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थिएटर ओलंपिक के मंच पर जीवंत हुई भिखारी ठाकुर की ‘बटोही’
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 15 Mar 2018 10:40 PM IST
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अंजू और निलेश्वर ने प्रदान की जीवंतता
- फोटो : अमर उजाला
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भोजपुरी नाटकों के उस्ताद भिखारी ठाकुर की वैसे तो हर रचना हृदयस्पर्शी होती है लेकिन थिएटर ओलंपिक के दौरान गुरुवार को नागरी नाटक मंडली के मुरारी लाल मेहता प्रेक्षागृह में भिखारी ठाकुर के जीवन पर आधारित ‘बटोही’ नाटक का मंचन दिलों को छू गया।
निलेश्वर ने भिखारी ठाकुर के चरित्र को जीवंत कर दिया। दर्शक डेढ़ घंटे के इस नाटक की शुरूआत से अंत तक ऐसे बंधे रहे कि कब नाटक शुरू हुआ और कब वह पूर्ण हो गया कुछ पता ही नहीं चला।
दरअसल बटोही, एक नाई से लेकर जननायक हो जाने की, भिखारी ठाकुर की लम्बी रचनात्मक यात्रा का आख्यान है। जाति विशेष का होने के कारण उनके साथ किए गए दुर्व्यवहार के अलावा उनकी पत्नी और बच्चे की असामयिक मृत्यु, युवा भिखारी ठाकुर के लिए असहनीय सिद्ध होती है। वे अपने पैतृक गांव कुतुबपुर को छोड़कर फतेहपुर में बस जाते हैं। बाद में वे मंतरनी से विवाह करते हैं।
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अपने पुत्र और पुत्री के जन्म के बाद दंपती वापस पुश्तैनी गांव लौटते हैं। उनकी वापसी के बाद गांव भयंकर सूखे की चपेट में आ जाता है। अपने परिवार को वहीं छोड़कर वे खड़गपुर आ जाते हैं और अंतत: कोलकाता पहुंचते हैं।
कोलकाता से लौटने के बाद वे रामलीलाओं का आयोजन शुरू करते हैं और बाद में ग्रामीण समुदाय की संवेदना को जगाने वाले विषयों और कथानकों को उठाते हुए, अपने स्वयं के समूह ‘नाच पार्टी’ की स्थापना करते हैं। अपने नाटकों से वे तुरन्त ही विख्यात और लोकप्रिय हो जाते हैं, और अपने जीवन काल में ही वे एक किंवदंती बन जाते हैं।
प्रांगण समूह के नाटक में गिरीश मोहन, नीलेश्वर मिरा, अनिल वम्रा, डा. अंजू सूदन, निशांत कुमार झा, सोमा चक्रवर्ती, अमिताभ रंजन, संजय सिंह, राजेश कुमार पांडेय, शिवशंकर रत्नाकर, ओम प्रकाश, रवि कुमार सिन्हा, अरविंद कुमार, अर्पिता घोष, शिखा कुमारी, वागीशा कुमारी, श्रीजीता तिवारी, राजेश कुमार पांडेय, आशुतोष कुमार, संजय कुमार, अतीश कुमार, सृष्टि ने बेहतरीन अभिनय किया। रूपसज्जा अशोक घोष, संजय कुमार, वस्त्र-विन्यास सोमा चक्त्रस्वर्ती, अभय सिन्हा, वस्त्र एवं नाट्य सामग्री प्रभारी रतन कुमार, अमिताभ रंजन, अतिश कुमार, हारमोनियम एवं मुख्य गायक रामकृष्ण सिंह रहे। लेखक हृषिकेश सुलभ, परिकल्पना एवं निर्देशन अभय सिन्हा का रहा।
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निलेश्वर ने भिखारी ठाकुर के चरित्र को जीवंत कर दिया। दर्शक डेढ़ घंटे के इस नाटक की शुरूआत से अंत तक ऐसे बंधे रहे कि कब नाटक शुरू हुआ और कब वह पूर्ण हो गया कुछ पता ही नहीं चला।
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दरअसल बटोही, एक नाई से लेकर जननायक हो जाने की, भिखारी ठाकुर की लम्बी रचनात्मक यात्रा का आख्यान है। जाति विशेष का होने के कारण उनके साथ किए गए दुर्व्यवहार के अलावा उनकी पत्नी और बच्चे की असामयिक मृत्यु, युवा भिखारी ठाकुर के लिए असहनीय सिद्ध होती है। वे अपने पैतृक गांव कुतुबपुर को छोड़कर फतेहपुर में बस जाते हैं। बाद में वे मंतरनी से विवाह करते हैं।
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अपने पुत्र और पुत्री के जन्म के बाद दंपती वापस पुश्तैनी गांव लौटते हैं। उनकी वापसी के बाद गांव भयंकर सूखे की चपेट में आ जाता है। अपने परिवार को वहीं छोड़कर वे खड़गपुर आ जाते हैं और अंतत: कोलकाता पहुंचते हैं।
कोलकाता से लौटने के बाद वे रामलीलाओं का आयोजन शुरू करते हैं और बाद में ग्रामीण समुदाय की संवेदना को जगाने वाले विषयों और कथानकों को उठाते हुए, अपने स्वयं के समूह ‘नाच पार्टी’ की स्थापना करते हैं। अपने नाटकों से वे तुरन्त ही विख्यात और लोकप्रिय हो जाते हैं, और अपने जीवन काल में ही वे एक किंवदंती बन जाते हैं।
प्रांगण समूह के नाटक में गिरीश मोहन, नीलेश्वर मिरा, अनिल वम्रा, डा. अंजू सूदन, निशांत कुमार झा, सोमा चक्रवर्ती, अमिताभ रंजन, संजय सिंह, राजेश कुमार पांडेय, शिवशंकर रत्नाकर, ओम प्रकाश, रवि कुमार सिन्हा, अरविंद कुमार, अर्पिता घोष, शिखा कुमारी, वागीशा कुमारी, श्रीजीता तिवारी, राजेश कुमार पांडेय, आशुतोष कुमार, संजय कुमार, अतीश कुमार, सृष्टि ने बेहतरीन अभिनय किया। रूपसज्जा अशोक घोष, संजय कुमार, वस्त्र-विन्यास सोमा चक्त्रस्वर्ती, अभय सिन्हा, वस्त्र एवं नाट्य सामग्री प्रभारी रतन कुमार, अमिताभ रंजन, अतिश कुमार, हारमोनियम एवं मुख्य गायक रामकृष्ण सिंह रहे। लेखक हृषिकेश सुलभ, परिकल्पना एवं निर्देशन अभय सिन्हा का रहा।
लिविंग लीजेंड में छन्नू लाल ने पेश की चैती
पद्मभूषण पं. छन्नू लाल मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
थिएटर ओलंपिक के तहत लीविंग लीजेंड कार्यक्रम में पद्मभूषण पं. छन्नू लाल मिश्रा ने चैती और कजरी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नागरी नाटक मंडली के मंच पर गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम के तहत पं. मिश्र ने ख्याल, दादरा, ठुमरी, कजरी और चैती की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान मशहूर अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी ने भी चैती और कजरी का लुत्फ उठाया। वह थिएटर ओलंपिक में भाग लेने के लिए काशी पहुंची हैं।