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मिर्जापुर: इस हनुमान मदिर में पाकिस्तान के पहलवानों ने भी टेका है मत्था, देवन सिंह मिले थे हनुमान के दर्शन

Thu, 05 Nov 2020 10:12 AM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 05 Nov 2020 10:12 AM IST
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The wrestlers of Pakistan have also prayed in this Hanuman temple, Devan Singh met Hanuman Mirzapur
हनुमान मंदिर के पास का स्तंभ। - फोटो : अमर उजाला

मिर्जापुर जिले के शेरवां क्षेत्र के प्राणपुर गौरी स्थित दक्षिणमुखी हनुमानजी का मंदिर सैकड़ों वर्ष से आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है। यहां हर साल कार्तिक मास में हनुमान जयंती के अवसर पर आसपास और दूरदराज के लोग यहां आकर माथा टेकना नही भूलते हैं।

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बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण 1601 में कराया गया है। जो लाहौरी पत्थर से निर्मित है। जबकि बनारस के संकट मोचन मंदिर का निर्माण 1635 से 38 के बीच में कराया गया है। मंदिर के सामने स्थित साढे़ पांच बीघा मे फैले तालाब की खुदाई के दौरान मिला शिलाखम्भ मंदिर के निर्माण वर्ष की गवाही देता है।
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मंदिर के व्यवस्थापक महेन्द्र नाथ सिंह ने बताया कि मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने के लिए सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह के कार्यकाल के दौरान पर्यटन विभाग व पुरातत्व विभाग की लखनऊ व बनारस की टीम ने यहां का नक्शा व मंदिर के आसपास जर्जर पत्थरों को जांच के लिए ले गए थे, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई।

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दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर के ठीक सामने दर्जनों गांव बसे हैं लेकिन हनुमानजी की मूर्ति के ठीक सामने खड़ा होने पर 10 किलोमीटर दूर शेरवां पहाड़ी का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। मान्यता है कि इसी मंदिर पर विकास खंड जमालपुर के चरगोडा गांव निवासी स्व देवन सिंह को हनुमान जी का दर्शन मिला था जो नामचीन पहलवान हुए थे। जिनका अखाडा आज भी मंदिर प्रांगण में विराजमान है।

जहां आसपास के दर्जनों लोग आज भी कसरत करते हैं। यहां कसरत करने वाले स्व तारकेशवर व श्रीपति पहलवान को यूपी केशरी का खिताब भी मिल चुका है। पाकिस्तानी पहलवान मो गुलाम गौस ने यहां आकर देवन सिंह को अपना गुरू माना था। स्व देवन सिंह के बारे मे बताया जाता है कि हनुमानजी की उनके ऊपर इतनी कृपा थी कि किसी भी पेड़ को उखाड़ फेंकते थे।

हनुमानजी के मंदिर पर नित्य सैकडों की संख्या में आकर लोग शांति का अनुभव प्राप्त करते हैं। इस सिद्ध पीठ पर समय-समय पर यज्ञ व्यास पीठ का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालुओं से हमेशा मंदिर गुलजार रहता है। हनुमानजी से सच्चे मन से मांगी गई सबकी मुराद पूरी होती है।

इस सिद्धपीठ पर आज भी रोजाना दर्जनों गांवों के लोग आकर कुश्ती लड़ते है। हमेशा हवन पूजा अर्चन किया जाता है। प्राणपुर गौरी हनुमान मंदिर परिसर को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने की मांग वर्षों से की जा रही है लेकिन सरकार व विभाग की अदूरदर्शी नीतियों के चलते पर्यटन स्थल का दर्जा नहीं मिल रहा है।

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