि मैं हाथ से सेवई बनाना शुरू किया था। अब मशीन से बना रहे हैं। बनारसी सेवई की अलग पहचान है, क्योंकि यहां की हवा और पानी इसके अनुकूल है। इसलिए इसकी बनावट अच्छी होती है।
यहां जाता है सेवई
आसाम, गोहाटी, दिल्ली, कोलकाता, अहमदाबाद, नागपुर, सुरत, मुम्बई, चैन्नई, रामेश्वरम़़, गोवा, अमृतसर, लुधियाना, पटना, जयपुर आदि शहरों में सेवई भेजी गई है। अशर्फीलाल ने बताया कि व्यापारी मुम्बई से यहां की सेवई की पैकेट बनाकर खाड़ी देशों में भी भेजते हैं। वैसे ज्यादा यूपी के अलावा बिहार व कोलकाता में जाता है।
5-20 रुपये बढ़े
इस बार सेवई के दाम में पांच से 20 रुपये बढ़े हैं। थोक में पांच रुपये और फुटकर में 20 रुपये किलो बढ़ा है। थोक में 50 से 55 रुपये किलो और फुटकर में 120 रुपये किलो है।

सऊदी में राय्यान व गुलाम ने मंगाया
सऊदी में नौकरी कर रहे अर्दली बाजार के मोहम्मद राय्यान व जौनपुर के मूल निवासी और बनारस में रहने वाले गुलाम हैदर भी बनारसी सेवई ही पसंद करते हैं। राय्यान के भाई इसार और गुलाम के भाई गुड्डू ने दालमंडी से सेवई खरीदकर वहां भेजा है। उनका कहना है कि उनको यहां की सेवई पसंद है। इसलिए हर साल भेजते हैं।
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